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11 करोड़ का फर्जीवाड़ा पकड़ा: एक ही व्यक्ति की चार फर्मों ने GeM पर लगाई बोली, महंगे दाम पर बेचे कंप्यूटर-UPS

Wed, 02 Sep 2026 06:46 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Wed, 02 Sep 2026 06:46 PM IST
सार

सामाजिक न्याय विभाग की 10.99 करोड़ रुपये की खरीद में ईओडब्ल्यू की जांच में टेंडर से लेकर सामान की सप्लाई तक कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। जांच में चार फर्मों के बीच फर्जी प्रतिस्पर्धा, पुराने कंप्यूटर की सप्लाई और यूपीएस की कीमत में बड़ा अंतर मिलने का दावा किया गया है।

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11 crore fraud uncovered: Four firms owned by the same individual placed bids on GeM and sold computers and U
ईओडब्ल्यू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की करीब 10.99 करोड़ रुपये की कंप्यूटर, प्रिंटर और यूपीएस खरीद में पुलिस के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ा है। जांच में सामने आया कि टेंडर में अलग-अलग कंपनियों के नाम से बोली लगाने वाली चारों फर्में कथित तौर पर एक ही व्यक्ति से जुड़ी थीं। आरोप है कि फर्जी प्रतिस्पर्धा दिखाकर टेंडर हासिल किया गया और इसके बाद पुराने व तय मानकों से अलग सामान की सप्लाई की गई। ईओडब्ल्यू ने शिवम यादव और विनय रायकवार की शिकायतों की जांच के बाद 1 सितंबर 2026 को रणधीर कुमार पटेल (साईबाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम), हेमलता पटेल (शांति ट्रेडर्स), अशोक कुमार सिंह (एचटीएम इंडिया), देवेंद्र सिंह (सूरज इंटरप्राइजेज) और अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया है। मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2), 318(4), 336(3) और 340(2) के तहत दर्ज किया गया है।
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चार फर्मों के बीच कागजी मुकाबला
जांच में ईओडब्ल्यू को फर्मों के बीच कई समानताएं मिलीं। जीएसटी रिकॉर्ड में शांति ट्रेडर्स का मोबाइल नंबर वही मिला, जो साईबाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में दर्ज था। एचटीएम इंडिया की ई-मेल आईडी भी साईबाबा से जुड़ी मिली। इतना ही नहीं, एचटीएम इंडिया ने जीएसटी में अपना दूसरा पता प्लॉट नंबर-04, जोन-1, एमपी नगर दर्ज कराया था, जबकि यही पता साईबाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का भी था। जांच में मोबाइल नंबर के दस्तावेज भी खंगाले गए। कंपनी के रिकॉर्ड में यह नंबर रणधीर कुमार पटेल के नाम और उनके आधार कार्ड से जुड़ा मिला। ईओडब्ल्यू के अनुसार चारों फर्में GeM के दूसरे टेंडरों में भी कई बार साथ-साथ बोली लगाती रही हैं। इनमें उनकी बोली की कीमतें एक-दूसरे के काफी करीब रहीं और ठेके अलग-अलग मौकों पर इन्हीं फर्मों को मिलते रहे।
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अपने ही टेंडर में दूसरी फर्म से शिकायत
जांच में यह भी सामने आया कि शांति ट्रेडर्स ने 15 अक्तूबर 2024 को इसी टेंडर के संबंध में विभाग को अपने लेटरहेड पर पत्र दिया था। ईओडब्ल्यू ने इसे जांच में महत्वपूर्ण तथ्य माना है। जांच एजेंसी के मुताबिक इससे संकेत मिलता है कि एक ही समूह से जुड़ी दूसरी फर्म ने खुद को अलग बोलीदाता के तौर पर पेश किया।


एसर के नाम पर लोकल एसएसडी
टेंडर में एसर के कंप्यूटर सप्लाई किए जाने थे, लेकिन विभाग की अपनी कमेटी ने जब कंप्यूटर खोलकर जांचे तो उनमें तय शर्तों के मुताबिक रैम नहीं मिली। जांच में एसर की जगह दूसरी कंपनी की एसएसडी लगी होने की बात भी सामने आई। कमेटी ने साईबाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश तक की थी। कंप्यूटर के वारंटी रिकॉर्ड ने भी खरीद पर सवाल खड़े किए। कंपनी के रिकॉर्ड में इन कंप्यूटरों के इंस्टॉल होने की तारीख 22 जुलाई 2024 दर्ज थी, जबकि विभाग ने इनकी खरीद के लिए टेंडर 23 सितंबर 2024 को जारी किया था। यानी जांच एजेंसी को आशंका है कि पहले से इस्तेमाल या इंस्टॉल किए गए कंप्यूटरों को बाद में नई खरीद के तौर पर सप्लाई किया गया।

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3,754 रुपये का यूपीएस 11,247 में खरीदा
सबसे बड़ा अंतर यूपीएस की कीमत में सामने आया। जांच के अनुसार जिस यूपीएस की GeM पर कीमत 3,754 रुपये थी, उसके लिए विभाग ने 11,247 रुपये का भुगतान किया। यानी एक यूपीएस पर करीब तीन गुना कीमत चुकाई गई। वहीं यूपीएस के डिब्बे पर 6,086 रुपये की कीमत छपी थी। मामला सिर्फ कीमत तक सीमित नहीं रहा। निर्माता कंपनी सायबर पावर ने EOW को बताया कि टेंडर के दस्तावेजों में दर्ज UT1200E मॉडल इस टेंडर में सप्लाई ही नहीं किया गया था। कंपनी के अनुसार दूसरा मॉडल दिया गया था। इससे दस्तावेजों में मॉडल नंबर बदलकर खरीद को सही दिखाने की आशंका भी सामने आई है।

फर्जी एमएएफ और जेम पर अधिकृत विक्रेता बनने का आरोप
जांच में यह भी सामने आया कि बेस्ट पावर इक्विपमेंट्स ने चारों फर्मों को एक ही सामान के लिए अलग-अलग अधिकृत पत्र (MAF) जारी किए थे। एसर इंडिया ने भी तीन फर्मों को MAF दिए थे। वहीं सूरज इंटरप्राइजेज ने Acer Veriton Z4694G मॉडल के लिए जेम पर अधिकृत विक्रेता का दर्जा हासिल किया, जबकि एसर इंडिया  के रिकॉर्ड में इस फर्म को ऐसा कोई अधिकृत पत्र जारी होना दर्ज नहीं मिला। ईओडब्ल्यू के मुताबिक सूरज इंटरप्राइजेज ने टेंडर की जमा राशि के रूप में बैंक ऑफ इंडिया का जो चेक दिया था, उसमें खाता नंबर तक दर्ज नहीं था। ईओडबल्यू ने इन सभी तथ्यों के आधार पर चारों आरोपियों और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एजेंसी के अनुसार मामले की विवेचना अभी जारी है और खरीद प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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