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Bhopal News: भोपाल में अमृत-2.0 का लक्ष्य अधूरा, कई इलाकों में गंदा पानी, 641 करोड़ की योजनाएं फाइलों में अटकी

Sandeep Tiwari संदीप तिवारी
Updated Mon, 05 Jan 2026 08:35 PM IST
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सार

भोपाल में अमृत मिशन-2.0 का लक्ष्य अब तक पूरा नहीं हो सका है। शहर के कई इलाकों में लोगों को गंदा और बदबूदार पानी मिल रहा है, जबकि सीवरेज सुधार से जुड़ी 641 करोड़ रुपये की योजनाएं महीनों से फाइलों में अटकी हैं। नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन का कहना है कि अगले एक-दो महीने में काम शुरू किया जाएगा। 

Bhopal News: Amrit 2.0 targets remain unfulfilled in Bhopal, many areas receive contaminated water, and scheme
पुरानी पाइप लाइन से बहता पानी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी भोपाल में अमृत मिशन-2.0 के तहत शुद्ध जल और मजबूत सीवरेज सिस्टम का सपना अब तक अधूरा है। शहर के कई क्षेत्रों में लोगों को अब भी गंदा और बदबूदार पानी मिल रहा है, जबकि सीवरेज सुधार से जुड़ी 641 करोड़ रुपये की परियोजनाएं बीते कई महीनों से कागजों तक ही सीमित हैं। जमीनी स्तर पर अब तक एक भी बड़ा काम शुरू नहीं हो सका है।
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क्रॉस कनेक्शन बना सबसे बड़ा खतरा
भोपाल के पुराने इलाकों में दशकों पुरानी पेयजल और सीवरेज पाइपलाइनों के क्रॉस कनेक्शन की समस्या गंभीर बनी हुई है। यही वजह है कि कई क्षेत्रों में नलों से मटमैला और दुर्गंधयुक्त पानी आने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सीवरेज नेटवर्क का विस्तार और उन्नयन नहीं होगा, तब तक पानी की शुद्धता सुनिश्चित नहीं की जा सकती।
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641 करोड़ की योजनाएं, लेकिन काम शून्य
अमृत-2.0 के तहत भोपाल में सीवरेज के पैकेज-1, 2 और 4 प्रस्तावित हैं, जिनकी कुल लागत 641.15 करोड़ रुपये है। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन  इंजीनियरिंग ड्राइंग का कार्य पूरा नहीं होने के कारण कार्य अभी शुरू नहीं किया जा सका है। नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन का कहना है कि अगले एक-दो महीने में काम शुरू किया जाएगा।। नतीजा यह है कि करोड़ों की योजनाएं फाइलों में अटकी हैं और शहरवासी जोखिम भरा पानी पीने को मजबूर हैं।


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इंदौर कांड के बाद भी नहीं जागा भोपाल
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों की घटना के बाद पूरे प्रदेश में जलापूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए थे। बावजूद इसके, भोपाल में हालात सुधारने के लिए ठोस कदम नजर नहीं आ रहे। जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते काम शुरू नहीं हुआ, तो राजधानी में भी गंभीर स्थिति बन सकती है। अमृत-2.0 का दावा है कि हर शहर को सुरक्षित जल और आधुनिक सीवरेज सिस्टम मिलेगा, लेकिन भोपाल में यह दावा अब तक हकीकत में नहीं बदल पाया है। करोड़ों की योजनाएं मंजूरी के इंतजार में हैं और आम नागरिक गंदे पानी की समस्या से जूझ रहा है। 

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जमीन पर उतरा निगम अमला
इधर शहर के कई इलाकों में दूषित पानी संबंधित शिकायतें सामने आ रही हैं। निगम कमिश्नर ने बताया कि नगर निगम का अमला मैदान में उतरकर जांच में जुटा है। निगम टीमें शहर सैंपल ले रही हैं। जल के नमूने लेकर 8 प्रयोग शालाओं के माध्यम से परीक्षण किया जा रहा है। साथ हीसीवेज चैंबरों की सफाई कराई जा रही है। वहीं, सीएम हेल्पलाइन एवं महापौर हेल्पलाइन के जरिए मिली शिकायतों को संतुष्टिपूर्ण ढंग से निराकरण करके बंद किया जा रहा है
 
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