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एमपी: सोया-मक्का किसानों के लिए छुट्टी में भी खुलेंगी मंडियां, उपज बेचने के लिए नहीं करना होगा इंतजार
Fri, 30 Oct 2026 05:15 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Fri, 30 Oct 2026 05:15 PM IST
सार
सोयाबीन और मक्का की बंपर आवक के बीच मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब छुट्टियों में भी मंडियां खुली रहेंगी, जिससे किसान बिना इंतजार अपनी उपज बेच सकेंगे और भुगतान में देरी की समस्या भी कम होगी।
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सीएम डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सोयाबीन और मक्का की फसल बेचने के लिए किसानों को अब मंडियों में छुट्टी खत्म होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। प्रदेश सरकार ने किसानों की सुविधा को देखते हुए अवकाश के दिनों में भी कृषि मंडियां खुली रखने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर मंडी बोर्ड ने इस संबंध में सभी संयुक्त संचालकों को आदेश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों को मंडी के व्यापारियों से चर्चा कर ऐसी व्यवस्था बनाने को कहा गया है, जिससे छुट्टी के दिन भी फसलों की खरीदी-बिक्री जारी रह सके।
दरअसल, इन दिनों प्रदेश की मंडियों में सोयाबीन और मक्का सहित दूसरी अधिसूचित फसलों की आवक बढ़ रही है। किसान फसल लेकर मंडियों में पहुंच रहे हैं। ऐसे में अगर बीच में अवकाश आ जाता है तो उन्हें उपज बेचने के लिए अगले कार्यदिवस तक इंतजार करना पड़ता है। इससे किसानों को फसल रखने, परिवहन और दूसरी व्यवस्थाओं में परेशानी होती है। साथ ही उपज बेचने के बाद मिलने वाली राशि भी अटक जाती है। सरकार ने इसी समस्या को देखते हुए छुट्टी के दिनों में भी मंडियों का संचालन जारी रखने का निर्णय लिया है।
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व्यापारियों के साथ बैठक कर तय होगी व्यवस्था
मंडी बोर्ड ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे मंडी में कारोबार करने वाले लाइसेंसधारी व्यापारियों के साथ बैठक कर सहमति और समन्वय बनाएं। इसके बाद मंडी और उपमंडी परिसरों में अवकाश के दिन भी कृषि उपज की खरीदी-बिक्री की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसका उद्देश्य यह है कि किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचें तो उन्हें वापस न लौटना पड़े और बिक्री में अनावश्यक देरी न हो।
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फसल बेचने के बाद जल्द मिल सकेगी राशि
सरकार का मानना है कि फसल की आवक के समय मंडियां बंद रहने से किसानों को आर्थिक और व्यावहारिक दोनों तरह की दिक्कतें होती हैं। उपज बेचने में देरी होने से भुगतान मिलने में भी विलंब हो सकता है। छुट्टी के दिन मंडियां खुली रहने से किसानों को अपनी फसल बेचने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि व्यवस्था इस तरह बनाई जाए कि किसानों को किसी तरह की असुविधा न हो।
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दरअसल, इन दिनों प्रदेश की मंडियों में सोयाबीन और मक्का सहित दूसरी अधिसूचित फसलों की आवक बढ़ रही है। किसान फसल लेकर मंडियों में पहुंच रहे हैं। ऐसे में अगर बीच में अवकाश आ जाता है तो उन्हें उपज बेचने के लिए अगले कार्यदिवस तक इंतजार करना पड़ता है। इससे किसानों को फसल रखने, परिवहन और दूसरी व्यवस्थाओं में परेशानी होती है। साथ ही उपज बेचने के बाद मिलने वाली राशि भी अटक जाती है। सरकार ने इसी समस्या को देखते हुए छुट्टी के दिनों में भी मंडियों का संचालन जारी रखने का निर्णय लिया है।
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व्यापारियों के साथ बैठक कर तय होगी व्यवस्था
मंडी बोर्ड ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे मंडी में कारोबार करने वाले लाइसेंसधारी व्यापारियों के साथ बैठक कर सहमति और समन्वय बनाएं। इसके बाद मंडी और उपमंडी परिसरों में अवकाश के दिन भी कृषि उपज की खरीदी-बिक्री की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसका उद्देश्य यह है कि किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचें तो उन्हें वापस न लौटना पड़े और बिक्री में अनावश्यक देरी न हो।
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फसल बेचने के बाद जल्द मिल सकेगी राशि
सरकार का मानना है कि फसल की आवक के समय मंडियां बंद रहने से किसानों को आर्थिक और व्यावहारिक दोनों तरह की दिक्कतें होती हैं। उपज बेचने में देरी होने से भुगतान मिलने में भी विलंब हो सकता है। छुट्टी के दिन मंडियां खुली रहने से किसानों को अपनी फसल बेचने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि व्यवस्था इस तरह बनाई जाए कि किसानों को किसी तरह की असुविधा न हो।
