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MP News: सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत बोले- महिलाओं के कारण सुरक्षित है धर्म और संस्कृति

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Sat, 03 Jan 2026 11:53 PM IST
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सार

भोपाल में आयोजित मातृशक्ति संवाद कार्यक्रम में डॉ. मोहन भागवत ने महिलाओं को समाज, संस्कृति और राष्ट्र की असली ताकत बताया। उन्होंने नारी सशक्तिकरण, पारिवारिक संवाद और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।

 

MP News: RSS chief Dr. Mohan Bhagwat said that religion and culture are safe because of women.
सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा शिवनेरी भवन में आयोजित मातृशक्ति संवाद कार्यक्रम में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने महिलाओं की भूमिका को समाज, संस्कृति और राष्ट्र की धुरी बताया। उन्होंने कहा कि हमारा धर्म, संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था महिलाओं के कारण ही सुरक्षित है। कार्यक्रम की मूल भावना “नारी तू ही नारायणी” रही, जिसमें महिलाओं के सशक्तिकरण, प्रबोधन और सामाजिक जिम्मेदारी पर गंभीर विमर्श हुआ। मंच पर प्रांत संघचालक अशोक पांडेय और विभाग संघचालक सोमकांत उमालकर उपस्थित रहे।
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डॉ. भागवत ने कहा कि अब वह समय नहीं रहा जब महिलाओं को केवल सुरक्षा के नाम पर घर तक सीमित रखा जाए। आज परिवार और समाज दोनों को स्त्री-पुरुष मिलकर आगे बढ़ाते हैं, इसलिए दोनों का वैचारिक प्रबोधन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अवसर देना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और उनके विचारों को मजबूती देना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन इसे और अधिक सशक्त बनाने की जरूरत है।

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सामाजिक चुनौतियों पर बोलते हुए सरसंघचालक ने कहा कि लव जिहाद जैसी समस्याओं की रोकथाम का पहला दायित्व परिवार का है। उन्होंने इसका बड़ा कारण परिवारों में संवाद की कमी बताया। उन्होंने कहा कि जब परिवार में खुला और निरंतर संवाद होगा, तब बेटियां बहकावे का शिकार नहीं होंगी। उन्होंने तीन स्तरों पर प्रयास की बात कही- परिवार के भीतर संवाद, बच्चियों को आत्मरक्षा और सावधानी के संस्कार देना, और अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई।

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डॉ. भागवत ने नारी की भूमिका को सीमित नहीं बल्कि सशक्त बताते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में मातृत्व सर्वोच्च स्थान रखता है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में महिला को शक्ति और गरिमा का प्रतीक माना गया है। रानी लक्ष्मीबाई जैसे उदाहरण बताते हैं कि भारतीय नारी हर काल में साहस और नेतृत्व का प्रतीक रही है। कुटुंब व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि परिवार को संतुलित और संवेदनशील बनाए रखने में महिलाओं की भूमिका निर्णायक होती है। पालनकर्ता और सृजनकर्ता के रूप में महिला ही परिवार की धुरी है। उन्होंने कहा कि ‘स्व’ का भाव घर से समाज और राष्ट्र तक पहुंचाने में भी महिलाओं की अहम भूमिका होती है।

मानसिक स्वास्थ्य पर बोलते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि परिवार में कोई भी व्यक्ति अकेला महसूस न करे, यह जरूरी है। अपनापन और संवाद की कमी मानसिक तनाव का बड़ा कारण बनती है। बच्चों पर असंभव अपेक्षाएं न थोपने और उनकी रुचि के अनुसार मार्गदर्शन देने की उन्होंने सलाह दी। अपने संबोधन के अंत में सरसंघचालक ने कहा कि देश की आधी आबादी महिलाएं हैं और जब मातृशक्ति पूरी तरह जागृत होकर आगे आएगी, तब समाज और राष्ट्र स्वतः सशक्त होंगे। कार्यक्रम का समापन मातृशक्ति को केंद्र में रखकर समाज और राष्ट्र निर्माण के संकल्प तथा वंदे मातरम के साथ हुआ।
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