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एमपी में मानसून की विदाई के बाद भी बारिश का दौर: दशहरे पर भीगे रावण,आज 21 जिलों में आंधी-पानी का अलर्ट

Wed, 21 Oct 2026 07:07 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Wed, 21 Oct 2026 07:07 AM IST
सार

मध्य प्रदेश से मानसून की विदाई के 18 दिन बाद भी मौसम पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है। पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों में पांच दिन से आंधी-बारिश का दौर जारी है। दशहरे पर बारिश से कई जगह रावण के पुतले भीग गए। बुधवार को 21 जिलों में बारिश और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने का अनुमान है।
 

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Rain continues in MP even after the monsoon's departure: Effigies of Ravana get drenched on Dussehra; alert is
मौसम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश में मानसून भले ही विदा हो चुका है, लेकिन बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अक्टूबर में मौसम के बदलते मिजाज ने एक बार फिर लोगों को गर्मी, ठंडक और बारिश का मिला-जुला अनुभव कराया है। पश्चिमी और उत्तरी मध्य प्रदेश में सक्रिय मौसमी सिस्टम के कारण पिछले पांच दिन से आंधी-पानी का दौर जारी है। मंगलवार को दशहरे के दिन हुई बारिश ने कई जगह रावण दहन की तैयारियों पर भी असर डाला। कहीं पुतले भीग गए तो कहीं उन्हें बचाने के लिए बरसाती से ढंकना पड़ा। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिन भी कई जिलों में मौसम का यही मिजाज बना रह सकता है।
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दशहरे पर बारिश ने बिगाड़ा आयोजन का गणित
मंगलवार को रतलाम, महू समेत कई स्थानों पर बारिश हुई। बारिश के कारण रावण के पुतलों को नुकसान पहुंचने की स्थिति बनी और आयोजकों को उन्हें सुरक्षित रखने के लिए इंतजाम करने पड़े। दशहरे पर बारिश का असर इससे पहले 2022 में भी देखने को मिला था। उस साल भोपाल में बारिश से रावण का पुतला भीग गया था और दहन में परेशानी आई थी। प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी बारिश के कारण रावण दहन प्रभावित हुआ था। इस बार अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में सक्रिय मौसमी सिस्टम ने त्योहार के दिन मौसम का मिजाज बदल दिया। ऐसे में बारिश ने केवल तापमान ही नहीं बदला, बल्कि खुले मैदानों में होने वाले आयोजनों के लिए भी चुनौती खड़ी कर दी।
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आज 21 जिलों में बारिश का अनुमान, तेज हवाएं भी चलेंगी
सम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, बुधवार को प्रदेश के पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में बारिश का असर अधिक देखने को मिल सकता है। इंदौर, उज्जैन, गुना, राजगढ़, आगर-मालवा, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, धार, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, देवास, शाजापुर, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में बारिश होने की संभावना है। इन जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। ऐसे में लोगों को गरज-चमक और तेज हवाओं के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत है। अगले दो दिन तक मौसम में उतार-चढ़ाव बने रहने का अनुमान है।
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रात में ठंडक, दिन में कई शहरों में पारा 35 डिग्री के पार
प्रदेश में मौसम के दो अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ रात के तापमान में गिरावट से ठंडक बढ़ने लगी है, वहीं दूसरी तरफ कई शहरों में दिन का तापमान अब भी 35 डिग्री के पार बना हुआ है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, बीती रात पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 17 डिग्री दर्ज किया गया। कटनी के करौंदी में पारा 17.8 डिग्री, बालाघाट के मलाजखंड में 18.1 डिग्री, छिंदवाड़ा में 18.2 डिग्री और ग्वालियर में 18.3 डिग्री रहा। इसके उलट रतलाम, खरगोन, खंडवा, मंदसौर, उज्जैन और नर्मदापुरम में अधिकतम तापमान 35 डिग्री से ऊपर दर्ज किया गया। यानी प्रदेश में दिन और रात के तापमान के बीच अंतर बना हुआ है। बारिश और बादलों की मौजूदगी के बीच मौसम में यह बदलाव अक्टूबर के सामान्य उतार-चढ़ाव की तस्वीर पेश कर रहा है।

3 अक्टूबर को विदा हो चुका मानसून, फिर भी क्यों हो रही बारिश?
मध्य प्रदेश से 3 अक्टूबर को ही दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई हो गई थी। इस बार एक ही दिन में पूरे प्रदेश से मानसून लौट गया, लेकिन इसके बाद भी बारिश की गतिविधियां जारी हैं। इसकी वजह मानसून की वापसी के बाद सक्रिय हुए मौसमी सिस्टम हैं, जिनके असर से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बादल, तेज हवाएं और बारिश देखने को मिल रही है। मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के मुताबिक, पिछले दस साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंडक का मिला-जुला असर देखने को मिलता रहा है। इस बार भी इसी तरह की स्थिति बनी हुई है। अक्टूबर की शुरुआत में मौसम साफ हुआ और तेज धूप निकली, जबकि रात के समय तापमान में गिरावट से ठंडक महसूस होने लगी। इसके साथ ही कुछ जिलों में बारिश का दौर भी जारी रहा। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा। इसके बावजूद बारिश का वितरण सभी क्षेत्रों में एक जैसा नहीं रहा।

सामान्य से 1.5 इंच कम बारिश
जून से सितंबर तक चले मानसूनी सीजन में मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई। प्रदेश में सामान्य बारिश का आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच है। इस तरह पूरे सीजन में सामान्य से करीब 1.5 इंच कम बारिश हुई। प्रतिशत के हिसाब से प्रदेश में बारिश सामान्य से लगभग चार प्रतिशत कम रही। पूर्वी मध्य प्रदेश में कुल मिलाकर सामान्य से चार प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी हिस्से में सामान्य से 12 प्रतिशत कम पानी गिरा। हालांकि पूर्वी हिस्से के सभी जिले सामान्य बारिश के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाए। बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से पांच से 21 प्रतिशत तक कम बारिश हुई। पश्चिमी हिस्से में आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से नौ से 51 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।


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25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 में कमी
मानसूनी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 25 जिलों में बारिश का सामान्य कोटा पूरा हो गया। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं। दूसरी ओर, 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

 
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