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मध्य प्रदेश में 5 दिन फिर झमाझम: 50 किमी की रफ्तार से हवाएं, भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट
Sat, 26 Sep 2026 07:18 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sat, 26 Sep 2026 07:18 AM IST
सार
मानसून की विदाई से पहले पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश ने फिर जोर पकड़ लिया है। बजाग में 24 घंटे में 191.8 मिलीमीटर बारिश हुई। डिंडौरी में पुल डूबा, बरगी के नौ गेट खुले और नर्मदा का जलस्तर 6 से 8 फीट बढ़ा है। सतना, मैहर और उमरिया में स्कूल बंद किए गए हैं। अगले पांच दिन बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रहने की संभावना है।
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मौसम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले बारिश का एक और दौर सक्रिय हो गया है। प्रदेश में अगले पांच दिन बारिश जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान गरज-चमक के साथ 50 किमी प्रति घंटा तक की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। पिछले 24 घंटे में डिंडोरी समेत पूर्वी मध्य प्रदेश के कई इलाकों में तेज बारिश हुई। डिंडोरी के बजाग में 24 घंटे में 191.8 मिलीमीटर यानी करीब आठ इंच बारिश दर्ज की गई। लगातार बारिश से डिंडौरी, उमरिया और आसपास के जिलों में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है। कई पुल-पुलियों पर पानी आने से आवागमन भी प्रभावित हुआ है।
डिंडोरी में पुल डूबा, हाईवे पर सात घंटे यातायात प्रभावित
डिंडोरी में जोगी टिकरिया पुल पर पानी आने से जबलपुर-अमरकंटक राष्ट्रीय राजमार्ग-45 पर करीब सात घंटे तक आवागमन प्रभावित रहा। लगातार बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है। जलस्तर बढ़ने के कारण बांधों से भी पानी छोड़ा जा रहा है। डिंडौरी के शहपुरा स्थित बिलगांव बांध के दो गेट खोले गए हैं। उमरिया के संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के जोहिला बांध के चार गेट दो-दो मीटर तक खोलकर पानी निकाला जा रहा है।
बरगी के 9 गेट खुले, नर्मदा में 6 से 8 फीट तक बढ़ा पानी
जबलपुर के बरगी बांध में पानी की आवक बढ़ने के बाद जल निकासी बढ़ाई गई है। शुक्रवार को पांच गेट खोले गए थे। आवक जारी रहने पर शनिवार को चार और गेट खोले गए। अब बरगी के कुल नौ गेटों से पानी छोड़ा जा रहा है।इसका असर नर्मदा के घाटों पर भी दिखाई दे रहा है। यहां जलस्तर में करीब 6 से 8 फीट तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
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सतना, मैहर और उमरिया में स्कूल बंद
लगातार बारिश और जलभराव को देखते हुए विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए 26 सितंबर को सतना, मैहर और उमरिया में स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन ने स्थानीय परिस्थितियों और बारिश को देखते हुए यह फैसला लिया है।
अगले 48 घंटे पूर्वी एमपी के लिए अहम
मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार सितंबर के आखिरी सप्ताह में प्रदेश में मौसम सक्रिय है। गहरे अवदाब की तीव्रता कमजोर हो रही है, लेकिन इसके उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और इससे जुड़ी नमी के कारण पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश जारी रह सकती है। अगले 48 घंटे खासतौर पर महत्वपूर्ण हैं। पूर्वी मध्य प्रदेश के साथ जबलपुर, रीवा, शहडोल और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में भी बारिश का असर रहने की संभावना है। गरज-चमक के दौरान लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।
विदाई में पांच दिन, फिर भी बारिश का जोर
मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सामान्य अवधि 1 जून से 30 सितंबर तक मानी जाती है। मानसून की विदाई में अब करीब पांच दिन ही बाकी हैं। राजस्थान के कई हिस्सों से मानसून लौट चुका है, लेकिन मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का दौर सक्रिय बना हुआ है।
प्रदेश में अब तक सामान्य से 2.2 इंच कम बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक 880.5 मिलीमीटर यानी करीब 34.7 इंच बारिश हुई है। सामान्य बारिश 937.9 मिलीमीटर यानी 36.9 इंच के मुकाबले प्रदेश में करीब 2.2 इंच कम पानी गिरा है। कुल बारिश सामान्य से करीब 6 प्रतिशत कम है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश सामान्य के आसपास पहुंच गई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में अब भी औसत से करीब 11 प्रतिशत कमी है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में हुई बारिश से पूर्वी हिस्से के कई जिलों में बारिश की कमी कम हुई है।
23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
प्रदेश के अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इसके बावजूद कई जिलों में बारिश की कमी बनी हुई है। पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिले अब भी औसत से पीछे हैं।
यह भी पढ़ें-मौसम बदला तो बढ़ा वायरल का दबाव: भोपाल में एक महीने में स्वाइन फ्लू के 80 मामले, दो की हो चुकी है मौत
जून की कमी नहीं हो सकी पूरी
इस मानसून सीजन में जून में प्रदेश में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश के बाद कमी कम हुई, लेकिन मानसून के दौरान आए दो ब्रेक से बारिश का क्रम प्रभावित हुआ। सितंबर के अंतिम दिनों में हुई तेज बारिश ने खासकर पूर्वी मध्य प्रदेश के बारिश के आंकड़ों में सुधार किया है। इसके बावजूद जून की कमी पूरी नहीं हो सकी और पूरे प्रदेश में अब भी बारिश सामान्य से करीब 6 प्रतिशत कम है।
सार:
6% कम बारिश, पूर्वी एमपी ने संभाला आंकड़ा
प्रदेश में अब तक 880.5 मिलीमीटर यानी 34.7 इंच बारिश दर्ज हुई है। सामान्य बारिश 937.9 मिलीमीटर यानी करीब 36.9 इंच के मुकाबले यह 2.2 इंच कम है। कुल मिलाकर प्रदेश में सामान्य से 6% कम बारिश हुई है।हालांकि, पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का आंकड़ा अब सामान्य के आसपास पहुंच गया है। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश सामान्य है। पिछले एक सप्ताह में हुई बारिश से कई जिलों की कमी भी काफी कम हुई है। इसके उलट पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में अब भी बारिश का आंकड़ा सामान्य से 8% से 50% तक नीचे है।
23 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी
अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।
यह भी पढ़ें-भोपाल में बप्पा की विदाई में जनसैलाब: 1500 झांकियों ने खींचा ध्यान, मुस्लिम महिलाओं ने बरसाए फूल,शिवराज पहुंचे
जून की कमी अब भी पूरी नहीं हुई
इस मानसून में जून की कम बारिश का असर पूरे सीजन के आंकड़े पर बना हुआ है। जून में प्रदेश में सामान्य से 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश से स्थिति सुधरी और इन दोनों महीनों का कोटा पूरा हो गया। इसके बाद मानसून में दो बार ब्रेक आया, जिससे बारिश की रफ्तार फिर धीमी हुई। अब सितंबर के अंतिम सप्ताह में सक्रिय हुए मौसम तंत्र से पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश हो रही है, लेकिन जून की कमी पूरी नहीं हो सकी है। यही वजह है कि सीजन खत्म होने से कुछ दिन पहले भी प्रदेश की कुल बारिश सामान्य से 6% कम है।
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डिंडोरी में पुल डूबा, हाईवे पर सात घंटे यातायात प्रभावित
डिंडोरी में जोगी टिकरिया पुल पर पानी आने से जबलपुर-अमरकंटक राष्ट्रीय राजमार्ग-45 पर करीब सात घंटे तक आवागमन प्रभावित रहा। लगातार बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है। जलस्तर बढ़ने के कारण बांधों से भी पानी छोड़ा जा रहा है। डिंडौरी के शहपुरा स्थित बिलगांव बांध के दो गेट खोले गए हैं। उमरिया के संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के जोहिला बांध के चार गेट दो-दो मीटर तक खोलकर पानी निकाला जा रहा है।
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बरगी के 9 गेट खुले, नर्मदा में 6 से 8 फीट तक बढ़ा पानी
जबलपुर के बरगी बांध में पानी की आवक बढ़ने के बाद जल निकासी बढ़ाई गई है। शुक्रवार को पांच गेट खोले गए थे। आवक जारी रहने पर शनिवार को चार और गेट खोले गए। अब बरगी के कुल नौ गेटों से पानी छोड़ा जा रहा है।इसका असर नर्मदा के घाटों पर भी दिखाई दे रहा है। यहां जलस्तर में करीब 6 से 8 फीट तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
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सतना, मैहर और उमरिया में स्कूल बंद
लगातार बारिश और जलभराव को देखते हुए विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए 26 सितंबर को सतना, मैहर और उमरिया में स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन ने स्थानीय परिस्थितियों और बारिश को देखते हुए यह फैसला लिया है।
अगले 48 घंटे पूर्वी एमपी के लिए अहम
मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार सितंबर के आखिरी सप्ताह में प्रदेश में मौसम सक्रिय है। गहरे अवदाब की तीव्रता कमजोर हो रही है, लेकिन इसके उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और इससे जुड़ी नमी के कारण पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश जारी रह सकती है। अगले 48 घंटे खासतौर पर महत्वपूर्ण हैं। पूर्वी मध्य प्रदेश के साथ जबलपुर, रीवा, शहडोल और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में भी बारिश का असर रहने की संभावना है। गरज-चमक के दौरान लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।
विदाई में पांच दिन, फिर भी बारिश का जोर
मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सामान्य अवधि 1 जून से 30 सितंबर तक मानी जाती है। मानसून की विदाई में अब करीब पांच दिन ही बाकी हैं। राजस्थान के कई हिस्सों से मानसून लौट चुका है, लेकिन मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का दौर सक्रिय बना हुआ है।
प्रदेश में अब तक सामान्य से 2.2 इंच कम बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक 880.5 मिलीमीटर यानी करीब 34.7 इंच बारिश हुई है। सामान्य बारिश 937.9 मिलीमीटर यानी 36.9 इंच के मुकाबले प्रदेश में करीब 2.2 इंच कम पानी गिरा है। कुल बारिश सामान्य से करीब 6 प्रतिशत कम है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश सामान्य के आसपास पहुंच गई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में अब भी औसत से करीब 11 प्रतिशत कमी है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में हुई बारिश से पूर्वी हिस्से के कई जिलों में बारिश की कमी कम हुई है।
23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
प्रदेश के अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इसके बावजूद कई जिलों में बारिश की कमी बनी हुई है। पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिले अब भी औसत से पीछे हैं।
यह भी पढ़ें-मौसम बदला तो बढ़ा वायरल का दबाव: भोपाल में एक महीने में स्वाइन फ्लू के 80 मामले, दो की हो चुकी है मौत
जून की कमी नहीं हो सकी पूरी
इस मानसून सीजन में जून में प्रदेश में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश के बाद कमी कम हुई, लेकिन मानसून के दौरान आए दो ब्रेक से बारिश का क्रम प्रभावित हुआ। सितंबर के अंतिम दिनों में हुई तेज बारिश ने खासकर पूर्वी मध्य प्रदेश के बारिश के आंकड़ों में सुधार किया है। इसके बावजूद जून की कमी पूरी नहीं हो सकी और पूरे प्रदेश में अब भी बारिश सामान्य से करीब 6 प्रतिशत कम है।
सार:
6% कम बारिश, पूर्वी एमपी ने संभाला आंकड़ा
प्रदेश में अब तक 880.5 मिलीमीटर यानी 34.7 इंच बारिश दर्ज हुई है। सामान्य बारिश 937.9 मिलीमीटर यानी करीब 36.9 इंच के मुकाबले यह 2.2 इंच कम है। कुल मिलाकर प्रदेश में सामान्य से 6% कम बारिश हुई है।हालांकि, पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का आंकड़ा अब सामान्य के आसपास पहुंच गया है। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश सामान्य है। पिछले एक सप्ताह में हुई बारिश से कई जिलों की कमी भी काफी कम हुई है। इसके उलट पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में अब भी बारिश का आंकड़ा सामान्य से 8% से 50% तक नीचे है।
23 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी
अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।
यह भी पढ़ें-भोपाल में बप्पा की विदाई में जनसैलाब: 1500 झांकियों ने खींचा ध्यान, मुस्लिम महिलाओं ने बरसाए फूल,शिवराज पहुंचे
जून की कमी अब भी पूरी नहीं हुई
इस मानसून में जून की कम बारिश का असर पूरे सीजन के आंकड़े पर बना हुआ है। जून में प्रदेश में सामान्य से 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश से स्थिति सुधरी और इन दोनों महीनों का कोटा पूरा हो गया। इसके बाद मानसून में दो बार ब्रेक आया, जिससे बारिश की रफ्तार फिर धीमी हुई। अब सितंबर के अंतिम सप्ताह में सक्रिय हुए मौसम तंत्र से पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश हो रही है, लेकिन जून की कमी पूरी नहीं हो सकी है। यही वजह है कि सीजन खत्म होने से कुछ दिन पहले भी प्रदेश की कुल बारिश सामान्य से 6% कम है।
