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Burhanpur: पतंगबाजी के दौरान हुए हादसे में हाईटेंशन लाइन से झुलसा 12 साल का बालक, 36 घंटे तक स्थिति चिंताजनक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुरहानपुर Published by: बुरहानपुर ब्यूरो Updated Tue, 14 Jan 2025 10:39 AM IST
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सार

बुरहानपुर के न्यामतपुरा वार्ड में पतंग उड़ाते समय 12 वर्षीय बच्चा हाईटेंशन तार की चपेट में आकर झुलस गया। स्थानीय लोगों की तत्परता और तुरंत अस्पताल पहुंचाने से उसकी जान बचाई गई। स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पूर्व पार्षद ने बिजली विभाग की लापरवाही पर सवाल उठाए। 

12-year-old boy got burnt by a high-tension line while flying kites
पतंगबाजी के दौरान हाईटेंशन लाइन से झुलसा 12 साल का बालक
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विस्तार

मध्यप्रदेश के बुरहानपुर नगर के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित न्यामतपुरा वार्ड में 12 साल का बालक बिजली की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से बुरी तरह झुलस गया। जानकारी के अनुसार सोमवार देर शाम बच्चा पतंगबाजी के दौरान इस हादसे का शिकार हो गया। वह बिजली के तारों से चिपक गया था, जिससे वह बुरी तरह से जख्मी हुआ है। इस दौरान जैसे ही स्थानीय लोगों को बच्चे की चीखने चिल्लाने की आवाज सुनाई दी, तो मौके पर बड़ी संख्या में लोग उसे बचाने दौड़ पड़े। इसके बाद आम लोगों ने कड़ी मशक्कत से बच्चें को हाईटेंशन तारों के तेज प्रभाव से छुड़ाया। वहीं परिजनों ने बच्चें को बोरले अस्पताल में भर्ती कराया है, जहां सर्जन डॉक्टरों की टीम ने बच्चे का प्राथमिक उपचार तो कर दिया है, जिससे उसकी जान बचाने में तो फिलहाल सफलता मिली है, लेकिन फिर भी डॉक्टरों की मानें तो अभी स्थिति करीब 36 घंटे बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

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इधर इस मामले में स्थानीय पूर्व पार्षद अब्दुल रईस फ्रूटवाला ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने बिजली विभाग पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है। उनके मुताबिक न्यामतपुरा वार्ड में कई जगहों पर बिजली के खंभों पर तार लटक रहे हैं। यह खुले तार लोगों के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं, लेकिन इस पर बिजली विभाग का कोई ध्यान नहीं है। उनका आरोप है कि खुले तारों के कारण यह बड़ा हादसा हुआ है। यदि समय रहते स्थानीय लोग तत्परता नहीं दिखाते तो बच्चे की जान जा सकती थी। समय पर परिजन और स्थानीय नागरिकों ने बच्चें को अस्पताल ले गए, और उसी समय इलाज मिल जाने से बच्चे की जान बच पाई है।
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अभी 36 घंटे हैं चिंताजनक
उन्होंने कहा कि बिजली विभाग द्वारा खुले तारों को पाइप से सुरक्षित करना चाहिए, जिससे आम लोगों को खुले तारों के खतरे से छुटकारा मिल जाए। इधर बोरले हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉक्टर सुबोध बोरले ने बताया कि फिलहाल बच्चे का प्राथमिक ट्रीटमेंट किया गया है। प्रारंभिक रूप से बच्चे की जान बच चुकी है, लेकिन अभी स्थिति 36 घंटे तक चिंताजनक है। अधिकांश मामलों में 36 घंटे बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाती है।

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