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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Datia News ›   A fake DIG's uniform operated for a year and a half, extorting 29.5 lakh rupees from a bullion trader.

done-Datia News: फर्जी डीआईजी की वर्दी में डेढ़ साल तक चला ठगी का खेल,

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दतिया Published by: दतिया ब्यूरो Updated Fri, 12 Jun 2026 10:53 AM IST
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सार

झांसी में मनीष कुमार नामक ठग ने खुद को एंटी करप्शन फोर्स का डीआईजी बताकर सर्राफा कारोबारी प्रियांश सिंघल से 29.5 लाख रुपये की ठगी की। फर्जी वर्दी और दस्तावेजों से वह डेढ़ साल तक लोगों को भ्रमित करता रहा। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। 

A fake DIG's uniform operated for a year and a half, extorting 29.5 lakh rupees from a bullion trader.
दतिया में पकड़ाया फर्जी डीआईजी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

शहर के बड़े व्यापारियों को अपना शिकार बनाने वाले एक शातिर ठग का पर्दाफाश हुआ है। आरोपी मनीष कुमार खुद को एंटी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल फोर्स का डीआईजी बताकर डेढ़ साल से लोगों को ठग रहा था। काली वर्दी, चार गनमैन और भारी भरकम नाम वाली संस्था की आड़ में उसने लाखों रुपए ऐंठ लिए। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। 



ठगी का सबसे बड़ा मामला प्रतिष्ठित सर्राफा कारोबारी प्रियांश सिंघल के साथ सामने आया। मनीष ने प्रियांश को एंटी करप्शन की फर्जी एफआईआर और नकली पहचान पत्र दिखाए। उसने कहा कि आपके खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत है। केस रफा दफा कराने के नाम पर आरोपी ने अलग अलग किस्तों में 29.5 लाख रुपए वसूल लिए।
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मनीष हर बार वर्दी में प्रियांश से अकेले में मिलता था। उसका वीआईपी लुक देखकर कोई शक नहीं कर पाता था। उसने फाइनल रिपोर्ट लगाने और फाइल दिल्ली भेजने के बहाने भी 4.5 लाख रुपए हड़प लिए। आरोपी की हिम्मत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह फरवरी में प्रियांश की शादी में बिना बुलाए पहुंच गया। काली वर्दी और चार गनमैन के साथ उसने समारोह में एंट्री ली। दूल्हे के साथ मंच पर फोटो खिंचवाई और मेहमानों के बीच अपना रसूख दिखाता रहा। शादी के माहौल में भी उसने प्रियांश का भरोसा जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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ऐसे रचा ठगी का खेल
इस पूरे खेल के पीछे एक पुराना लेनदेन सामने आया है। प्रियांश सिंघल के पिता स्व. रामू और रिटायर्ड प्रोफेसर एके गुप्ता के बीच लंबे समय से आर्थिक लेनदेन था। प्रोफेसर गुप्ता ने मदद के लिए एंटी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल फोर्स नाम की संस्था से संपर्क किया था। उनकी पर्चियां और जानकारी मनीष के हाथ लग गईं। मनीष जब प्रियांश की दुकान पर पहुंचा तो उसने वही सारी बातें दोहराईं जो प्रोफेसर और प्रियांश के बीच हुई थीं। फर्जी एफआईआर की कॉपी दिखाकर उसने प्रियांश को पूरी तरह अपने झांसे में ले लिया। बाद में कलेक्ट्रेट में प्रो. गुप्ता से मिलने पर प्रियांश को ठगी का अहसास हुआ। झांसी एंटी करप्शन ब्यूरो में पूछताछ की तो पता चला कि मनीष नाम का कोई इंस्पेक्टर वहां तैनात ही नहीं है।

आरोपी गिरफ्तार
जिस संस्था के नाम पर मनीष ठगी कर रहा था, वह असल में एक गैर सरकारी संगठन है। इसका दफ्तर झांसी के सीपरी बाजार स्थित सिद्धेश्वर नगर में है। सेवानिवृत्त कर्मचारी चंद्रशेखर आजाद ने इसे बनाया है। संस्था का काम भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ आम लोगों को कानूनी सलाह देना है। यह पीड़ितों की शिकायतों को सही प्रारूप में तैयार कर पुलिस और उच्च अधिकारियों तक पहुंचाती है। संस्था के पास गिरफ्तारी या जांच का कोई सरकारी अधिकार नहीं है। मनीष ने इसी नाम का गलत फायदा उठाया। फिलहाल सिविल लाइन थाने की पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है उसकी राष्ट्रीय असिस्टेंट प्रमुख की प्लेट लगी कार भी जब्त कर ली है। फिलहाल थाने में आरोपी से पुलिस पूछताछ कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि मनीष प्रियांश के अलावा उसके चचेरे भाई से भी इंस्पेक्टर बनकर मिला था। वह हर मुलाकात में वर्दी पहनकर आता था। 

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