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इंदौर: 267 करोड़ खर्च के बाद भी धूल, गड्ढे और घंटों ट्रैफिक जाम, कब शुरू होंगे ये 4 फ्लायओवर?
Fri, 23 Oct 2026 06:26 AM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Fri, 23 Oct 2026 06:26 AM IST
सार
इंदौर में 267 करोड़ की लागत से बन रहे 4 सिक्स लेन फ्लायओवर का काम धीमा होने से वाहन चालक परेशान हैं। मूसाखेड़ी, देवास नाका, सत्यसाईं व क्रिस्टल आईटी पार्क में निर्माण अधूरा होने से जाम लग रहा है और 2027 तक ही सुगम ट्रैफिक शुरू होने की उम्मीद है।
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चारों फ्लायओवर की तस्वीरें।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
शहर के यातायात को सुगम बनाने और ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से शुरू किए गए 4 सिक्स लेन फ्लायओवर का निर्माण कार्य काफी धीमी गति से चल रहा है। वर्ष 2023-24 में 267 करोड़ रुपये की लागत से मूसाखेड़ी, क्रिस्टल आईटी पार्क, देवास नाका और सत्यसाईं चौराहे पर फ्लायओवर का निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया था। वर्तमान स्थिति यह है कि किसी फ्लायओवर का 40 प्रतिशत तो किसी का 45 प्रतिशत काम अभी भी अधूरा है। इन निर्माण कार्यों की आधिकारिक समय सीमा दिसंबर-2026 निर्धारित है, परंतु अभी गर्डर, डेक स्लैब, एप्रोच रोड, डामरीकरण और सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम बाकी हैं। कार्य की मौजूदा गति को देखते हुए यातायात सुचारू होने में 2027 तक का समय लग सकता है।
निर्माण स्थलों पर सर्विस रोड की दुर्दशा और जाम की समस्या
वर्तमान में मूसाखेड़ी में 65 प्रतिशत, देवास नाका में 70 प्रतिशत, सत्यसाईं में 60 प्रतिशत और क्रिस्टल आईटी पार्क फ्लायओवर का केवल 55 प्रतिशत निर्माण ही पूरा हो सका है। निर्माण कार्य के कारण सर्विस रोड पर उड़ती धूल, गड्ढे और संकरी सड़कों की वजह से वाहन चालकों को रोजाना जूझना पड़ रहा है। व्यस्त समय में इन सभी चौराहों पर भीषण जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
देवास नाका: औद्योगिक क्षेत्र में ट्रैफिक डायवर्जन की बाधा
देवास नाका फ्लायओवर का 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। देवास नाका से मांगलिया मार्ग की ओर अतिक्रमण हटाकर सर्विस रोड का काम पूरा कर लिया गया है, लेकिन कुछ प्रमुख हिस्सों में निर्माण जारी रखने के लिए ट्रैफिक डायवर्जन की अनुमति मिलना शेष है। डायवर्जन की अनुमति न मिलने से काम प्रभावित हुआ है। औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण भारी वाहनों के अत्यधिक दबाव से यहां लगातार जाम लग रहा है।
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सत्य साईं चौराहा: पाइपलाइन शिफ्टिंग के बाद गर्डर का काम जारी
सत्यसाईं फ्लायओवर का 60 प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण हुआ है। शुरुआत में पाइपलाइन शिफ्टिंग के कारण काम में रुकावट आई थी, जिसे अब सुलझा लिया गया है। फिलहाल मुख्य सड़क पर बैरिकेडिंग कर गर्डर लॉन्चिंग और पिलर निर्माण का काम जारी है। बॉम्बे हॉस्पिटल और विजय नगर क्षेत्र को जोड़ने वाले इस मार्ग पर सुबह और शाम के वक्त वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं।
मूसाखेड़ी चौराहा: ट्रैफिक की सबसे अधिक उलझन
मूसाखेड़ी फ्लायओवर का अब तक 65 प्रतिशत कार्य संपन्न हुआ है। निर्माण के दौरान रास्ते में आने वाले तीन टॉयलेट ब्लॉक, चौराहे पर स्थित मूर्ति और अन्य अतिक्रमणों को हटाया गया, जबकि मंदिरों को अस्थायी रूप से स्थानांतरित कर कार्य आगे बढ़ाया गया। लगभग 35 प्रतिशत कार्य शेष होने के कारण इस मार्ग पर सबसे अधिक यातायात बाधित हो रहा है और आम जनता को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
क्रिस्टल आईटी पार्क: विविध तकनीकी समस्याओं से प्रभावित हुआ काम
क्रिस्टल आईटी पार्क फ्लायओवर का कार्य सबसे धीमा है और केवल 55 प्रतिशत ही हो पाया है। प्रारंभिक चरण में आईसीएआर की भूमि हस्तांतरण, एआईसीटीएसएल की साइट हैंडओवर तथा अवंतिका गैस की पाइपलाइन शिफ्टिंग जैसे मुद्दों के कारण काम में देरी हुई। इस क्षेत्र से आईटी पार्क की ओर आवाजाही करने वाले लोगों को व्यस्त समय में अत्यधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
निर्धारित समय सीमा में निर्माण पूरा होने पर प्रश्नचिह्न
शहर के प्रसिद्ध आर्किटेक्ट और प्रशासन के कई प्रोजेक्ट में सलाहकार रहे अतुल सेठ बताते हैं कि फ्लायओवर निर्माण में केवल पिलर खड़े करना ही पर्याप्त नहीं होता। गर्डर कास्टिंग, लॉन्चिंग, सुपर स्ट्रक्चर, डेक स्लैब, एप्रोच रोड, डामरीकरण और सुरक्षा बैरियर जैसे अनेक कार्य का समय पर होना महत्व रखता है। यदि निर्माण की रफ्तार में तेजी नहीं लाई गई तो दिसंबर की तय समय सीमा में काम पूरा होना असंभव है और आम जनता को इन फ्लायओवर की पूरी सुविधा 2027 में ही मिल पाएगी।
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निर्माण स्थलों पर सर्विस रोड की दुर्दशा और जाम की समस्या
वर्तमान में मूसाखेड़ी में 65 प्रतिशत, देवास नाका में 70 प्रतिशत, सत्यसाईं में 60 प्रतिशत और क्रिस्टल आईटी पार्क फ्लायओवर का केवल 55 प्रतिशत निर्माण ही पूरा हो सका है। निर्माण कार्य के कारण सर्विस रोड पर उड़ती धूल, गड्ढे और संकरी सड़कों की वजह से वाहन चालकों को रोजाना जूझना पड़ रहा है। व्यस्त समय में इन सभी चौराहों पर भीषण जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
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देवास नाका: औद्योगिक क्षेत्र में ट्रैफिक डायवर्जन की बाधा
देवास नाका फ्लायओवर का 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। देवास नाका से मांगलिया मार्ग की ओर अतिक्रमण हटाकर सर्विस रोड का काम पूरा कर लिया गया है, लेकिन कुछ प्रमुख हिस्सों में निर्माण जारी रखने के लिए ट्रैफिक डायवर्जन की अनुमति मिलना शेष है। डायवर्जन की अनुमति न मिलने से काम प्रभावित हुआ है। औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण भारी वाहनों के अत्यधिक दबाव से यहां लगातार जाम लग रहा है।
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सत्य साईं चौराहा: पाइपलाइन शिफ्टिंग के बाद गर्डर का काम जारी
सत्यसाईं फ्लायओवर का 60 प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण हुआ है। शुरुआत में पाइपलाइन शिफ्टिंग के कारण काम में रुकावट आई थी, जिसे अब सुलझा लिया गया है। फिलहाल मुख्य सड़क पर बैरिकेडिंग कर गर्डर लॉन्चिंग और पिलर निर्माण का काम जारी है। बॉम्बे हॉस्पिटल और विजय नगर क्षेत्र को जोड़ने वाले इस मार्ग पर सुबह और शाम के वक्त वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं।
मूसाखेड़ी चौराहा: ट्रैफिक की सबसे अधिक उलझन
मूसाखेड़ी फ्लायओवर का अब तक 65 प्रतिशत कार्य संपन्न हुआ है। निर्माण के दौरान रास्ते में आने वाले तीन टॉयलेट ब्लॉक, चौराहे पर स्थित मूर्ति और अन्य अतिक्रमणों को हटाया गया, जबकि मंदिरों को अस्थायी रूप से स्थानांतरित कर कार्य आगे बढ़ाया गया। लगभग 35 प्रतिशत कार्य शेष होने के कारण इस मार्ग पर सबसे अधिक यातायात बाधित हो रहा है और आम जनता को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
क्रिस्टल आईटी पार्क: विविध तकनीकी समस्याओं से प्रभावित हुआ काम
क्रिस्टल आईटी पार्क फ्लायओवर का कार्य सबसे धीमा है और केवल 55 प्रतिशत ही हो पाया है। प्रारंभिक चरण में आईसीएआर की भूमि हस्तांतरण, एआईसीटीएसएल की साइट हैंडओवर तथा अवंतिका गैस की पाइपलाइन शिफ्टिंग जैसे मुद्दों के कारण काम में देरी हुई। इस क्षेत्र से आईटी पार्क की ओर आवाजाही करने वाले लोगों को व्यस्त समय में अत्यधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
निर्धारित समय सीमा में निर्माण पूरा होने पर प्रश्नचिह्न
शहर के प्रसिद्ध आर्किटेक्ट और प्रशासन के कई प्रोजेक्ट में सलाहकार रहे अतुल सेठ बताते हैं कि फ्लायओवर निर्माण में केवल पिलर खड़े करना ही पर्याप्त नहीं होता। गर्डर कास्टिंग, लॉन्चिंग, सुपर स्ट्रक्चर, डेक स्लैब, एप्रोच रोड, डामरीकरण और सुरक्षा बैरियर जैसे अनेक कार्य का समय पर होना महत्व रखता है। यदि निर्माण की रफ्तार में तेजी नहीं लाई गई तो दिसंबर की तय समय सीमा में काम पूरा होना असंभव है और आम जनता को इन फ्लायओवर की पूरी सुविधा 2027 में ही मिल पाएगी।
