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Indore: सिंदूर खेला के साथ दी इंदौर में मां को विदाई, 100 साल से निभा रहे परंपरा

Wed, 21 Oct 2026 01:48 PM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Wed, 21 Oct 2026 01:48 PM IST
सार

इंदौर में बंगाली समाज ने दशहरे के दूसरे दिन गुरुवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सिंदूर खेला उत्सव मनाया। नवलखा स्थित बंगाली क्लब में महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर विदाई दी और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर उत्सव की खुशियां साझा कीं।

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Indore: Goddess bid farewell with 'Sindoor Khela'; a tradition upheld for 100 years
बंगाली परिवारों ने सिंदूर खेला उत्सव मनाया। - फोटो : amarujala

विस्तार

इंदौर में बंगाली समाज का दुर्गा उत्सव पारंपरिक अंदाज में मनाया जाता है। उत्सव के दौरान धुनुची पूजा होती है, जिसमें पारंपरिक नृत्य शैली के जरिए मां दुर्गा की स्तुति की जाती है। नवरात्रि उत्सव के समापन पर सिंदूर खेला की परंपरा निभाई जाती है। इसमें बंगाली समाज की महिलाएं शामिल होती हैं।

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गुरुवार को पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने मां दुर्गा की प्रतिमा को सिंदूर अर्पित किया। इसके बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर उत्सव की खुशियां मनाईं। फिर मां दुर्गा को विदाई दी गई। इस दौरान कई महिलाएं भावुक भी हो गईं।

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मान्यता है कि बंगाली समाज में मां दुर्गा अपने मायके आती हैं। पांच दिनों तक उनकी प्रतिमा स्थापित कर उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान पारंपरिक व्यजंन भी बनाए जाते हैऔर माता को उसका भोग लगाया जाता है। पांच दिनी उत्सव के बाद मां को विदाई दी जाती है। विदाई के दिन महिलाएं सिंदूर खेला की रस्म निभाती हैं। इसमें मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करने के बाद महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं।

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इंदौर में सिंदूर खेला की यह परंपरा करीब 100 साल से निभाई जा रही है। पहले यह उत्सव नवलखा में मनाया जाता था, लेकिन अब सुखलिया ग्राम में भी बंगाली समाज के लोग इस परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। यहां भी काफी समाजजन जुटते है। दुर्गा पंडाल को भी पारंपरिक शैली में सजाया जाता है। 

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