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मणिकर्णिका घाट: होलकर राजपरिवार ने ली आपत्ति, कहा-तोड़ी मूर्तियां खासगी ट्रस्ट को सौंपे

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Wed, 14 Jan 2026 10:37 AM IST
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सार

घाट तोड़े जाने की खासगी ट्रस्ट ने निंदा की है। ट्रस्ट ने काशी प्रशासन को एक पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने कहा कि इस घाट का निर्माण देवी अहिल्या ने सन 1791 में कराया था। यह प्राचीन घाट है। इसका सरंक्षण किया जाना चाहिए था, लेकिन उसे तोड़ दिया।

Indore: Holkar royal family objects to the demolition of Manikarnika Ghat, demands handing over the vandalized
रिचर्ड होलकर ने घाट तोड़े जाने की निंदा की। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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काशी में देवी अहिल्या द्वारा बनाए गए मणिकर्णिका महाश्मशान घाट को तोड़े जाने का विरोध तेज हो गया है। इस घाट पर लगी देवी अहिल्या की प्रतिमा भी तोड़ दी गई है। इससे होलकर राजपरिवार भी नाराज है। प्रिंस रिचर्ड होलकर ने कहा कि- विकास के नाम पर घाट तोड़े जाने में बरती गई लापरवाही की जांच होना चाहिए और तोड़ी गई देवी अहिल्या व शिव प्रतिमा को खासगी ट्रस्ट को सौंपा जाना चाहिए।

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काशी में घाट के पुनर्विकास के नाम पर कार्यदायी संस्था ने पत्थरों को तोड़ना शुरू कर दिया। उन्हें तोड़ने के लिए भी पोकलेन की मदद ली गई। पोकलेन ने घाट तोड़ने के दौरान मूर्तियों को भी नहीं देखा और मूर्तियां तोड़कर उसे भी मलबे में दबा दिया।

जब देवी अहिल्या ने घाट का निर्माण कराया था तो उन्होंने गंगा नदी के सामने शिवलिंग की पूजा करते हुए अपनी मूर्तियां भी घाट पर बनवाई थीं, जो अब टूट चुकी हैं। इसे लेकर इंदौर का धनगर समाज व अन्य समाज जल्दी ही आंदोलन करने वाले है।

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ट्रस्ट को लौटाएं मूर्तियां

खासगी ट्रस्ट के अध्यक्ष रिचर्ड होलकर ने घाट तोड़े जाने की कड़ी निंदा करते हुए काशी प्रशासन को एक पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा कि इस घाट का निर्माण देवी अहिल्या ने सन 1791 में कराया था। यह प्राचीन घाट है। इसका सरंक्षण किया जाना चाहिए था, लेकिन उसे तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि मलबे में दबी प्रतिमा को ट्रस्ट को सौंप दिया जाए। उन्हें फिर हम घाट पर स्थापित कराएंगे, ताकि देवी अहिल्या की पवित्र गंगा की पूजा करते हुए प्रतिमा के दर्शन तीर्थ यात्री कर सके।

 

 

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