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भविष्यः साल 2030 तक मिलेंगे 19 करोड़ नए जॉब्स! इंदौर की बेटियों को मिला सफलता का महामंत्र
Tue, 03 Nov 2026 07:00 AM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Tue, 03 Nov 2026 07:00 AM IST
सार
शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित Gen-Z कार्यशाला में छात्राओं को AI व नए करियर अवसरों की जानकारी दी गई, साथ ही 24 आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं को 2,28,890 रुपये की छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन पुरस्कार बांटे गए।
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INDORE NEWS
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में Gen-Z करियर संवाद कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्राचार्य डॉ. बी.डी. श्रीवास्तव के संरक्षण एवं प्रशासनिक अधिकारी डॉ. वी.पी. बैरागी के मार्गदर्शन में स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को करियर के नए अवसरों, तकनीकी बदलावों और रोजगार की संभावनाओं से अवगत कराने के साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना था।
मौलिकता और आत्मविश्वास का दिया संदेश
कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. बी.डी. श्रीवास्तव ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में अपनी विशिष्ट प्रतिभा, क्षमता और अभिव्यक्ति होती है। छात्राओं को दूसरों की नकल करने अथवा उनके जैसा बनने के बजाय अपनी मौलिक पहचान विकसित करनी चाहिए। उन्होंने मोबाइल फोन एवं सोशल मीडिया के उपयोग के संदर्भ में स्वयं की पहचान और अभिव्यक्ति के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि छात्राएं दूसरों से प्रभावित होने के बजाय अपनी प्रतिभा को पहचानें और आत्मविश्वास के साथ अपनी अलग पहचान स्थापित करें। भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप बताते हुए उन्होंने छात्राओं से अपनी आंतरिक शक्ति पहचानने का आह्वान किया।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल कौशल पर विचार
कार्यशाला के मुख्य अतिथि श्री जयंतीलाल भंडारी ने बताया कि वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी को Gen-Z कहा जाता है। वर्तमान समय में पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ओर तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में युवाओं को तकनीक से भयभीत होने के बजाय उसे सीखने और समझने की आवश्यकता है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अनुमानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2030 तक विश्व में लगभग 19 करोड़ नए डिजिटल रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। भारत विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और डिजिटल तकनीक का विस्तार अब समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच रहा है।
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छात्राओं को छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन पुरस्कारों का वितरण
विशाल भगत चैरिटेबल ट्रस्ट के सहयोग से आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं को छात्रवृत्ति वितरित की गई। मुख्य अतिथि श्री प्रकाश भगत ने छात्राओं को जीवन में निरंतर कर्म करने और आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया। इस अवसर पर 24 छात्राओं को कुल 2,28,890 रुपये की छात्रवृत्ति राशि वितरित की गई। इसके साथ ही लघु उद्योग भारती के साथ किए गए एमओयू के तहत मुख्य अतिथि राजेन्द्र सुखेजा, अध्यक्ष, पोलो ग्राउंड इकाई, इंदौर ने छात्राओं को प्रोत्साहन प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए और उन्हें उद्यमिता तथा स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
आयोजन समिति और उपस्थित सदस्य
कार्यक्रम में वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. मनीषा जोशी, जिला नोडल एवं संयोजक डॉ. सीमा तिवारी तथा टी.पी.ओ. एवं सह-संयोजक प्रो. रितु माथुरिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन समिति की सदस्य डॉ. निधि गुप्ता, डॉ. प्रियंका जैन एवं डॉ. साधना मंडलोई सहित महाविद्यालय की बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में तकनीकी सहयोग अभिषेक पालीवाल ने प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. निधि गुप्ता ने किया तथा आभार प्रो. सीमा तिवारी ने व्यक्त किया।
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मौलिकता और आत्मविश्वास का दिया संदेश
कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. बी.डी. श्रीवास्तव ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में अपनी विशिष्ट प्रतिभा, क्षमता और अभिव्यक्ति होती है। छात्राओं को दूसरों की नकल करने अथवा उनके जैसा बनने के बजाय अपनी मौलिक पहचान विकसित करनी चाहिए। उन्होंने मोबाइल फोन एवं सोशल मीडिया के उपयोग के संदर्भ में स्वयं की पहचान और अभिव्यक्ति के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि छात्राएं दूसरों से प्रभावित होने के बजाय अपनी प्रतिभा को पहचानें और आत्मविश्वास के साथ अपनी अलग पहचान स्थापित करें। भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप बताते हुए उन्होंने छात्राओं से अपनी आंतरिक शक्ति पहचानने का आह्वान किया।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल कौशल पर विचार
कार्यशाला के मुख्य अतिथि श्री जयंतीलाल भंडारी ने बताया कि वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी को Gen-Z कहा जाता है। वर्तमान समय में पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ओर तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में युवाओं को तकनीक से भयभीत होने के बजाय उसे सीखने और समझने की आवश्यकता है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अनुमानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2030 तक विश्व में लगभग 19 करोड़ नए डिजिटल रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। भारत विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और डिजिटल तकनीक का विस्तार अब समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच रहा है।
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छात्राओं को छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन पुरस्कारों का वितरण
विशाल भगत चैरिटेबल ट्रस्ट के सहयोग से आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं को छात्रवृत्ति वितरित की गई। मुख्य अतिथि श्री प्रकाश भगत ने छात्राओं को जीवन में निरंतर कर्म करने और आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया। इस अवसर पर 24 छात्राओं को कुल 2,28,890 रुपये की छात्रवृत्ति राशि वितरित की गई। इसके साथ ही लघु उद्योग भारती के साथ किए गए एमओयू के तहत मुख्य अतिथि राजेन्द्र सुखेजा, अध्यक्ष, पोलो ग्राउंड इकाई, इंदौर ने छात्राओं को प्रोत्साहन प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए और उन्हें उद्यमिता तथा स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
आयोजन समिति और उपस्थित सदस्य
कार्यक्रम में वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. मनीषा जोशी, जिला नोडल एवं संयोजक डॉ. सीमा तिवारी तथा टी.पी.ओ. एवं सह-संयोजक प्रो. रितु माथुरिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन समिति की सदस्य डॉ. निधि गुप्ता, डॉ. प्रियंका जैन एवं डॉ. साधना मंडलोई सहित महाविद्यालय की बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में तकनीकी सहयोग अभिषेक पालीवाल ने प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. निधि गुप्ता ने किया तथा आभार प्रो. सीमा तिवारी ने व्यक्त किया।
