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Indore News: इंदौर में प्रदूषण फैला रहीं 243 फैक्ट्रियां, हाईकोर्ट की फटकार के बाद कटेगी बिजली

अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Wed, 21 Jan 2026 02:47 PM IST
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सार

Indore News: इंदौर में बढ़ते प्रदूषण पर उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फटकार लगाई है। कोर्ट की सख्ती के बाद 243 उद्योगों को नोटिस जारी किए गए हैं और बिना अनुमति चल रहे उद्योगों की बिजली काटने के निर्देश दिए गए हैं। 

Indore News High Court issues notice to 243 industries over pollution and lack of permits
वायु प्रदूषण - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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इंदौर में स्वच्छता के दावों के बीच पनप रहे जल और वायु प्रदूषण के गंभीर मामले पर माननीय उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। शहर में बिना किसी वैधानिक अनुमति के संचालित हो रहे और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने वाले उद्योगों के खिलाफ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। इस दौरान न्यायालय ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताते हुए उन्हें कड़ी फटकार लगाई है, जिसके परिणामस्वरूप अब जिले में एक बड़े स्तर की कार्रवाई शुरू हो गई है।
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नियमों का उल्लंघन करने वाले 243 उद्योगों को नोटिस जारी हुआ
उच्च न्यायालय के कड़े निर्देशों के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सक्रियता दिखाते हुए इंदौर जिले की 243 औद्योगिक इकाइयों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि इनमें से अधिकांश उद्योगों के पास न तो संचालन का वैध लाइसेंस है और न ही वे प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन कर रहे हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि केवल नोटिस तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नियमों की अनदेखी करने वाले इन उद्योगों के बिजली कनेक्शन काटकर उन्हें तत्काल प्रभाव से बंद करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
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शहर की आबोहवा और जल स्तर पर मंडराता खतरा
इंदौर की पहचान स्वच्छता को लेकर रही है, लेकिन हालिया रिपोर्टों ने एक डरावनी तस्वीर पेश की है। जहां एक तरफ शहर का भूजल दूषित पाया गया है, वहीं दूसरी तरफ वायु गुणवत्ता सूचकांक भी लगातार खतरनाक स्तर की ओर बढ़ रहा है। हाईकोर्ट ने इस स्थिति को बेहद गंभीर मानते हुए इसे मध्यप्रदेश जल प्रदूषण निवारण तथा वायु प्रदूषण निवारण अधिनियमों का स्पष्ट उल्लंघन करार दिया है। विशेष रूप से खनन क्षेत्र, स्टोन क्रशर और रेड-ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों को इस प्रदूषण का मुख्य स्रोत माना गया है, जिनसे आम जनता के स्वास्थ्य पर सीधा खतरा बना हुआ है।

बिजली विभाग के साथ मिलकर सख्त तालाबंदी की तैयारी
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इंदौर क्षेत्रीय अधिकारी सतीश चौकसे ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि 243 उद्योगों को चिह्नित कर नोटिस भेजे जा चुके हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि कई उद्योग लंबे समय से बिना अनुमति के चल रहे थे। इन सभी डिफॉल्टर उद्योगों की सूची बिजली कंपनी को आधिकारिक तौर पर सौंप दी गई है, ताकि इनके बिजली संचालन को बंद किया जा सके। कोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 5961 पंजीकृत उद्योग हैं, जिनमें से लगभग 1000 से अधिक इकाइयां प्रदूषण विभाग की सहमति के बिना ही संचालित हो रही थीं।

आगामी 9 फरवरी को होने वाली सुनवाई पर टिकी नजरें
प्रशासनिक लापरवाही और उद्योगों की मनमानी पर अब कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई हाईकोर्ट में 9 फरवरी को निर्धारित की गई है। इस दौरान महाधिवक्ता द्वारा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय के समक्ष जवाब प्रस्तुत किया जाएगा। यदि शासन और बोर्ड की ओर से दी गई जानकारी और की गई कार्रवाई संतोषजनक नहीं पाई जाती है, तो आने वाले समय में उद्योगों के खिलाफ और भी कठोर दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
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