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Indore: हजारों तोतों को मिल गई मोहलत, हाईकोर्ट ने रोक दी कुल्हाड़ियां, मेट्रो के लिए कटेंगे सैकड़ों पेड़

अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Fri, 30 Jan 2026 06:55 PM IST
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सार

Indore News: हाई कोर्ट ने रानीसराय में मेट्रो रेल निर्माण के लिए लगभग 200 से अधिक पेड़ों की कटाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों (तोतों) के आवास की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए शासन को नोटिस जारी किया है।

Indore News Madhya Pradesh High Court Stays Felling of 200 Trees for Metro Project at Ranisarai SP Office Prem
कोर्ट के स्टे के बाद रानी सराय में खुशी की लहर। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
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इंदौर में रीगल तिराहे पर बन रहे मेट्रो स्टेशन के लिए पेड़ों की कटाई और हजारों पक्षियों की सुरक्षा का मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर 16 फरवरी तक स्टे लगा दिया है। हाईकोर्ट ने प्रशासन से पूछा है कि क्या आपने वहां पर पेड़ों की कटाई की अनुमति ली है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में प्रियांशु जैन की याचिका पर सुनवाई हुई। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता लवेश सारस्वत ने पक्ष रखा। वहीं प्रतिवादी की ओर से उप महाधिवक्ता सुदीप भार्गव और अधिवक्ता विकास जायसवाल उपस्थित हुए।
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पर्यावरण संरक्षण और वैधानिक नियमों का उल्लंघन
यह जनहित याचिका इंदौर के रानीसराय क्षेत्र (एस.पी. ऑफिस परिसर) में मेट्रो रेल ब्रिज निर्माण के उद्देश्य से लगभग 200 से अधिक पेड़ों की प्रस्तावित और जारी कटाई के विरुद्ध दायर की गई थी। याचिका में यह गंभीर चिंता जताई गई कि यदि इस कार्रवाई को तत्काल नहीं रोका गया, तो इससे पर्यावरण का अपूरणीय नुकसान होगा और शहर का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ जाएगा। तर्क दिया गया कि यह पूरी प्रक्रिया वन संरक्षण अधिनियम 1980 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन कर बिना अनुमति के की जा रही है।
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हजारों तोतों के आवास पर संकट और नियमों की अनदेखी
याचिकाकर्ता के वकील ने न्यायालय को अवगत कराया कि ये पेड़ हजारों तोतों का प्राकृतिक निवास स्थान हैं, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित श्रेणी में आते हैं। 

नगर निगम ने कहा हमें पेड़ों की कटाई का आवेदन ही नहीं मिला
सुनवाई के दौरान नगर निगम इंदौर के उद्यान अधिकारी द्वारा 9 जनवरी 2026 को जारी एक पत्र का भी हवाला दिया गया। इस पत्र में स्पष्ट किया गया था कि निगम को रानीसराय भूमि पर खड़े पेड़ों को काटने या स्थानांतरित करने के लिए कोई औपचारिक आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।



जबलपुर मुख्य पीठ के पूर्व आदेश का संदर्भ
मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता ने जबलपुर मुख्य पीठ द्वारा नीरज गर्ग बनाम भारत संघ के मामले में 26 नवंबर 2025 को दिए गए आदेश का संदर्भ दिया। उस आदेश में न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि राज्य में बिना संबंधित वृक्ष अधिकारी और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की समिति की अनुमति के कोई भी पेड़ काटा या प्रत्यारोपित नहीं किया जाएगा। न्यायालय ने माना कि बिना अनुमति पेड़ों की कटाई संविधान और जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।

न तो पेड़ काटेंगे न ही स्थानांतरित करेंगे
न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं। न्यायालय ने अंतरिम राहत प्रदान करते हुए निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई की तारीख तक रानीसराय भूमि, रीगल चौराहा, इंदौर में स्थित किसी भी पेड़ को न तो काटा जाएगा और न ही वहां से स्थानांतरित किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई अब 16 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।

जनहित पार्टी और कई संस्थाएं कर रहीं विरोध
हाल ही में कई संस्थाओं ने रीगल पर पेड़ों की कटाई का विरोध किया था। अभ्यास मंडल, द नेचर वालेंटियर, गो ग्रीन मिशन, जीवन प्रवाह और खंडेलवाल जन मंच जैसे कई प्रमुख संगठनों ने एक सुर में अपनी आवाज बुलंद की। वहीं जनहित पार्टी के द्वारा यहां पर पिछले एक महीने से धरना दिया जा रहा है। लगातार इंदौर के लोग यहां पर पेड़ों की कटाई का विरोध करने के लिए पहुंच रहे हैं। जनहित पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय जैन ने कहा कि 30 दिनों से धरना जारी था जिसे कोर्ट के स्टे के बाद फिलहाल स्थगित किया जा रहा है। यदि आवश्यकता पड़ती है तो कार्यकर्ता फिर से पेड़ों को बचाने के लिए इसी तरह डटेंगे। हम किसी भी कीमत पर यहां पेड़ों की कटाई नहीं होने देंगे। जब तक धरना स्थगित रहेगा तब तक पूरे इंदौर में इस विषय पर जन जागरण किया जाएगा ताकि इन पेड़ों को बचाया जा सके और इंदौर के पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके। 
 
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