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Indore News: पोलियो को मात देकर लगातार 4 स्वर्ण जीते, देश की पहली खिलाड़ी जिन्होंने रचा इतिहास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Tue, 31 Mar 2026 11:58 AM IST
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सार
Indore News: पैरा ताइक्वांडो खिलाड़ी सपना शर्मा ने नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। दोनों पैरों में पोलियो के बावजूद सपना ने लगातार चौथी बार राष्ट्रीय गोल्ड मेडल हासिल किया, वह ऐसा करने वाली देश की पहली दिव्यांग खिलाड़ी बनी हैं।
गोल्ड जीतने के बाद बेटी अनाया और पति संदीप के साथ सपना।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
बेंगलुरु के कोरामंगला स्टेडियम में आयोजित पैरा ताइक्वांडो नेशनल चैंपियनशिप 2025-26 में मध्य प्रदेश की प्रतिभाशाली खिलाड़ी सपना शर्मा ने अपनी स्वर्णिम सफलता का सिलसिला जारी रखते हुए एक बार फिर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया है। यह सपना शर्मा का लगातार चौथा नेशनल गोल्ड मेडल है, जिसके साथ ही वह देश की पहली ऐसी दिव्यांग खिलाड़ी बन गई हैं जिन्होंने खेल जगत में यह विशिष्ट उपलब्धि हासिल की है। इंदौर की रहने वाली सपना की इस ऐतिहासिक जीत ने न केवल उनके शहर बल्कि पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है।
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फाइनल मुकाबले में तेलंगाना की खिलाड़ियों को दी मात
इस दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन 28 और 29 मार्च को किया गया था, जिसमें देशभर के लगभग 70 खिलाड़ियों ने अपना कौशल दिखाया। फाइनल मुकाबले में सपना शर्मा ने अपनी बेहतरीन तकनीक और आत्मविश्वास का परिचय देते हुए प्रतिद्वंद्वियों को पस्त कर दिया। कड़े मुकाबले में तेलंगाना की ममता को रजत पदक से संतोष करना पड़ा, जबकि कृष्णवेणी ने कांस्य पदक हासिल किया। पूरे टूर्नामेंट के दौरान सपना का प्रदर्शन इतना प्रभावी रहा कि उन्होंने हर राउंड में अपना दबदबा बनाए रखा और स्वर्ण पदक पर अपना नाम दर्ज कराया।
संघर्षों से लड़कर हासिल किया यह मुकाम
सपना शर्मा की सफलता की यह कहानी जितनी सुखद है, उनका सफर उतना ही चुनौतीपूर्ण रहा है। दोनों पैरों में पोलियो होने के बावजूद सपना ने शारीरिक अक्षमता को कभी अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया। ताइक्वांडो से पहले वह टेबल टेनिस में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और आर्म रेसलिंग में भी राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुकी हैं। उनकी यह यात्रा आर्थिक कठिनाइयों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच निरंतर अभ्यास की मिसाल है। सपना का मानना है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो शारीरिक बाधाएं सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं।
परिस्थितियों को बनाया अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा
सपना अपनी सफलता का श्रेय अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और कभी हार न मानने वाले जज्बे को देती हैं। वह किसी अन्य के बजाय अपनी खुद की जिंदगी और संघर्षों को अपना रोल मॉडल मानती हैं। उनके परिवार में पति संजय वर्मा और बेटी हनाया हैं, जो उनके इस कठिन सफर में हमेशा साथ खड़े रहे हैं। सपना का कहना है कि उन्होंने जो कुछ भी सीखा है, अपनी परिस्थितियों से ही सीखा है। वह उन सभी खिलाड़ियों से प्रेरणा लेती हैं जो विपरीत हालातों के बावजूद देश के लिए मेडल जीतकर लाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा फहराने का है अगला लक्ष्य
सपना शर्मा अब अपनी इस सफलता को अंतरराष्ट्रीय पटल पर ले जाना चाहती हैं। वह पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं, हालांकि कई बार आर्थिक कारणों से वह चयन होने के बाद भी विदेशी दौरों पर नहीं जा सकीं। लेकिन इन असफलताओं ने उन्हें और अधिक मजबूत बनाया है। अब उनका एकमात्र लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए अधिक से अधिक स्वर्ण पदक जीतना और देश का गौरव बढ़ाना है। वह कहती हैं कि वह गिरकर संभलने और हर बार पहले से अधिक मजबूत होकर उभरने में विश्वास रखती हैं।
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इस दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन 28 और 29 मार्च को किया गया था, जिसमें देशभर के लगभग 70 खिलाड़ियों ने अपना कौशल दिखाया। फाइनल मुकाबले में सपना शर्मा ने अपनी बेहतरीन तकनीक और आत्मविश्वास का परिचय देते हुए प्रतिद्वंद्वियों को पस्त कर दिया। कड़े मुकाबले में तेलंगाना की ममता को रजत पदक से संतोष करना पड़ा, जबकि कृष्णवेणी ने कांस्य पदक हासिल किया। पूरे टूर्नामेंट के दौरान सपना का प्रदर्शन इतना प्रभावी रहा कि उन्होंने हर राउंड में अपना दबदबा बनाए रखा और स्वर्ण पदक पर अपना नाम दर्ज कराया।
संघर्षों से लड़कर हासिल किया यह मुकाम
सपना शर्मा की सफलता की यह कहानी जितनी सुखद है, उनका सफर उतना ही चुनौतीपूर्ण रहा है। दोनों पैरों में पोलियो होने के बावजूद सपना ने शारीरिक अक्षमता को कभी अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया। ताइक्वांडो से पहले वह टेबल टेनिस में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और आर्म रेसलिंग में भी राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुकी हैं। उनकी यह यात्रा आर्थिक कठिनाइयों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच निरंतर अभ्यास की मिसाल है। सपना का मानना है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो शारीरिक बाधाएं सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं।
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सपना अपनी सफलता का श्रेय अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और कभी हार न मानने वाले जज्बे को देती हैं। वह किसी अन्य के बजाय अपनी खुद की जिंदगी और संघर्षों को अपना रोल मॉडल मानती हैं। उनके परिवार में पति संजय वर्मा और बेटी हनाया हैं, जो उनके इस कठिन सफर में हमेशा साथ खड़े रहे हैं। सपना का कहना है कि उन्होंने जो कुछ भी सीखा है, अपनी परिस्थितियों से ही सीखा है। वह उन सभी खिलाड़ियों से प्रेरणा लेती हैं जो विपरीत हालातों के बावजूद देश के लिए मेडल जीतकर लाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा फहराने का है अगला लक्ष्य
सपना शर्मा अब अपनी इस सफलता को अंतरराष्ट्रीय पटल पर ले जाना चाहती हैं। वह पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं, हालांकि कई बार आर्थिक कारणों से वह चयन होने के बाद भी विदेशी दौरों पर नहीं जा सकीं। लेकिन इन असफलताओं ने उन्हें और अधिक मजबूत बनाया है। अब उनका एकमात्र लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए अधिक से अधिक स्वर्ण पदक जीतना और देश का गौरव बढ़ाना है। वह कहती हैं कि वह गिरकर संभलने और हर बार पहले से अधिक मजबूत होकर उभरने में विश्वास रखती हैं।
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