इंदौर: आरएसएस ने कहा-मुद्दे उठाना जेन-जी का अधिकार, उन्हें देश विरोधी न समझे
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य के बीच युवा पीढ़ी, सोशल मीडिया के दुरुपयोग, आरक्षण और नक्सलवाद जैसे मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट किया है। इंदौर में आयोजित बैठक में इन विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने एजेंडे में जेन-जी के मुद्दों, सोशल मीडिया के दुरुपयोग, नक्सलवाद सहित अन्य विषयों को शामिल किया है और इन्हें लेकर अपना रुख भी स्पष्ट किया है। इंदौर में हुई अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में इन मुद्दों पर मंथन हुआ।
सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि मुद्दे उठाना और अपनी बात रखना युवा पीढ़ी का अधिकार है। युवाओं को देशविरोधी नहीं समझा जाना चाहिए, लेकिन अराजक शक्तियों द्वारा उन्हें भड़काकर अशांति और हिंसा फैलाना गलत है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी में व्यवस्था के प्रति विरोध का भाव रहता है, लेकिन इसका राजनीतिक इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। युवाओं से सकारात्मक संवाद होना चाहिए और उनके मुद्दों का समाधान किया जाना चाहिए।
होसबाले ने कहा कि कानून के जरिए सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकना आसान नहीं है। देश में टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन इस तरह की रोक प्रभावी साबित नहीं हुई। कई देशों में सोशल मीडिया को लेकर नियम बनाए जा रहे हैं। भारत में भी इसकी मांग उठ रही है, लेकिन संघ का मानना है कि पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों के जरिए ही इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है। आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसे राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए। जिन वर्गों को आरक्षण की जरूरत है, उन्हें इसका लाभ मिलना चाहिए। यह एक व्यवस्था है।
88 संभाग बनेंगे
आरएसएस ने संगठन के संचालन की क्षेत्रीय व्यवस्था समाप्त कर दी है। देशभर में अब 47 प्रांतों के स्थान पर 88 संभाग बनाए जाएंगे। संभाग स्तर पर ही पदों पर नियुक्तियां होंगी। होसबाले ने बताया कि संघ एक लाख नए स्थानों पर शाखाएं शुरू करेगा। इनका स्वरूप दैनिक के बजाय साप्ताहिक या पाक्षिक हो सकता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष देशभर में 99 हजार 423 दैनिक शाखाएं संचालित हो रही हैं। वहीं, साप्ताहिक मिलनों की संख्या 34 हजार और मासिक मिलनों की संख्या 14 हजार से अधिक है। देशभर में एक लाख तीन हजार से अधिक स्थानों पर संघ की शाखाएं और मिलन आयोजित किए जा रहे हैं।
शताब्दी वर्ष के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में 65 हजार से अधिक हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए, जिनमें करीब पांच करोड़ लोगों ने सहभागिता की। इसके अलावा युवाओं के लिए 50 हजार से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। सामाजिक नेतृत्व से जुड़े लोगों के साथ भी संवाद कार्यक्रम किए गए। एसआईआर पर उन्होंने कहा कि मतदाता का नाम उसी स्थान की मतदाता सूची में होना चाहिए, जहां वह वास्तव में रहता है। गैर-नागरिकों का मतदाता सूची में शामिल होना देश की सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं है।
भारत की सीमा में ही काम करेगा संघ
होसबाले ने कहा कि विश्व के कई देशों में संघ के स्वयंसेवक हैं, लेकिन संघ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने संगठन का विस्तार नहीं करेगा। संघ का कार्यक्षेत्र भारत की भौगोलिक सीमा तक ही सीमित रहेगा।
