मप्र हाईकोर्ट: हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा रद्द, हाईकोर्ट ने आरोपी को किया दोषमुक्त; ये दलील दी
हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा निरस्त कर आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि केवल मोबाइल CDR पर्याप्त सबूत नहीं है। पुलिस टावर लोकेशन, CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्य पेश नहीं कर सकी।
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हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आरोपी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने जिला न्यायालय इटारसी द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को निरस्त करते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल मोबाइल फोन की सीडीआर के आधार पर किसी आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस ए.के. सिंह की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पुलिस ने मोबाइल टावर लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र नहीं किए। ऐसे में यह साबित नहीं हो सका कि मृतक और आरोपी घटना के समय साथ थे।
क्या है मामला?
बैतूल निवासी प्रकाश उर्फ मुन्ना ने जिला न्यायालय इटारसी द्वारा हत्या समेत अन्य धाराओं में सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अभियोजन के अनुसार, 9 अप्रैल 2021 को मुलताई निवासी 45 वर्षीय जगन गीद आरोपी प्रकाश से मिलने बैतूल आया था। उसके पास करीब 40 हजार रुपये और कुछ जेवरात थे। आरोप था कि बैतूल बस स्टैंड पर जगन की मुलाकात प्रकाश और उसके एक साथी से हुई। इसके बाद तीनों एक ढाबे पर खाना खाने गए।
अभियोजन का आरोप था कि आरोपियों ने कोल्ड ड्रिंक में जहर मिलाकर जगन को पिला दिया। इसके बाद दोनों आरोपी उसे केसला थाना क्षेत्र के एक खेत में ले गए और गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। 18 अप्रैल 2021 को मृतक का शव बरामद हुआ था, जिसकी पहचान उसकी बहन ने की थी। जगन के लापता होने की रिपोर्ट भी उसकी बहन ने मुलताई थाने में दर्ज कराई थी।
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अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। इसके बावजूद उसे दोषी ठहराकर सजा सुनाई गई, जबकि सहआरोपी को दोषमुक्त कर दिया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन यह भी साबित नहीं कर सका कि घटना के दिन आरोपी अपने गांव में नहीं था। आरोपी का दावा था कि वह उस दिन शिवनाथ के घर पर एक अन्य व्यक्ति के साथ बिजली का काम कर रहा था, लेकिन अभियोजन इस दावे को गलत साबित नहीं कर पाया।
युगलपीठ ने यह भी माना कि जिस ढाबे में मृतक और आरोपियों के खाना खाने की बात कही गई, वहां के सीसीटीवी फुटेज जांच के दौरान पेश नहीं किए गए। पुलिस ने केवल मृतक और आरोपी के बीच मोबाइल पर हुई बातचीत की सीडीआर पेश की, जिससे दोनों के बीच बातचीत की पुष्टि तो होती है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि दोनों घटना के समय साथ थे। इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने आरोपी प्रकाश उर्फ मुन्ना की अपील स्वीकार करते हुए उसकी आजीवन कारावास की सजा निरस्त कर दी और उसे दोषमुक्त कर दिया।
