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MP News: महामारी में सेवा करते मृत शख्स की पत्नी को कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना का लाभ दें, हाईकोर्ट के आदेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Mon, 29 Sep 2025 08:20 PM IST
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सार
हाईकोर्ट ने कोविड-19 ड्यूटी के दौरान मृत सरकारी कर्मचारी की पत्नी को मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना का लाभ 90 दिनों में देने का आदेश दिया। सरकार ने कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट न होने पर आवेदन खारिज किया था, जिसे कोर्ट ने गलत मानते हुए 50 लाख मुआवजे का हकदार ठहराया।
हाईकोर्ट ने कोविड-19 ड्यूटी के दौरान मृत सरकारी कर्मचारी की पत्नी को मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना का लाभ 90 दिनों में देने का आदेश दिया। सरकार ने कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट न होने पर आवेदन खारिज किया था, जिसे कोर्ट ने गलत मानते हुए 50 लाख मुआवजे का हकदार ठहराया।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हाईकोर्ट ने कोविड-19 महामारी के दौरान मरीजों की सेवा करते हुए मृत एक सरकारी कर्मचारी की पत्नी को सहायता राशि देने का आदेश दिया है। सरकार ने मृतक की पत्नी को मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना के तहत अपात्र मानते हुए सहायता आवेदन निरस्त कर दिया था। इसके खिलाफ पत्नी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा ने एकलपीठ ने आवेदन निरस्त किए जाने के आदेश को खारिज करते हुए आवेदिका को 90 दिनों में योजना का लाभ प्रदान करने आदेश जारी किए हैं। जबलपुर निवासी अंजू मूर्ति उपाध्याय की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि उसके पति कलेक्ट्रेट कार्यालय के प्रोटोकॉल विभाग में सहायक ग्रेड-3 के पद पर स्थायी कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। कोविड-19 महामारी के दौरान उनकी ड्यूटी प्रवासी मजदूरों के लिए बसों और एंबुलेंस की व्यवस्था करने के लिए लगाई गई थी। इस दौरान उन्हें जून माह में हार्ट अटैक आया था और उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी।
ये भी पढ़ें- सौरभ शर्मा की जमानत याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा मनी लॉन्ड्रिंग के हैं पर्याप्त सबूत
याचिका में कहा गया था कि प्रदेश सरकार द्वारा कोविड-19 महामारी के दौरान समाज की सेवा करते हुए अपनी जान गंवाने वाले कोरोना योद्धा के परिवारों को मुआवजा प्रदान करने के संबंध में 17 अप्रैल 2020 को परिपत्र जारी किया गया था। परिपत्र में 23 अप्रैल को संशोधन करते हुए कहा गया था कि कर्मचारी कोविड-19 महामारी के दौरान कोविड योद्धा के रूप में कार्य कर रहा है तो उसके कोविड पीड़ित होने के संबंध में रिपोर्ट की आवश्यकता नहीं है।
ये भी पढ़ें- शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को कोर्ट का नोटिस, PM मोदी और स्वामी रामभद्राचार्य पर की थी टिप्पणी
याचिका में कहा गया था कि योजना का लाभ प्रदान करते की सिफारिश करते हुए जिला कलेक्टर ने राज्य सरकार को पत्र लिखा था। राज्य सरकार ने उसके आवेदन को इस आधार पर खारिज कर दिया कि मृत कर्मचारी का कोविड पॉजिटिव होने का कोई सर्टिफिकेट नही है। एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई के दौरान पाया कि योजना के तहत कोविड योद्धा के रूप कार्यरत कर्मचारी को कोविड पीड़ित होने के संबंध में रिपोर्ट की आवश्यकता नहीं है। सरकार के द्वारा आवेदन निरस्त किए आने का आदेश गलत है। याचिकाकर्ता को 90 दिनों में योजना का लाभ प्रदान किया जाए। बता दें, मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना के तहत कोरोना योद्धा के आश्रित को 50 लाख रुपये देने का प्रावधान है।
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याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा ने एकलपीठ ने आवेदन निरस्त किए जाने के आदेश को खारिज करते हुए आवेदिका को 90 दिनों में योजना का लाभ प्रदान करने आदेश जारी किए हैं। जबलपुर निवासी अंजू मूर्ति उपाध्याय की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि उसके पति कलेक्ट्रेट कार्यालय के प्रोटोकॉल विभाग में सहायक ग्रेड-3 के पद पर स्थायी कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। कोविड-19 महामारी के दौरान उनकी ड्यूटी प्रवासी मजदूरों के लिए बसों और एंबुलेंस की व्यवस्था करने के लिए लगाई गई थी। इस दौरान उन्हें जून माह में हार्ट अटैक आया था और उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी।
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याचिका में कहा गया था कि प्रदेश सरकार द्वारा कोविड-19 महामारी के दौरान समाज की सेवा करते हुए अपनी जान गंवाने वाले कोरोना योद्धा के परिवारों को मुआवजा प्रदान करने के संबंध में 17 अप्रैल 2020 को परिपत्र जारी किया गया था। परिपत्र में 23 अप्रैल को संशोधन करते हुए कहा गया था कि कर्मचारी कोविड-19 महामारी के दौरान कोविड योद्धा के रूप में कार्य कर रहा है तो उसके कोविड पीड़ित होने के संबंध में रिपोर्ट की आवश्यकता नहीं है।
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याचिका में कहा गया था कि योजना का लाभ प्रदान करते की सिफारिश करते हुए जिला कलेक्टर ने राज्य सरकार को पत्र लिखा था। राज्य सरकार ने उसके आवेदन को इस आधार पर खारिज कर दिया कि मृत कर्मचारी का कोविड पॉजिटिव होने का कोई सर्टिफिकेट नही है। एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई के दौरान पाया कि योजना के तहत कोविड योद्धा के रूप कार्यरत कर्मचारी को कोविड पीड़ित होने के संबंध में रिपोर्ट की आवश्यकता नहीं है। सरकार के द्वारा आवेदन निरस्त किए आने का आदेश गलत है। याचिकाकर्ता को 90 दिनों में योजना का लाभ प्रदान किया जाए। बता दें, मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना के तहत कोरोना योद्धा के आश्रित को 50 लाख रुपये देने का प्रावधान है।

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