Jabalpur News: पैर धुलवाकर उसका गंदा पानी पीने किया था मजबूर, हाईकोर्ट ने कहा- NSA के तहत करो कार्रवाई
हाईकोर्ट ने दमोह में ओबीसी युवक से मंदिर में पैर धुलवाने और गंदा पानी पिलाने की घटना पर सख्त रुख अपनाया। जस्टिस अतुल श्रीधरन और प्रदीप मित्तल की पीठ ने कहा कि जातीय पहचान का बढ़ता विवाद हिंदू समाज को विभाजित कर देगा। कोर्ट ने आरोपियों पर एनएसए के तहत कार्रवाई के आदेश दिए।
हाईकोर्ट ने दमोह में ओबीसी युवक से मंदिर में पैर धुलवाने और गंदा पानी पिलाने की घटना पर सख्त रुख अपनाया। जस्टिस अतुल श्रीधरन और प्रदीप मित्तल की पीठ ने कहा कि जातीय पहचान का बढ़ता विवाद हिंदू समाज को विभाजित कर देगा। कोर्ट ने आरोपियों पर एनएसए के तहत कार्रवाई के आदेश दिए।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दमोह जिले में मंदिर के अंदर ओबीसी वर्ग के युवक से एक व्यक्ति के पैर धुलवाने और गंदा पानी पिलाने की घटना पर संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने इस मामले में सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणी की कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र — सभी अपनी स्वतंत्र पहचान का दावा कर रहे हैं। यदि इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो डेढ़ सदी के भीतर खुद को हिंदू कहने वाले लोग आपस में लड़कर अस्तित्वहीन हो जाएंगे।
युगलपीठ ने जाति आधारित हिंसा और भेदभाव की लगातार घटनाओं पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में बार-बार हो रही जातिगत हिंसा और भेदभावपूर्ण घटनाएं स्तब्ध करने वाली हैं।
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दमोह की घटना पर कोर्ट का संज्ञान
दमोह जिले के ग्राम सतरिया में हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया और चैनलों पर प्रसारित हुआ था। इसमें ओबीसी वर्ग के युवक को मंदिर के अंदर एक व्यक्ति के पैर धोकर वह पानी पीने के लिए मजबूर किया गया था। हाईकोर्ट ने इस मामले को स्वतः संज्ञान में लेकर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई करने के आदेश दिए थे।सुनवाई के दौरान दमोह पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए। कोर्ट ने पाया कि घटना के दौरान पीड़ित युवक मंदिर में भीड़ से घिरा हुआ था और भयवश उसने यह कार्य किया।
कोर्ट ने एनएसए के तहत कार्रवाई के आदेश दिए
अदालत ने कहा कि इस घटना से समाज में आक्रोश फैल सकता है और सार्वजनिक व्यवस्था भंग होने की संभावना है। इसलिए दोषियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने दमोह पुलिस को निर्देश दिया कि एफआईआर में पहले से दर्ज धाराओं के साथ धारा 196(2), 351 और 133 को भी जोड़ा जाए। साथ ही वीडियो में दिख रहे सभी आरोपियों की पहचान सुनिश्चित की जाए, विशेष रूप से उन लोगों की, जिन्होंने पीड़ित को यह कृत्य करने के लिए मजबूर किया।
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कोर्ट ने दी चेतावनी
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि आमतौर पर अदालत एनएसए के तहत कार्रवाई के आदेश नहीं देती, क्योंकि यह कार्यपालिका का अधिकार क्षेत्र है, लेकिन इस मामले में सामाजिक सौहार्द पर खतरा स्पष्ट दिख रहा है। यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो स्थिति हिंसा में बदल सकती है और पुलिस की कार्रवाई अप्रभावी हो जाएगी।अदालत ने मामले की अगली सुनवाई बुधवार, 15 अक्टूबर को निर्धारित की है और दमोह पुलिस से प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

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