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MP News: पदोन्नति में आरक्षण की प्रक्रिया प्रारंभ करने की अनुमति देने से हाईकोर्ट का इंकार, सरकार को लगा झटका
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Thu, 16 Oct 2025 10:54 PM IST
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सार
पदोन्नति में आरक्षण मामले में हाईकोर्ट ने सरकार को झटका देते हुए प्रमोशन प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति से इंकार किया। कोर्ट ने सरकार से नए नियमों के अनुसार आंकड़े सीलबंद लिफाफे में पेश करने को कहा। याचिका पर सुनवाई 28 और 29 अक्टूबर को होगी।
प्रमोशन प्रक्रिया प्रारंभ करने की अनुमत्ति देने से हाईकोर्ट का इंकार
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विस्तार
पदोन्नति में आरक्षण के मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को झटका दिया है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से सामान्य प्रशासन विभाग का नोटिफिकेशन पेश करते हुए बताया गया कि साल 2016 तक के प्रमोशन में वर्ष 2002 के नियम प्रभावी रहेंगे। इसके बाद के प्रमोशन में वर्ष 2025 के नियम प्रभावी होंगे। इसके साथ ही सरकार ने आग्रह किया कि डीपीसी तथा प्रमोशन प्रदान करने की अनुमति प्रदान की जाए, लेकिन हाईकोर्ट ने इससे इंकार कर दिया।
दो दिन लगातार होगी सुनवाई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने अनुमति देने से इंकार करते हुए कहा कि नए नियम के अनुसार आंकड़े एकत्र करते हुए सील बंद लिफाफे में हाईकोर्ट के समक्ष पेश कर सकते हैं। युगलपीठ ने याचिका पर 28 व 29 अक्टूबर को लगातार दो दिन सुनवाई करने के आदेश जारी किए हैं।
ये भी पढ़ें- जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंचा छिंदवाड़ा के कफ सिरप कांड में गिरफ्तार डॉ. सोनी
सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं यथास्थिति के निर्देश
भोपाल निवासी डॉ. स्वाति तिवारी एवं अन्य की ओर से दायर याचिकाओं में मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 को चुनौती दी गई है। दलील दी गई कि वर्ष 2002 के नियमों को हाईकोर्ट द्वारा आरबी राय के केस में समाप्त किया जा चुका है। इसके विरुद्ध मप्र शासन ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला अभी लंबित है, इसके बावजूद मप्र शासन ने महज नाम मात्र का शाब्दिक परिवर्तन कर जस के तस नियम बना दिए। वहीं, मामले में अजाक्स संघ सहित आरक्षित वर्ग की ओर से अनेक अधिकारियों व कर्मचारियों ने इस मामले में हस्तक्षेप याचिकाएं दाखिल की हैं।
पिछली सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने सरकार से पूछा था कि जब पुरानी पॉलिसी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है और याचिका विचाराधीन है तथा सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन याचिकाएं यदि स्वीकार की जाती हैं तो नए नियम के तहत की जाने वाले पदोन्नति पर क्या प्रभाव पड़ेगा? यदि याचिकाएं निरस्त होती हैं तो नए नियम के तहत की जाने वाली पदोन्नति पर क्या प्रभाव पड़ेगा? और किस आधार पर पदोन्नति दी जाएगी?
सरकार ने अंतरिम राहत मांगी थी
याचिका की सुनवाई के दौरान गुरुवार को सरकार ने उक्त जानकारी प्रदान करते हुए प्रमोशन प्रक्रिया प्रारंभ करनी की अंतरिम राहत चाही थी। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अमोल श्रीवास्तव ने पैरवी की।
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दो दिन लगातार होगी सुनवाई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने अनुमति देने से इंकार करते हुए कहा कि नए नियम के अनुसार आंकड़े एकत्र करते हुए सील बंद लिफाफे में हाईकोर्ट के समक्ष पेश कर सकते हैं। युगलपीठ ने याचिका पर 28 व 29 अक्टूबर को लगातार दो दिन सुनवाई करने के आदेश जारी किए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं यथास्थिति के निर्देश
भोपाल निवासी डॉ. स्वाति तिवारी एवं अन्य की ओर से दायर याचिकाओं में मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 को चुनौती दी गई है। दलील दी गई कि वर्ष 2002 के नियमों को हाईकोर्ट द्वारा आरबी राय के केस में समाप्त किया जा चुका है। इसके विरुद्ध मप्र शासन ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला अभी लंबित है, इसके बावजूद मप्र शासन ने महज नाम मात्र का शाब्दिक परिवर्तन कर जस के तस नियम बना दिए। वहीं, मामले में अजाक्स संघ सहित आरक्षित वर्ग की ओर से अनेक अधिकारियों व कर्मचारियों ने इस मामले में हस्तक्षेप याचिकाएं दाखिल की हैं।
पिछली सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने सरकार से पूछा था कि जब पुरानी पॉलिसी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है और याचिका विचाराधीन है तथा सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन याचिकाएं यदि स्वीकार की जाती हैं तो नए नियम के तहत की जाने वाले पदोन्नति पर क्या प्रभाव पड़ेगा? यदि याचिकाएं निरस्त होती हैं तो नए नियम के तहत की जाने वाली पदोन्नति पर क्या प्रभाव पड़ेगा? और किस आधार पर पदोन्नति दी जाएगी?
सरकार ने अंतरिम राहत मांगी थी
याचिका की सुनवाई के दौरान गुरुवार को सरकार ने उक्त जानकारी प्रदान करते हुए प्रमोशन प्रक्रिया प्रारंभ करनी की अंतरिम राहत चाही थी। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अमोल श्रीवास्तव ने पैरवी की।

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