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MP Rajgarh LS Seat: राजगढ़ में बढ़े मतदान को दोनों दल बता रहे अपने पक्ष में, परिणाम तय करेगा नेताओं का भविष्य
Mon, 03 Jun 2024 07:51 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, राजगढ़
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, राजगढ़
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 03 Jun 2024 07:51 PM IST
सार
राजगढ़ दिग्विजय सिंह का गढ़ माना जाता है, क्योंकि बताया जाता है कि राजगढ़ का नाम केंद्रीय स्तर तक पहुंचाने में दिग्विजय सिंह का अहम योगदान है। भाजपा इसे नकारते हुए दिग्विजय सिंह द्वारा बीमारू राज्य बनाने की बात कहती हुई नज़र आती है।
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राजगढ़ में दिग्विजय सिंह दे रहे नागर को चुनौती।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से सबसे चर्चित सीट राजगढ़ लोकसभा कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को चुनावी मैदान में उतारने के पश्चात से प्रदेश सहित देश में भी चर्चित हो गई। इसे दिग्विजय सिंह की पदयात्रा और मतपत्र से चुनाव लड़ने जैसी अटकलों ने और भी चर्चित बना दिया। सिर्फ इतना ही नहीं अकेले स्टार प्रचारक की भूमिका निभाने वाले दिग्विजय सिंह जहां गांव-गांव में नुक्कड़ सभाएं करते रहे, वहीं भाजपा का केंद्र और प्रदेश का नेतृत्व संभालने वाले दिग्गज नेता भाजपा प्रत्याशी रोडमल नागर के समर्थन में लगातार बड़ी सभाएं आयोजित करते हुए दिग्विजय सिंह को घेरते हुए नज़र आए। तीसरे चरण में राजगढ़ लोकसभा का मतदान संपन्न हुआ और मतदान प्रतिशत भी बढ़ा, लेकिन किसके पाले में गेंद रहेगी ये 4 जून को तय हो जाएगा।
मध्यप्रदेश की राजगढ़ लोकसभा सीट से लगभग 33 वर्ष के बाद अपना अंतिम चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरे दिग्विजय सिंह के लिए ये चुनावी लड़ाई उतनी आसान नहीं है जितनी नजर आ रही है। पिछले दस वर्षों से राजगढ़ सांसद की भूमिका निभाने वाले सांसद रोडमल नागर भले ही क्षेत्र के विकास के मुद्दों पर काम करने में असफल रहे हों, लेकिन उन्हें पिछले दो चुनावों में मोदी इंपैक्ट का भरपूर फायदा मिला है। ऐसे में ये भी माना जा रहा है कि तीसरी मर्तबा भी उन्हें इसका फायदा मिल जाए और उनके चुनाव प्रचार में केंद्र और राज्य स्तर के भाजपा नेताओं में सभा को संबोधित किया और पीएम मोदी को तीसरी मर्तबा पीएम बनाने की मांग की गई।
दूसरी ओर से कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह ने इस चुनाव को जमीनी स्तर से लड़ा है न कोई बढ़ी सभाएं कीं और न ही कोई बढ़ी रैली आयोजित की। चुनाव प्रचार के अंतिम दो दिनों में केवल दो स्टार प्रचारक राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र में आए जिसमें राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट का नाम शामिल है। दिग्विजय सिंह ने भले ही अपने मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान राजगढ़ क्षेत्र के लिए कुछ खास न किया हो, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में उनकी अच्छी खासी पैठ मानी जा रही है और यह भी कहा जा रहा है कि दिग्विजय सिंह को चुनावी मैदान में देखकर वे पुराने लोग भी इस बार भी मतदान करने के लिए अपने घरों से निकले जो मतदान में रुचि नहीं दिखाते। ऐसे में राजगढ़ में 4 जून को घोषित होने वाले परिणाम वाकई चौकाने वाले होंगे, जो तय करेंगे कि राजगढ़ में लोगों ने वाकई काम को देखा या पीएम मोदी के नाम पर मतदान किया।
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राजगढ़ लोकसभा में पूर्व में हुए मतदान प्रतिशत की बात करें तो वर्ष 2014 में मतदान प्रतिशत 65.71 प्रतिशत, 2019 में 74.39 प्रतिशत और 2024 में 75.39 प्रतिशत मतदान हुआ। राजगढ़ लोकसभा सीट पर पिछले दस वर्षों से भाजपा का कब्जा है और भाजपा के रोडमल नागर सांसद हैं। उन्होंने वर्ष 2014 में कांग्रेस के नारायण सिंह आमलाबे और वर्ष 2019 में कांग्रेस की तत्कालीन लोकसभा प्रत्याशी मोना सुस्तानी को हराया था और वर्ष 2024 में भाजपा के रोडमल नागर का सीधा मुकाबला कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह से हुआ है। राजगढ़ दिग्विजय सिंह का गढ़ माना जाता है, क्योंकि बताया जाता है कि राजगढ़ का नाम केंद्रीय स्तर तक पहुंचाने में दिग्विजय सिंह का अहम योगदान है। भाजपा इसे नकारते हुए दिग्विजय सिंह द्वारा बीमारू राज्य बनाने की बात कहती हुई नज़र आती है।
राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र स्थानीय मुद्दों की यदि हम बात करें तो राजगढ़ जिला नीति आयोग की पिछड़े जिलों की सूची में शामिल है। जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और रोजगार के लिए पलायन जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं। इसके लिए प्रदेश में लगभग 20 वर्षों से विराजमान भाजपा सरकार ने भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए, न ही स्थानीय जनप्रतिनिधि ने। हालांकि जिले में अब मेडिकल कॉलेज और व्यवसायिक कॉलेज सहित जिला अस्पताल में 200 बिस्तर की क्षमता वाली बिल्डिंग का भी निर्माण चल रहा है। इसे कांग्रेस अपने 15 माह की सरकार में सेंक्शन किए गए कार्य की उपलब्धि बताती है। वहीं सत्तापक्ष भाजपा इसे अपने विकास के एजेंडा में शामिल होना बता रहा है।
यदि राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र में मतगणना की तैयारियों की बात करें तो रिटर्निंग अधिकारी कार्यालय के अनुसार राजगढ़ संसदीय क्षेत्र के विधानसभा क्षेत्र राजगढ़, ब्यावरा, नरसिंहगढ़, खिलचीपुर के मतों की गिनती के लिए 16-16 गणना टेबल लगाई जाएंगी व विधानसभा क्षेत्र 164-सारंगपुर (अजा) के लिए 14 गणना टेबल लगाई जाएंगी। ईटीपीबीएस स्कैनिंग 4 टेबलों पर एवं डाक मत पत्रों की गिनती 8 टेबलों पर की जाएगी। राजगढ़ संसदीय क्षेत्र में शामिल गुना जिले के विधानसभा क्षेत्र चांचौड़ा व राघौगढ़ के मतों की गिनती गुना में होगी व आगर-मालवा ज़िले की विधानसभा क्षेत्र सुसनेर के मतों की गिनती आगर-मालवा में होगी। गुना जिले की दोनों विधानसभा क्षेत्रों के मतों की गिनती के लिए 20-20 टेबल लगाई जाएंगी। आगर-मालवा ज़िले की सुसनेर विधानसभा क्षेत्र के लिए 14 टेबल लगाई जाएंगी। सम्पूर्ण राजगढ़ संसदीय क्षेत्र के ईटीपीबीएस की स्कैनिंग 4 टेबलों पर एवं डाकमत पत्र की गणना 8 टेबलों पर सम्पादित की जाएगी। राजगढ़ जिले के विधानसभा क्षेत्र नरसिंहगढ़, ब्यावरा, राजगढ़, सारंगपुर में 18-18 चक्र में मतगणना पूरी होगी। विधानसभा क्षेत्र खिलचीपुर में 19 चक्रों में गिनती पूर्ण होगी। राजगढ़ संसदीय क्षेत्र में शामिल गुना जिले के विधानसभा क्षेत्र चाचौड़ा में 15 गणना चक्र व राघौगढ़ में 14 गणना चक्र होंगे। इसी प्रकार आगर-मालवा ज़िले की विधानसभा क्षेत्र सुसनेर में 22 चक्र में गिनती पूर्ण होगी।
(राजगढ़ से अब्दुल वसीम अंसारी की रिपोर्ट)
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मध्यप्रदेश की राजगढ़ लोकसभा सीट से लगभग 33 वर्ष के बाद अपना अंतिम चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरे दिग्विजय सिंह के लिए ये चुनावी लड़ाई उतनी आसान नहीं है जितनी नजर आ रही है। पिछले दस वर्षों से राजगढ़ सांसद की भूमिका निभाने वाले सांसद रोडमल नागर भले ही क्षेत्र के विकास के मुद्दों पर काम करने में असफल रहे हों, लेकिन उन्हें पिछले दो चुनावों में मोदी इंपैक्ट का भरपूर फायदा मिला है। ऐसे में ये भी माना जा रहा है कि तीसरी मर्तबा भी उन्हें इसका फायदा मिल जाए और उनके चुनाव प्रचार में केंद्र और राज्य स्तर के भाजपा नेताओं में सभा को संबोधित किया और पीएम मोदी को तीसरी मर्तबा पीएम बनाने की मांग की गई।
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दूसरी ओर से कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह ने इस चुनाव को जमीनी स्तर से लड़ा है न कोई बढ़ी सभाएं कीं और न ही कोई बढ़ी रैली आयोजित की। चुनाव प्रचार के अंतिम दो दिनों में केवल दो स्टार प्रचारक राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र में आए जिसमें राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट का नाम शामिल है। दिग्विजय सिंह ने भले ही अपने मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान राजगढ़ क्षेत्र के लिए कुछ खास न किया हो, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में उनकी अच्छी खासी पैठ मानी जा रही है और यह भी कहा जा रहा है कि दिग्विजय सिंह को चुनावी मैदान में देखकर वे पुराने लोग भी इस बार भी मतदान करने के लिए अपने घरों से निकले जो मतदान में रुचि नहीं दिखाते। ऐसे में राजगढ़ में 4 जून को घोषित होने वाले परिणाम वाकई चौकाने वाले होंगे, जो तय करेंगे कि राजगढ़ में लोगों ने वाकई काम को देखा या पीएम मोदी के नाम पर मतदान किया।
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राजगढ़ लोकसभा में पूर्व में हुए मतदान प्रतिशत की बात करें तो वर्ष 2014 में मतदान प्रतिशत 65.71 प्रतिशत, 2019 में 74.39 प्रतिशत और 2024 में 75.39 प्रतिशत मतदान हुआ। राजगढ़ लोकसभा सीट पर पिछले दस वर्षों से भाजपा का कब्जा है और भाजपा के रोडमल नागर सांसद हैं। उन्होंने वर्ष 2014 में कांग्रेस के नारायण सिंह आमलाबे और वर्ष 2019 में कांग्रेस की तत्कालीन लोकसभा प्रत्याशी मोना सुस्तानी को हराया था और वर्ष 2024 में भाजपा के रोडमल नागर का सीधा मुकाबला कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह से हुआ है। राजगढ़ दिग्विजय सिंह का गढ़ माना जाता है, क्योंकि बताया जाता है कि राजगढ़ का नाम केंद्रीय स्तर तक पहुंचाने में दिग्विजय सिंह का अहम योगदान है। भाजपा इसे नकारते हुए दिग्विजय सिंह द्वारा बीमारू राज्य बनाने की बात कहती हुई नज़र आती है।
राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र स्थानीय मुद्दों की यदि हम बात करें तो राजगढ़ जिला नीति आयोग की पिछड़े जिलों की सूची में शामिल है। जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और रोजगार के लिए पलायन जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं। इसके लिए प्रदेश में लगभग 20 वर्षों से विराजमान भाजपा सरकार ने भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए, न ही स्थानीय जनप्रतिनिधि ने। हालांकि जिले में अब मेडिकल कॉलेज और व्यवसायिक कॉलेज सहित जिला अस्पताल में 200 बिस्तर की क्षमता वाली बिल्डिंग का भी निर्माण चल रहा है। इसे कांग्रेस अपने 15 माह की सरकार में सेंक्शन किए गए कार्य की उपलब्धि बताती है। वहीं सत्तापक्ष भाजपा इसे अपने विकास के एजेंडा में शामिल होना बता रहा है।
यदि राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र में मतगणना की तैयारियों की बात करें तो रिटर्निंग अधिकारी कार्यालय के अनुसार राजगढ़ संसदीय क्षेत्र के विधानसभा क्षेत्र राजगढ़, ब्यावरा, नरसिंहगढ़, खिलचीपुर के मतों की गिनती के लिए 16-16 गणना टेबल लगाई जाएंगी व विधानसभा क्षेत्र 164-सारंगपुर (अजा) के लिए 14 गणना टेबल लगाई जाएंगी। ईटीपीबीएस स्कैनिंग 4 टेबलों पर एवं डाक मत पत्रों की गिनती 8 टेबलों पर की जाएगी। राजगढ़ संसदीय क्षेत्र में शामिल गुना जिले के विधानसभा क्षेत्र चांचौड़ा व राघौगढ़ के मतों की गिनती गुना में होगी व आगर-मालवा ज़िले की विधानसभा क्षेत्र सुसनेर के मतों की गिनती आगर-मालवा में होगी। गुना जिले की दोनों विधानसभा क्षेत्रों के मतों की गिनती के लिए 20-20 टेबल लगाई जाएंगी। आगर-मालवा ज़िले की सुसनेर विधानसभा क्षेत्र के लिए 14 टेबल लगाई जाएंगी। सम्पूर्ण राजगढ़ संसदीय क्षेत्र के ईटीपीबीएस की स्कैनिंग 4 टेबलों पर एवं डाकमत पत्र की गणना 8 टेबलों पर सम्पादित की जाएगी। राजगढ़ जिले के विधानसभा क्षेत्र नरसिंहगढ़, ब्यावरा, राजगढ़, सारंगपुर में 18-18 चक्र में मतगणना पूरी होगी। विधानसभा क्षेत्र खिलचीपुर में 19 चक्रों में गिनती पूर्ण होगी। राजगढ़ संसदीय क्षेत्र में शामिल गुना जिले के विधानसभा क्षेत्र चाचौड़ा में 15 गणना चक्र व राघौगढ़ में 14 गणना चक्र होंगे। इसी प्रकार आगर-मालवा ज़िले की विधानसभा क्षेत्र सुसनेर में 22 चक्र में गिनती पूर्ण होगी।
(राजगढ़ से अब्दुल वसीम अंसारी की रिपोर्ट)
