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Rajgarh News: इलाज की उम्मीद में निकला परिवार, चार अर्थियों में लौटा, सड़क हादसे ने उजाड़ दिया पूरा घर
Wed, 08 Jul 2026 09:12 AM IST
राजगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगढ़
Published by: राजगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jul 2026 09:12 AM IST
सार
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में हुए भीषण सड़क हादसे ने राजगढ़ जिले के भियापुरा गांव को गहरे शोक में डुबो दिया। मानसिक रूप से बीमार बेटे के इलाज के लिए निकला परिवार ट्रक और बोलेरो की आमने-सामने की टक्कर का शिकार हो गया।
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(प्रतीकात्मक फोटो)
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में हुए भीषण सड़क हादसे ने राजगढ़ जिले के भियापुरा गांव की खुशियां छीन लीं। मानसिक रूप से बीमार बेटे के इलाज के लिए घर से निकला परिवार कभी वापस नहीं लौटा। ट्रक और बोलेरो की आमने-सामने की टक्कर में पिता, बेटा और दो चचेरे भाइयों समेत पांच लोगों की मौत हो गई। मंगलवार को जब एक साथ चार शव गांव पहुंचे तो पूरा गांव गम में डूब गया। एक ही चिता पर चार परिजनों का अंतिम संस्कार हुआ और पूरे गांव में मातम छा गया।
बीमार बेटे के इलाज के लिए निकला था परिवार
भियापुरा निवासी 25 वर्षीय बने सिंह तंवर पिछले कुछ समय से मानसिक बीमारी से जूझ रहे थे। बेहतर इलाज की उम्मीद में परिवार उन्हें देवास जिले के कांटाफोड़ गांव ले जा रहा था। उनके साथ पिता देवीराम तंवर (60), चचेरे भाई भगवान सिंह तंवर (45) और गुलाब सिंह तंवर (32) भी थे। सभी रिश्तेदार अमर सिंह तंवर की बोलेरो में सवार होकर सिमलादे गांव से रवाना हुए थे। परिवार को उम्मीद थी कि इस बार इलाज से बने सिंह की तबीयत में सुधार होगा।
आष्टा-शुजालपुर मार्ग पर हुआ भीषण हादसा
सीहोर जिले के आष्टा-शुजालपुर मार्ग पर मैना के पास गोदी जोड़ के समीप सामने से आ रहे एक ट्रक ने बोलेरो को सीधी टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बोलेरो के परखच्चे उड़ गए और वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
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पांच लोगों की मौके पर मौत, तीन गंभीर घायल
हादसे में बोलेरो चालक सहित पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में देवीराम तंवर, उनके बेटे बने सिंह तंवर, भगवान सिंह तंवर, गुलाब सिंह तंवर और राजाराम (45) निवासी बिहरपुर शामिल हैं। वहीं इंदर सिंह (55), राधेश्याम (38) और हेमराज (25) गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।
एक साथ उठीं चार अर्थियां, एक ही चिता पर हुआ अंतिम संस्कार
मंगलवार को जब चारों शव भियापुरा गांव पहुंचे तो पूरा गांव शोक में डूब गया। पिता, बेटा और दो चचेरे भाइयों की अर्थियां एक साथ उठीं और गांव की गलियों से होकर श्मशान घाट पहुंचीं। चारों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। अंतिम विदाई के दौरान गांव का शायद ही कोई व्यक्ति ऐसा रहा जिसकी आंखें नम न हुई हों। महिलाओं की चीख-पुकार और बच्चों के बिलखने से माहौल बेहद भावुक हो गया।
'बेटे के इलाज को निकले थे, घर उजड़ गया'
देवीराम की पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्होंने बिलखते हुए कहा कि परिवार बेटे के इलाज की उम्मीद लेकर घर से निकला था, लेकिन लौटे तो सब कुछ खत्म हो चुका था। उन्होंने कहा कि घर के कमाने वाले चले गए, अब बच्चों का सहारा कौन बनेगा।
पूरा गांव रहा शोक में, नहीं जला किसी घर का चूल्हा
हादसे के बाद भियापुरा गांव में गहरा शोक छा गया। मंगलवार को गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला और लोगों ने अन्न ग्रहण तक नहीं किया। आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। ग्रामीणों ने बताया कि देवीराम का परिवार मेहनतकश था। अब घर में केवल महिलाएं और छोटे बच्चे रह गए हैं, जबकि परिवार का कोई कमाने वाला नहीं बचा।
मदद का भरोसा, ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज
गांव के सरपंच और सामाजिक संगठनों ने पीड़ित परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है। उधर, पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। इलाज की उम्मीद लेकर निकला यह परिवार कभी घर नहीं लौट सका। मानसिक बीमारी से जूझ रहे बेटे को स्वस्थ करने का सपना लेकर निकले पिता को शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। आज भी भियापुरा गांव इस दर्दनाक हादसे के गम से उबर नहीं पाया है।
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बीमार बेटे के इलाज के लिए निकला था परिवार
भियापुरा निवासी 25 वर्षीय बने सिंह तंवर पिछले कुछ समय से मानसिक बीमारी से जूझ रहे थे। बेहतर इलाज की उम्मीद में परिवार उन्हें देवास जिले के कांटाफोड़ गांव ले जा रहा था। उनके साथ पिता देवीराम तंवर (60), चचेरे भाई भगवान सिंह तंवर (45) और गुलाब सिंह तंवर (32) भी थे। सभी रिश्तेदार अमर सिंह तंवर की बोलेरो में सवार होकर सिमलादे गांव से रवाना हुए थे। परिवार को उम्मीद थी कि इस बार इलाज से बने सिंह की तबीयत में सुधार होगा।
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आष्टा-शुजालपुर मार्ग पर हुआ भीषण हादसा
सीहोर जिले के आष्टा-शुजालपुर मार्ग पर मैना के पास गोदी जोड़ के समीप सामने से आ रहे एक ट्रक ने बोलेरो को सीधी टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बोलेरो के परखच्चे उड़ गए और वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
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पांच लोगों की मौके पर मौत, तीन गंभीर घायल
हादसे में बोलेरो चालक सहित पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में देवीराम तंवर, उनके बेटे बने सिंह तंवर, भगवान सिंह तंवर, गुलाब सिंह तंवर और राजाराम (45) निवासी बिहरपुर शामिल हैं। वहीं इंदर सिंह (55), राधेश्याम (38) और हेमराज (25) गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।
एक साथ उठीं चार अर्थियां, एक ही चिता पर हुआ अंतिम संस्कार
मंगलवार को जब चारों शव भियापुरा गांव पहुंचे तो पूरा गांव शोक में डूब गया। पिता, बेटा और दो चचेरे भाइयों की अर्थियां एक साथ उठीं और गांव की गलियों से होकर श्मशान घाट पहुंचीं। चारों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। अंतिम विदाई के दौरान गांव का शायद ही कोई व्यक्ति ऐसा रहा जिसकी आंखें नम न हुई हों। महिलाओं की चीख-पुकार और बच्चों के बिलखने से माहौल बेहद भावुक हो गया।
'बेटे के इलाज को निकले थे, घर उजड़ गया'
देवीराम की पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्होंने बिलखते हुए कहा कि परिवार बेटे के इलाज की उम्मीद लेकर घर से निकला था, लेकिन लौटे तो सब कुछ खत्म हो चुका था। उन्होंने कहा कि घर के कमाने वाले चले गए, अब बच्चों का सहारा कौन बनेगा।
पूरा गांव रहा शोक में, नहीं जला किसी घर का चूल्हा
हादसे के बाद भियापुरा गांव में गहरा शोक छा गया। मंगलवार को गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला और लोगों ने अन्न ग्रहण तक नहीं किया। आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। ग्रामीणों ने बताया कि देवीराम का परिवार मेहनतकश था। अब घर में केवल महिलाएं और छोटे बच्चे रह गए हैं, जबकि परिवार का कोई कमाने वाला नहीं बचा।
मदद का भरोसा, ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज
गांव के सरपंच और सामाजिक संगठनों ने पीड़ित परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है। उधर, पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। इलाज की उम्मीद लेकर निकला यह परिवार कभी घर नहीं लौट सका। मानसिक बीमारी से जूझ रहे बेटे को स्वस्थ करने का सपना लेकर निकले पिता को शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। आज भी भियापुरा गांव इस दर्दनाक हादसे के गम से उबर नहीं पाया है।
