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MP News: पद्मश्री हिंदी साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत का निधन, 90 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
Fri, 31 Jul 2026 05:39 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Fri, 31 Jul 2026 05:39 PM IST
सार
प्रख्यात हिंदी साहित्यकार और पद्मश्री सम्मानित कैलाश चंद्र पंत का शुक्रवार को भोपाल में 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित साहित्य जगत ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
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कैलाश चंद्र पंत (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार, पद्मश्री सम्मानित और हिंदी भवन भोपाल के पूर्व निदेशक कैलाश चंद्र पंत का शुक्रवार को हृदय गति रुकने (कार्डियक अरेस्ट) से निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। परिजनों के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार शनिवार को भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर किया जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि कैलाश चंद्र पंत लंबे समय तक मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति से जुड़े रहे। हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
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इंदौर के पास महू में हुआ जन्म
कैलाश चंद्र पंत का जन्म 26 अप्रैल 1936 को इंदौर के पास महू में हुआ था। उनका पैतृक गांव उत्तराखंड के बागेश्वर जिले का खंतोली गांव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत इंदौर स्थित यूनियन थियोलॉजिकल सेमिनरी में व्याख्याता के रूप में की। बाद में वे भोपाल के पंचायत राज प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य भी रहे।
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उन्होंने शिक्षा प्रदीप, जनधर्म और दुर्गामी आह्वान जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं का संपादन भी किया। इसके अलावा वे हिंदी भवन भोपाल के निदेशक रहे और भारत कृषक समाज, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति तथा मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति जैसी कई साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
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इसी वर्ष पद्मश्री से हुए सम्मानित
उनकी प्रमुख कृतियों में 'कौन किसका आदमी', 'धुंध के आर-पार', 'शब्द का विचार-पथ' और 'शैलेश मटियानी : सृजन यात्रा' शामिल हैं। हिंदी साहित्य में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें इसी वर्ष पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें साहित्य भूषण सम्मान, निराला साहित्य सम्मान, साहित्य शिरोमणि सम्मान और संस्कृति गौरव सम्मान जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले।
ये भ पढ़ें- राज और नीति: किसान आंदोलन में संकट मोचक बने मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव मंडलोई
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इंदौर के पास महू में हुआ जन्म
कैलाश चंद्र पंत का जन्म 26 अप्रैल 1936 को इंदौर के पास महू में हुआ था। उनका पैतृक गांव उत्तराखंड के बागेश्वर जिले का खंतोली गांव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत इंदौर स्थित यूनियन थियोलॉजिकल सेमिनरी में व्याख्याता के रूप में की। बाद में वे भोपाल के पंचायत राज प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य भी रहे।
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उन्होंने शिक्षा प्रदीप, जनधर्म और दुर्गामी आह्वान जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं का संपादन भी किया। इसके अलावा वे हिंदी भवन भोपाल के निदेशक रहे और भारत कृषक समाज, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति तथा मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति जैसी कई साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
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इसी वर्ष पद्मश्री से हुए सम्मानित
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