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Bhojshala: भोजशाला के पास हुई जुमे की नमाज, SC के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने खसरा नंबर 612 पर उपलब्ध कराई जगह
Fri, 31 Jul 2026 04:14 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 31 Jul 2026 04:14 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद धार में भोजशाला परिसर के समीप पहली बार मुस्लिम समुदाय ने जुमे की नमाज अदा की। प्रशासन ने सर्वे नंबर 612 पर आवश्यक व्यवस्थाएं कीं। हाई कोर्ट द्वारा भोजशाला को सरस्वती मंदिर घोषित किए जाने के बाद यह पहली नमाज रही। मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
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धार में जुमे की नमाज हुई।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश के धार स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला परिसर के समीप शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय ने पहली बार जुमे की नमाज अदा की। यह नमाजक सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक दिन पहले दी गई अनुमति के बाद आयोजित की गई।
जिला प्रशासन और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों की बैठक में सर्वे नंबर 612 स्थित स्थान को नमाज के लिए चयनित किया गया। प्रशासन ने नमाज के लिए आवश्यक सभी व्यवस्थाएं और सुरक्षा इंतजाम किए। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा मई में भोजशाला-कमाल मौला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किए जाने और परिसर में शुक्रवार की नमाज की अनुमति देने वाले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पुराने आदेश को रद्द किए जाने के बाद यह पहली जुमे की नमाज थी।
ये भी पढ़ें- भोजशाला विवाद धार: नमाज स्थल बदलने पर नया विवाद, रहवासियों ने पेश किए पुश्तैनी हक के दावे; अब आगे क्या?
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इससे पहले गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय को भोजशाला परिसर से सटी दरगाह परिसर में प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज अदा करने की अनुमति दी थी। साथ ही राज्य सरकार को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा ने बताया कि अदालत के निर्देशों के अनुरूप प्रशासन ने नमाज के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए हैं। स्थानीय रहवासियों के तीखे विरोध के चलते क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया। हालांकि, प्रशासनिक अमले और पुलिस की मुस्तैदी से स्थिति पर काबू पा लिया गया।
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जिला प्रशासन और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों की बैठक में सर्वे नंबर 612 स्थित स्थान को नमाज के लिए चयनित किया गया। प्रशासन ने नमाज के लिए आवश्यक सभी व्यवस्थाएं और सुरक्षा इंतजाम किए। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा मई में भोजशाला-कमाल मौला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किए जाने और परिसर में शुक्रवार की नमाज की अनुमति देने वाले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पुराने आदेश को रद्द किए जाने के बाद यह पहली जुमे की नमाज थी।
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इससे पहले गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय को भोजशाला परिसर से सटी दरगाह परिसर में प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज अदा करने की अनुमति दी थी। साथ ही राज्य सरकार को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा ने बताया कि अदालत के निर्देशों के अनुरूप प्रशासन ने नमाज के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए हैं। स्थानीय रहवासियों के तीखे विरोध के चलते क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया। हालांकि, प्रशासनिक अमले और पुलिस की मुस्तैदी से स्थिति पर काबू पा लिया गया।
धार में स्थित भोजशाला
- फोटो : Amar Ujala Graphics
बारिश के बीच प्रशासन ने की व्यवस्था
शुक्रवार को बारिश के कारण जमीन गीली हो गई थी, जिसके चलते प्रशासनिक अमले ने नमाजियों के लिए तिरपाल की व्यवस्था की। सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए पूरे इलाके की बैरिकेडिंग कर दी गई थी और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
विरोध को किया शांत
नमाज के आयोजन की जानकारी मिलते ही स्थानीय रहवासी मौके पर एकत्र हो गए और उन्होंने नमाज का पुरजोर विरोध किया। कहना था कि जिस जमीन पर नमाज की अनुमति दी गई है, वह उनकी निजी भूमि है। वे इस जमीन पर लंबे समय से खेती करते आ रहे हैं।
शुक्रवार को बारिश के कारण जमीन गीली हो गई थी, जिसके चलते प्रशासनिक अमले ने नमाजियों के लिए तिरपाल की व्यवस्था की। सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए पूरे इलाके की बैरिकेडिंग कर दी गई थी और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
विरोध को किया शांत
नमाज के आयोजन की जानकारी मिलते ही स्थानीय रहवासी मौके पर एकत्र हो गए और उन्होंने नमाज का पुरजोर विरोध किया। कहना था कि जिस जमीन पर नमाज की अनुमति दी गई है, वह उनकी निजी भूमि है। वे इस जमीन पर लंबे समय से खेती करते आ रहे हैं।
एसडीएम के आश्वासन के बाद शांत हुआ मामला
घटना की सूचना मिलते ही उपखंड अधिकारी (SDM) राजकुमार हलदर अपनी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति को संभाला। एसडीएम ने विरोध कर रहे ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी आपत्तियों की पूरी और निष्पक्ष सुनवाई की जाएगी। प्रशासन के इस लिखित व मौखिक आश्वासन के बाद ही प्रदर्शनकारी शांत हुए।
भोजशाला को माना मंदिर
उल्लेखनीय है कि 15 मई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने 242 पृष्ठों के फैसले में वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को मां सरस्वती के मंदिर के रूप में माना था। साथ ही एएसआई के वर्ष 2003 के उस आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को परिसर में शुक्रवार की नमाज की अनुमति दी गई थी। हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि मुस्लिम पक्ष मस्जिद निर्माण के लिए अलग भूमि उपलब्ध कराने हेतु राज्य सरकार से संपर्क कर सकता है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए विवादित परिसर से सटी दरगाह भूमि पर शुक्रवार की नमाज की अनुमति दी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार और मुस्लिम पक्ष आपसी सहमति से भविष्य में नमाज के लिए किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर भी विचार कर सकते हैं।
घटना की सूचना मिलते ही उपखंड अधिकारी (SDM) राजकुमार हलदर अपनी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति को संभाला। एसडीएम ने विरोध कर रहे ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी आपत्तियों की पूरी और निष्पक्ष सुनवाई की जाएगी। प्रशासन के इस लिखित व मौखिक आश्वासन के बाद ही प्रदर्शनकारी शांत हुए।
भोजशाला को माना मंदिर
उल्लेखनीय है कि 15 मई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने 242 पृष्ठों के फैसले में वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को मां सरस्वती के मंदिर के रूप में माना था। साथ ही एएसआई के वर्ष 2003 के उस आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को परिसर में शुक्रवार की नमाज की अनुमति दी गई थी। हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि मुस्लिम पक्ष मस्जिद निर्माण के लिए अलग भूमि उपलब्ध कराने हेतु राज्य सरकार से संपर्क कर सकता है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए विवादित परिसर से सटी दरगाह भूमि पर शुक्रवार की नमाज की अनुमति दी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार और मुस्लिम पक्ष आपसी सहमति से भविष्य में नमाज के लिए किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर भी विचार कर सकते हैं।
