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'खड़े हनुमान जी को नहीं हटने देंगे': मंदिर विस्थापन के खिलाफ श्रद्धालु, सुंदरकांड से गूंजा परिसर; देखें वीडियो
Wed, 09 Sep 2026 05:31 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Wed, 09 Sep 2026 05:31 PM IST
सार
Ujjain Khade Hanuman Mandir: उज्जैन के ऐतिहासिक श्री खड़े हनुमान मंदिर के संभावित विस्थापन को लेकर विवाद गहरा गया है। हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में जुटकर सुंदरकांड, हनुमान चालीसा और भजन-कीर्तन के माध्यम से विरोध जता रहे हैं। पुरातत्वविदों ने प्रतिमा को अत्यंत प्राचीन बताते हुए जल्दबाजी में विस्थापन पर नुकसान की आशंका जताई है। पढ़ें पूरी खबर...
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उज्जैन खड़े हनुमान मंदिर
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
उज्जैन के ऐतिहासिक श्री खड़े हनुमान मंदिर को हटाए जाने की प्रशासनिक योजना के बाद से श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। मंदिर विस्थापन की सूचना जैसे ही फैली, प्रतिदिन सुबह से लेकर देर शाम तक हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंच रहे हैं। क्षेत्र में तनाव और भक्ति का अनोखा माहौल बना हुआ है, जहां पूरा परिसर ‘जय श्री राम’ और ‘जय हनुमान’ के जयकारों से गूंज रहा है।
मंदिर में सुंदरकांड और भजन-कीर्तन का दौर
प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध और धार्मिक आस्था के समर्थन में श्रद्धालु मंदिर परिसर में डटे हुए हैं। रोज सुबह से ही सुंदरकांड का पाठ, हनुमान चालीसा और ढोल-मंजीरों के साथ भजन-कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। भक्तों का साफ शब्दों में कहना है कि चाहे जो हो जाए, वे अति प्राचीन खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को इस स्थान से नहीं हटने देंगे।
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30 अगस्त को चक्काजाम, चार सितंबर को चली जेसीबी
विवाद की शुरुआत 30 अगस्त को हुई थी, जब प्रतिमा हटाए जाने के विरोध में विभिन्न हिंदूवादी संगठनों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार चक्काजाम किया था। इसके बावजूद, 4 सितंबर को नगर निगम की टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जेसीबी की मदद से मंदिर का शिखर और बाहरी दीवारें ध्वस्त कर दीं।
पुरातत्वविदों बोले- जल्दबाजी में खंडित हो सकती है प्रतिमा
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इंदौर से पुरातत्वविदों की विशेष टीम बुलाई गई थी। टीम ने प्राथमिक परीक्षण के बाद रिपोर्ट दी कि यह प्रतिमा अत्यंत प्राचीन और दुर्लभ है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि विस्थापन में जल्दबाजी की गई, तो प्रतिमा के खंडित होने का गंभीर खतरा है। इसके बाद प्रतिमा की गहराई जांचने के लिए छेनी-हथौड़ी से आसपास सतर्कतापूर्वक खुदाई की गई।
ये भी पढ़ें- खड़े हनुमान मंदिर पर बड़ा संकट?: गुजरात-महाराष्ट्र से उमड़ा भक्तों का सैलाब, पुजारी क्या बोले; देखें वीडियो
नगर निगम को स्क्रीनिंग रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी विशेषज्ञों की अंतिम ‘स्क्रीनिंग रिपोर्ट’ आने का इंतजार कर रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि प्रतिमा को पूरी सुरक्षा के साथ दूसरे स्थान पर स्थापित करने की योजना है, लेकिन स्थानीय नागरिक और श्रद्धालु विस्थापन की सुरक्षित प्रक्रिया और प्रशासन की मंशा पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर बवाल, देशभर में चर्चा
इस बीच, सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से बनीं कई रील्स और फोटो-वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वायरल रील्स में यह दर्शाया जा रहा है कि श्री खड़े हनुमान जी स्वयं उस स्थान से विस्थापित नहीं होना चाहते हैं। AI कंटेंट के कारण यह स्थानीय विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। मंदिर परिसर में सुरक्षा बल तैनात हैं और प्रशासन विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आगे का कदम उठाने की बात कह रहा है, जबकि भक्तों का विरोध प्रदर्शन निरंतर जारी है।
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मंदिर में सुंदरकांड और भजन-कीर्तन का दौर
प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध और धार्मिक आस्था के समर्थन में श्रद्धालु मंदिर परिसर में डटे हुए हैं। रोज सुबह से ही सुंदरकांड का पाठ, हनुमान चालीसा और ढोल-मंजीरों के साथ भजन-कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। भक्तों का साफ शब्दों में कहना है कि चाहे जो हो जाए, वे अति प्राचीन खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को इस स्थान से नहीं हटने देंगे।
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30 अगस्त को चक्काजाम, चार सितंबर को चली जेसीबी
विवाद की शुरुआत 30 अगस्त को हुई थी, जब प्रतिमा हटाए जाने के विरोध में विभिन्न हिंदूवादी संगठनों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार चक्काजाम किया था। इसके बावजूद, 4 सितंबर को नगर निगम की टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जेसीबी की मदद से मंदिर का शिखर और बाहरी दीवारें ध्वस्त कर दीं।
पुरातत्वविदों बोले- जल्दबाजी में खंडित हो सकती है प्रतिमा
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इंदौर से पुरातत्वविदों की विशेष टीम बुलाई गई थी। टीम ने प्राथमिक परीक्षण के बाद रिपोर्ट दी कि यह प्रतिमा अत्यंत प्राचीन और दुर्लभ है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि विस्थापन में जल्दबाजी की गई, तो प्रतिमा के खंडित होने का गंभीर खतरा है। इसके बाद प्रतिमा की गहराई जांचने के लिए छेनी-हथौड़ी से आसपास सतर्कतापूर्वक खुदाई की गई।
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नगर निगम को स्क्रीनिंग रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी विशेषज्ञों की अंतिम ‘स्क्रीनिंग रिपोर्ट’ आने का इंतजार कर रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि प्रतिमा को पूरी सुरक्षा के साथ दूसरे स्थान पर स्थापित करने की योजना है, लेकिन स्थानीय नागरिक और श्रद्धालु विस्थापन की सुरक्षित प्रक्रिया और प्रशासन की मंशा पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर बवाल, देशभर में चर्चा
इस बीच, सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से बनीं कई रील्स और फोटो-वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वायरल रील्स में यह दर्शाया जा रहा है कि श्री खड़े हनुमान जी स्वयं उस स्थान से विस्थापित नहीं होना चाहते हैं। AI कंटेंट के कारण यह स्थानीय विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। मंदिर परिसर में सुरक्षा बल तैनात हैं और प्रशासन विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आगे का कदम उठाने की बात कह रहा है, जबकि भक्तों का विरोध प्रदर्शन निरंतर जारी है।
