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Ujjain: बच्चों में संस्कार के लिए तल्लेरा दंपती कर रहे वर्षी तप आराधना, वजन रह गया 74 किलो; पर नहीं डिगी आस्था

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Wed, 08 Apr 2026 06:33 PM IST
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सार

Ujjain News: उज्जैन के तल्लेरा दंपती ने बच्चों को संस्कार सिखाने के लिए वर्षी तप आराधना की। एक वर्ष तक संयमित जीवन जीते हुए उन्होंने यह कठिन व्रत निभाया, जिसका पारणा 20 अप्रैल 2026 को पालीताना में होगा।

Ujjain News: Tallera Couple's 'Varshi Tap' Sadhana Spiritual Legacy for Children; Unwavering Faith
तल्लेरा दंपती कर रहे वर्षी तप आराधना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

उज्जैन के अलखधाम नगर में रहने वाले तल्लेरा दंपती ने अपने बच्चों को संस्कारवान बनाने की प्रेरणा देने के लिए एक कठिन धार्मिक मार्ग चुना है। जैन समाज में अत्यंत कठिन माने जाने वाले वर्षी तप आराधना को यह दंपती पिछले एक वर्ष से पूरे संयम और नियमों के साथ कर रहा है। इस तप का पारणा 20 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया के अवसर पर गुजरात के पालीताना जैन तीर्थ में होगा।

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गुरु प्रेरणा से शुरू हुई वर्षी तप की साधना
अनाज व्यापारी शैलेंद्र तल्लेरा और उनकी पत्नी प्रमिला तल्लेरा ने वर्ष 2025 की गुड़ी पड़वा से इस तप की शुरुआत की थी। शैलेंद्र तल्लेरा ने बताया कि उन्होंने पहले कभी इतनी बड़ी तपस्या के बारे में नहीं सोचा था, लेकिन गुरुजी के आशीर्वाद से उन्हें प्रेरणा मिली। जब उन्होंने अपनी इच्छा प्रमिला तल्लेरा के सामने रखी, तो उन्होंने भी पूरा साथ देने का निर्णय लिया और दोनों ने मिलकर इस कठिन तप को शुरू किया।
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आचरण से बच्चों को संस्कार सिखाने का प्रयास
प्रमिला तल्लेरा का मानना है कि आज की पीढ़ी केवल कहने से नहीं, बल्कि आचरण से सीखती है। उन्होंने बताया कि इस तप का उद्देश्य बच्चों को धार्मिक और नैतिक मूल्यों से जोड़ना है। इस दौरान परिवार में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। उनके बेटे अक्षत ने उपवास करना शुरू किया, वहीं पोता शौर्य भी अब तप और उपवास की प्रक्रिया को समझने लगा है। परिवार का वातावरण अधिक अनुशासित और संस्कारवान हो गया है।



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तपस्या का स्वास्थ्य पर भी प्रभाव
इस एक वर्ष की तपस्या का प्रभाव केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि शारीरिक रूप से भी देखा गया है। संयमित दिनचर्या और नियमों के पालन के चलते उनका वजन 95 किलो से घटकर 74 किलो रह गया। साथ ही लंबे समय से चल रही बीपी और एसिडिटी की दवाइयों से भी काफी हद तक राहत मिली है। नियमित उपवास और अनुशासित जीवनशैली ने उन्हें नई ऊर्जा प्रदान की है।
 
जैन समाज में वर्षी तप का विशेष महत्व
जैन धर्म में वर्षी तप को अत्यंत महत्वपूर्ण और कठिन तप माना जाता है। इसमें अनुयायी एक दिन पूर्ण उपवास करते हैं और अगले दिन सीमित समय में दो बार भोजन ग्रहण करते हैं। यह एकांतर व्रत करीब 13 माह तक चलता है और अक्षय तृतीया के दिन इसका पारणा किया जाता है। इस दौरान तामसिक भोजन से दूर रहना और मन में शुद्ध विचार बनाए रखना आवश्यक माना जाता है।
 

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