Maharashtra: एमआईएम के नक्शेकदम पर महाराष्ट्र में फैलना चाहती है बीआरएस
Maharashtra: मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने रविवार को नांदेड के भोकर में बड़ी जनसभा की और ‘अबकी बार किसान सरकार’ का नारा दिया है। तेलंगाना राष्ट्र समिति का नाम भारत राष्ट्र समिति रखने के बाद केसीआर की प्रदेश के बाहर यह पहली जनसभा थी...
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तेलंगाना जैसे छोटे राज्य से निकलकर देश की राजनीति में पदार्पण करने के लिए मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने महाराष्ट्र के नांदेड़ को चुना है। हैदराबाद के बाद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआईएम ने नांदेड महानगरपालिका में ही प्रदेश के बाहर अपना पहला खाता खोला था। इसी तर्ज पर चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने भी नांदेड को महाराष्ट्र में प्रवेश का द्वार बनाने की तैयारी की है।
मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने रविवार को नांदेड के भोकर में बड़ी जनसभा की और ‘अबकी बार किसान सरकार’ का नारा दिया है। तेलंगाना राष्ट्र समिति का नाम भारत राष्ट्र समिति रखने के बाद केसीआर की प्रदेश के बाहर यह पहली जनसभा थी। उन्होंने अपने भाषण में पानी और किसान का मुद्दा उठाया। दरअसल, इसके पीछे केसीआर की मंशा किसानों के बहाने तेलंगाना के बाहर नांदेड से अपनी पार्टी का विस्तार करना हैं। तेलंगाना सरकार ने किसानों के लिए कई आकर्षक योजनाएं लागू की हैं, जिससे महाराष्ट्र के सीमावर्ती जिले के किसान काफी प्रभावित हैं। इसलिए अन्य जगह जनसभा या रैली करने की बजाए केसीआर ने सीमावर्ती जिले नांदेड का चयन किया। नांदेड के कई ऐसे गांव हैं जिनके घर महाराष्ट्र में हैं, लेकिन खेती तेलंगाना में करते हैं और अपना कृषि उपज भी तेलंगाना की आदिलाबाद मंडी में बेचते हैं। इन्ही संबंधों के सहारे कुछ साल पहले एमआईएम ने पहली बार नांदेड महानगरपालिका में चुनाव जीतकर महाराष्ट्र में अपना खाता खोला था। अब यहां के लोगों का एमआईएम से मोहभंग हुआ है। जो चुनाव में बीआरएस के साथ जा सकते हैं।
नांदेड, लातूर, यवतमाल और चंद्रपुर का है तेलंगाना से रोटी-बेटी का नाता
महाराष्ट्र के नांदेड, यवतमाल, लातूर और चंद्रपुर जिले तेलंगाना से सटे हुए हैं। हैदराबाद से मुंबई के बीच चलने वाली तेलंगाना सरकार की लग्जरी बसें भी इसी रूट से चलती हैं। राजनीतिक विश्लेषक रवि किरण देशमुख कहते हैं कि तेलंगाना के निजामाबाद, आदिलाबाद, करीम नगर और जग्तियाल जिलों में महाराष्ट्र के सीमावर्ती जिलों के किसानों का रोटी-बेटी का संबंध हैं। उनकी यहां शादियां होती है और वे यहां आते जाते रहते हैं। इन जिलों से हैदराबाद की दूरी मुंबई के मुकाबले 200 किमी कम है। इसलिए सीमावर्ती किसानों को मुंबई से ज्यादा तेलंगाना से लगाव रहता है।

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