17 जनवरी 2026 तक कुंडली में मौजूद शक्तिशाली ग्रह और भाव किसी व्यक्ति की वित्तीय स्थिति तय करते हैं। विशेष रूप से 2, 5, 9 और 11वें भाव पर आधारित धन योग आपके आर्थिक भविष्य को प्रभावित करते हैं। महालक्ष्मी योग, गजकेसरी योग और कर्माधिपति योग जैसी ज्योतिषीय संयोगों के जरिए अपार धन, सामाजिक मान-सम्मान और करियर में सफलता संभव है। सही दशा, गोचर और उपायों के माध्यम से ये योग फलित होते हैं।
क्या आपकी कुंडली में है महालक्ष्मी और गजकेसरी योग? जानिए अमीर बनने के उपाय
- कुंडली के 2, 5, 9 और 11वें भाव धन योग तय करते हैं
- महालक्ष्मी योग – भाग्य और संपत्ति के लिए सबसे प्रभावशाली
- गजकेसरी योग – धन, समाज में मान-सम्मान और शक्ति
- धन योग तभी फलित होता है जब ग्रहों की दशा और गोचर सही हो
- कुबेर यंत्र, शुक्र पूजा और उत्तर दिशा वास्तु से धन योग बढ़ सकता है
कुंडली में धन योग कैसे बनता है?
- दूसरा भाव– संचित धन और पैतृक संपत्ति
- पांचवां भाव– आकस्मिक लाभ, शेयर बाजार, सट्टा
- नवम भाव – भाग्य और सौभाग्य
- ग्यारहवें भाव– आय के स्रोत और लाभ
मुख्य सिद्धांत: इन भावों के स्वामी जब आपस में प्रभाव डालते हैं, तो व्यक्ति धनवान बनता है।
सबसे शक्तिशाली धन योग कौन से हैं?
महालक्ष्मी योग
• नवम भाव का स्वामी और शुक्र केंद्र/त्रिकोण में बैठे
• ऐश्वर्यपूर्ण जीवन, विलासिता और संपत्ति का लाभ
गजकेसरी योग
• गुरु और चंद्रमा एक-दूसरे से केंद्र (1,4,7,10वें घर) में स्थित
• धन के साथ समाज में मान-सम्मान और शक्ति
धन कर्माधिपति योग
• 10वें और 11वें भाव के स्वामियों का राशि परिवर्तन
• करियर और निवेश से करोड़ों की संपत्ति अर्जित
कौन सा ग्रह धन में कारक है?
| ग्रह | भूमिका | आर्थिक प्रभाव |
| बृहस्पति | विस्तार | निवेश, दीर्घकालिक संपत्ति |
| शुक्र | विलासिता | लग्जरी, सुख-सुविधाएं, गहने |
| बुध | व्यापारिक बुद्धि | शेयर मार्केट और बिजनेस सफलता |
धन योग कब फलित होता है?
• महादशा: संबंधित ग्रह की दशा में धन योग सक्रिय
• ग्रह का बल: नीच या 6,8,12 भाव में फंसा ग्रह लाभ कम कर सकता है
• गोचर: गुरु या शनि के प्रभाव में अचानक धन प्राप्ति

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