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Gayatri Mantra: गायत्री मंत्र का अर्थ क्या है? जानिए इसकी अद्भुत शक्ति, महत्व और 8 फायदे

Fri, 26 Jun 2026 05:43 PM IST
ज्योति मेहरा शैली प्रकाश
शैली प्रकाश Published by: ज्योति मेहरा Updated Fri, 26 Jun 2026 05:43 PM IST
सार

Gayatri Mantra Ke Fayde: धार्मिक मान्यता के अनुसार गायत्री मंत्र का नियमित जप मन, बुद्धि और आत्मा को शुद्ध करता है और जीवन में सही दिशा दिखाता है। आइए जानते हैं गायत्री मंत्र की शक्ति, अर्थ, महत्व और फायदे।

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Gayatri mantra ka arth kya hai Know the benefits of gayatri mantra
गायत्री मंत्र का अर्थ - फोटो : AI

Gayatri Mantra Meaning And Significance In Hindi: हिंदू धर्म में गायत्री मंत्र को सबसे शक्तिशाली और पवित्र मंत्रों में से एक माना जाता है। यह केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा, ज्ञान और आत्मिक जागरण का स्रोत है। कहा जाता है कि इसका नियमित जप मन, बुद्धि और आत्मा को शुद्ध करता है और जीवन में सही दिशा दिखाता है। प्राचीन ऋषियों द्वारा रचित यह मंत्र आज भी उतना ही प्रभावी है, जितना हजारों साल पहले था। इसकी ध्वनि और अर्थ दोनों ही व्यक्ति के भीतर गहरे बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं। चलिए जानते हैं गायत्री मंत्र की शक्ति, अर्थ, महत्व और फायदे।


 

Gayatri mantra ka arth kya hai Know the benefits of gayatri mantra
महामंत्र, उसका गुणार्थ और असीम शक्ति - फोटो : AI

1. महामंत्र, उसका गुणार्थ और असीम शक्ति
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।।

मंत्र का तीन स्तरों पर गहरा अर्थ

  • व्यावहारिक अर्थ: उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ और पापनाशक देवस्वरूप परमात्मा के तेज को हम अपने अंतःकरण में धारण करें, जो हमारी बुद्धियों को सदा सन्मार्ग की ओर प्रेरित करे।
  • ब्रह्मांडीय अर्थ: पृथ्वीलोक (भू:), अंतरिक्षलोक (भुव:) और स्वर्गलोक (स्व:) में व्याप्त उस परम प्रकाशमान सृष्टिकर्ता का हम ध्यान करते हैं, जिनकी चेतना हमें सही राह दिखाती है।
  • शब्द-अक्षर व्याख्या: 'ॐ' ईश्वर का मुख्य नाम है, 'भू:' प्राणदाता है, 'भुव:' दुखों को मिटाने वाला है, 'स्व:' आनंदस्वरूप है, 'तत्' उस, 'सवितु:' प्रेरक/उत्पादक, 'वरेण्यं' सर्वश्रेष्ठ, 'भर्गो' निष्पाप/शुद्ध विज्ञान, 'देवस्य' दिव्य, 'धीमहि' हम ध्यान करें, 'धियो' बुद्धि को, 'यो' जो, 'न:' हमारी, 'प्रचोदयात्' अच्छे कर्मों में प्रेरित करे।
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शक्ति का रहस्य (मस्तिष्क का विज्ञान) - फोटो : freepik

शक्ति का रहस्य (मस्तिष्क का विज्ञान)
इस महामंत्र में 24 अक्षर हैं, जो 24 शक्ति बीजों के समान हैं। इसके निरंतर उच्चारण से मस्तिष्क का न्यूरो-पैटर्न (तंत्र) बदल जाता है, जिससे मानसिक शक्तियां जाग्रत होती हैं। पौराणिक संदर्भों के अनुसार, इसी मंत्र के प्रचंड बल से महर्षि विश्वामित्र ने एक नई सृष्टि तक की रचना कर डाली थी। यजुर्वेद में इसे एक 'दिव्य वृषभ' (बैल) के रूप में रूपक दिया गया है, जिसके चार सींग (चार वेद), तीन पैर (8-8 अक्षरों के चरण), दो सिर (ज्ञान-विज्ञान) और सात हाथ (सात व्याहृतियां) हैं। जब यह साधक के भीतर दहाड़ता है, तो देवत्व का उदय होता है।

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साधना के नियम, सही समय और विधि - फोटो : amar ujala

2. साधना के नियम, सही समय और विधि

  • यदि आप इस मंत्र की शक्ति का पूर्ण लाभ उठाना चाहते हैं, तो इन वैज्ञानिक व आध्यात्मिक नियमों का पालन करना अनिवार्य है:
  • तीन दिव्य काल (संध्याकाल)
  • प्रातः काल (प्रथम संध्या): सूर्योदय से थोड़ी देर पहले जप शुरू करें और सूर्योदय के बाद तक करें। इस समय मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
  • मध्याह्न काल (द्वितीय संध्या): दोपहर के समय इस मंत्र का जप किया जाता है।
  • सायं काल (तृतीय संध्या): सूर्यास्त से कुछ समय पहले शुरू करके सूर्यास्त के कुछ देर बाद तक जप करें। इस समय मुख पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए।
  • विशेष नियम: इन तीन समयों के अलावा यदि किसी भी समय जप करना हो, तो केवल मौन या मानसिक जप ही करना चाहिए। मंत्र को तेज आवाज में नहीं चिल्लाना चाहिए।
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अनिवार्य पूजा विधि और सावधानियां - फोटो : amar ujala

अनिवार्य पूजा विधि और सावधानियां
1. तन और मन की पवित्रता: साधना का पहला चरण
जप से पहले स्नान करके स्वयं को पवित्र कर लें। यदि स्वास्थ्य ठीक न हो, तो साफ गीले कपड़े से बदन पोंछकर स्वच्छ व सूती वस्त्र धारण करें। साधक का खान-पान पूरी तरह शुद्ध (सात्त्विक) होना चाहिए।

2. आसन और स्थान का चुनाव: ऊर्जा संरक्षण के लिए
घर के मंदिर या किसी शांत, पवित्र स्थान पर बैठें। बैठने के लिए कुश या चटाई के आसन का प्रयोग करें (पशु की खाल का आसन पूरी तरह वर्जित है)।

3. माला और जप की संख्या: कम से कम 108 बार
गायत्री माता का ध्यान करते हुए रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जप शुरू करें। प्रतिदिन मंत्रों की न्यूनतम संख्या 108 (यानी 1 माला) अवश्य होनी चाहिए।

4. बाधा दोष का शमन: यदि जप के बीच उठना पड़े
यदि शौच या किसी आकस्मिक कार्य के कारण जप बीच में रुक जाए, तो दोबारा बैठने पर हाथ-पैर धोएं। रुकावट के दोष को शांत करने के लिए निर्धारित संख्या से कुछ अधिक (एक माला एक्स्ट्रा) जप करें। द्विजत्व और आहार: इस मंत्र की पूर्ण सिद्धि के लिए साधक का खान-पान पूरी तरह शुद्ध (सात्त्विक) होना चाहिए और उसे हर प्रकार के व्यसन (नशे/बुराइयों) को छोड़ना पड़ता है।
 

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