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क्या है गंडमूल दोष और कैसे करें इसका समाधान? जानें असरदार उपाय

ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Shweta Singh Updated Tue, 28 Apr 2026 10:19 PM IST
सार

Gandmool Dosh: गंडमूल दोष ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण दोष माना जाता है, जो 27 नक्षत्रों के कुछ विशेष चरणों में जन्म लेने पर बनता है और इसका प्रभाव जातक के साथ-साथ उसके परिवार पर भी पड़ सकता है, इसलिए समय पर इसके शांति उपाय करना आवश्यक माना जाता है।

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गंडमूल दोष उपाय - फोटो : amar ujala

Gandmool Shanti Upay: गंडमूल दोष ज्योतिष में एक ऐसा महत्वपूर्ण दोष माना जाता है, जिसका प्रभाव केवल जातक पर ही नहीं बल्कि उसके परिवार, विशेषकर माता-पिता पर भी देखा जा सकता है। यह दोष तब बनता है जब व्यक्ति का जन्म 27 नक्षत्रों में से कुछ विशेष नक्षत्रों के विशिष्ट चरणों में होता है। इसकी गंभीरता जन्म के पद के अनुसार बदलती है। मान्यता है कि समय रहते इसका शांति उपाय करना जरूरी होता है, ताकि जीवन में आने वाली रुकावटों और परेशानियों को कम किया जा सके और परिवार में सुख-शांति बनी रहे। 


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गंडमूल और नक्षत्र - फोटो : adobe stock

गंडमूल और नक्षत्र 
गंडमूल दोष ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण दोष माना जाता है, जिसका प्रभाव व्यक्ति के साथ-साथ उसके परिवार, खासकर माता-पिता पर भी देखा जा सकता है। यह दोष तब बनता है जब किसी व्यक्ति का जन्म 27 नक्षत्रों में से कुछ विशेष 6 नक्षत्रों में होता है। इसकी तीव्रता इस बात पर निर्भर करती है कि जन्म नक्षत्र के कौन से चरण (पद) में हुआ है। गंडमूल दोष को हल्के में नहीं लेना चाहिए और इसका समय रहते शांति उपाय करना जरूरी माना गया है। ऐसा करने से जीवन में आने वाली बाधाओं को कम किया जा सकता है और पारिवारिक जीवन में शांति और स्थिरता बनी रहती है।

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गंडमूल दोष उत्पन्न करने वाले नक्षत्र - फोटो : adobe

गंडमूल दोष उत्पन्न करने वाले नक्षत्र 
गंडमूल दोष ज्योतिष में तब माना जाता है जब किसी व्यक्ति का जन्म 27 नक्षत्रों में से कुछ विशेष नक्षत्रों में होता है। इनमें अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती शामिल हैं। इन नक्षत्रों को इसलिए खास माना जाता है क्योंकि ये राशि चक्र के शुरुआती या अंतिम भाग में स्थित होते हैं जहां ऊर्जा में बदलाव और अस्थिरता की स्थिति मानी जाती है। उदाहरण के तौर पर अश्विनी नक्षत्र मेष राशि की शुरुआत में आता है जबकि रेवती मीन राशि के अंत में स्थित होता है।  इन नक्षत्रों के स्वामी ग्रह भी इनके प्रभाव को निर्धारित करते हैं जैसे अश्लेषा का स्वामी बुध, मघा का सूर्य और केतु तथा मूल नक्षत्र का संबंध केतु से होता है। अगर किसी का जन्म इन नक्षत्रों के विशेष चरणों में होता है तो गंडमूल दोष का प्रभाव अधिक माना जाता है। इसलिए कुंडली का गहराई से अध्ययन किया जाता है ताकि दोष की स्थिति को समझकर उचित उपाय और शांति विधियां अपनाई जा सकें।

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मानसिक तनाव, चिंता और अस्थिर मन की स्थिति बनी रह सकती है। - फोटो : Freepik.com

गंडमूल दोष के प्रभाव 

  • बचपन से लेकर युवावस्था तक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर देखा जा सकता है।
  • बार-बार बीमार पड़ना, पुरानी या लंबी चलने वाली बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।
  • मानसिक तनाव, चिंता और अस्थिर मन की स्थिति बनी रह सकती है।
  • माता-पिता के साथ संबंधों में दूरी या अनावश्यक विवाद की स्थिति बन सकती है।
  • परिवार में अचानक या अप्रत्याशित घटनाओं का प्रभाव देखने को मिल सकता है।
  • कुछ मामलों में माता या पिता में से किसी एक पर अधिक असर पड़ने की संभावना रहती है।
  • करियर में लगातार संघर्ष, नौकरी में अस्थिरता या बार-बार बदलाव की स्थिति बन सकती है।
  • आर्थिक मामलों में रुकावट, नुकसान या स्थिरता की कमी महसूस हो सकती है।
  • आत्मविश्वास की कमी और निर्णय लेने में दुविधा बनी रह सकती है।
  • स्वभाव में चिड़चिड़ापन, भय या अकेलापन महसूस हो सकता है।
  • सामाजिक जीवन में दूरी या अलगाव की स्थिति बन सकती है।
  • व्यक्ति अपनी प्रगति में रुकावट महसूस कर सकता है और आगे बढ़ने में कठिनाई हो सकती है।
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सामान्य जीवन उतार-चढ़ाव तक सीमित रह सकता है। - फोटो : Adobe stock

क्या गंडमूल दोष खतरनाक है?
गंडमूल दोष को लेकर यह आम धारणा है कि यह हमेशा अत्यंत अशुभ और हानिकारक होता है, लेकिन वास्तविकता हर मामले में ऐसी नहीं होती। इस दोष का प्रभाव पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति का जन्म नक्षत्र के किस चरण (पद) में हुआ है, क्योंकि हर नक्षत्र के चारों चरणों की ऊर्जा और परिणाम अलग-अलग होते हैं। कई स्थितियों में इसका प्रभाव बहुत हल्का होता है और केवल सामान्य जीवन उतार-चढ़ाव तक सीमित रह सकता है, जबकि कुछ विशेष चरणों में यह मानसिक तनाव या पारिवारिक अस्थिरता जैसा असर दिखा सकता है। हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति पर इसका गंभीर प्रभाव पड़े ही। अगर कुंडली में शुभ ग्रह मजबूत हों या अच्छे योग बन रहे हों, तो इस दोष का प्रभाव काफी कम हो सकता है या कई बार समाप्त भी हो जाता है। इसलिए केवल नक्षत्र के आधार पर डरने की बजाय कुंडली का सही और गहन विश्लेषण किसी अनुभवी ज्योतिषाचार्य से कराना बेहतर होता है, ताकि वास्तविक स्थिति समझकर सही उपाय और मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सके और अनावश्यक चिंता से बचा जा सके।

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