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ऑटो इंडस्ट्री को होगा 12 हजार करोड़ का नुकसान, पढ़ें पूरा माजरा

Thu, 30 Mar 2017 10:11 AM IST
Updated Thu, 30 Mar 2017 10:11 AM IST
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auto industry is in crisis with 9 lakh unsold vehicle
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बीएस 3 वाहन अब भारतीय बाजार में कंपनियां नहीं बेच पाएंगी। बीएस का मतलब होता है भारत स्‍टेज और इसे तकनीकि अपग्रेड के साथ भारत में क्रमशः 1,2,3 के तहत लागू किया गया था। इन मानकों का पालन प्रदूषण के स्तर को सुधारने के लिए समय-समय पर किया गया है। अब 1 अप्रैल से यह एमीशन मानक अपने चौथे चरण में प्रवेश कर रहा है। इसके तहत अब कंपनियों को अपने हर कार्बुरेटर इंजन की जगह एफआई यानी कि फ्यूल इंजेक्‍शन प्रयोग करना है। ऐसे ही तकनीकि बदलावों के साथ बीएस को चरणबद्व तरीके से लागू किया गया है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पूरी ऑटो इंडस्‍ट्री में मातम फैल गया है। ऑटो विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पूरी ऑटो इंडस्ट्री बुरी तरह से प्रभावित होगी और उन अनसोल्ड 9 लाख वाहनों के वजह से इंडस्‍ट्री को 12 हजार करोड़ रुपये का चूना लगेगा। 

auto industry is in crisis with 9 lakh unsold vehicle
पुराने मानक पर आधारित वाहन

सुप्रीम कोर्ट ने क्यूं दिखाई सख्ती
एनवायरनमेंट पोल्यूशन कंट्रोल अथॉरिटी(ईपीएस) के तरफ से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखते हुए कहा कि सरकार ने क्लीनर फ्यूल के लिए 18 से 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं जिससे 1 अप्रैल बीएस 4 लागू किया जा सके। यह पता होने के बावजूद कंपनियों ने बीएस3 के पुराने मानक पर गाड़ियां बनाना जारी रखा।  
 

auto industry is in crisis with 9 lakh unsold vehicle
पुराने स्कूटर
किन कंपनियों को होगा सबसे ज्यादा नुकसान
इसके वजह से सबसे ज्यादा नुकसान हीरो मोटो कॉर्प और होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर्स इंडिया को होगा। इन दोनों कंपनियों की कुल इंवेंटरी में 80 फीसदी हिस्सेदारी है। हीरो के पास 2.90 लाख तो वहीं होंडा के पास 2.50 लाख अनसोल्ड वाहन हैं। 
 
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राजीव मिश्रा, सीईओ, यूएम मोटरसाइकिल
इंडस्ट्री का मानना
इस बात पर ऑटो इंडस्ट्री का साफ कहना है कि इसका बहुत बुरा असर उनके कारोबार पर पड़ेगा। यूएम मोटरसाइकिल के प्रमुख के सीईओ राजीव मिश्रा ने बताया सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का नकारात्मक प्रभाव पूरी इंडस्ट्री पर पड़ेगा क्योंकि इसमें 9 लाख वाहनों की इंवेंटरी स्क्रैप हो जाएगी। इससे लगभग 12 हजार करोड़ का नुकसान ऑटो कंपनियों को होगा। नोटीफिकेशन के बाद ऐसा नहीं है कि कंपनियों ने जानबूझकर इतनी सारी इंवेंटरी खड़ी की है। वास्तव में देखा जाए तो यह पीरियड काफी कम होता है जब किसी तकनीकि को अपग्रेड किया जाता है। सबसे बड़ी बात ये है कि अभी भी वाहनों में प्रयोग होने वाले लगभग 40 फीसदी कंपोनेंट को आयात करके भारत मंगाया जाता है। इस प्रोसेस में लगभग छह महीने का समय लगता है। हमारी भी लगभग 2000 मोटरसाइकिलों की इंवेंटरी इससे प्रभावित हुई है।  

 
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भारत स्टेज4
बीएस को सरल भाषा में समझें
वाहनों में ईंधन से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक मानक तय किया गया है जिसे हम एमिशन नॉम्स के रूप में जानते हैं। बदलती तकनीकि के साथ प्रदूषण की मात्रा को कम करने के तरीके ढूंढे जाते हैं और परिणामस्वरूप मानकों को अपग्रेड किया जाता है। इसके बाद कंपनियों को हिदायत दी जाती है कि उनको इसके अनुरूप ही वाहनों को बनाना है। बीएस4 के लिए ऑटो निर्माता कंपनियों को सरकार के तरफ से नोटीफिकेशन जनवरी 2014 में ही जारी किया गया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि अब सीधे बीएस 6 को 2020 में लागू किया जाएगा अब कोई बीएस5 नहीं आएगा।  
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