देश में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर जारी बहस के बीच वाहन खरीदारों के सामने एक नई दुविधा खड़ी हो गई है। एक ओर लोग इथेनॉल के इंजन पर पड़ने वाले प्रभाव और बदलते नियमों को लेकर स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी तेजी से उभर रहा है कि नई कार खरीदते समय पेट्रोल (ICE) मॉडल चुनें, फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (FFV) लें या फिर सीधे इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) की ओर बढ़ें।
इथेनॉल विवाद के बीच अध्ययन का दावा: भारत के भविष्य के लिए Flex-Fuel से ज्यादा भरोसेमंद और टिकाऊ विकल्प हैं EV
इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल को लेकर जारी विवाद और अनिश्चितताओं ने नई गाड़ी खरीदने की सोच रहे ग्राहकों को भारी असमंजस में डाल दिया है। वाहनों के इंजन पर इथेनॉल के संभावित असर के डर और नियमों में स्थिरता की कमी के कारण लोग फिलहाल खरीदारी टाल रहे हैं। ग्राहकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे पारंपरिक पेट्रोल/डीजल गाड़ी खरीदें या फिर इलेक्ट्रिक वाहन की ओर रुख करें। हालांकि, इस खींचतान के बीच, एक नए अध्ययन में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर बड़ा दावा किया गया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पेट्रोल कार, फ्लेक्स-फ्यूल (FFV) और EV में से कौन सी गाड़ी है ज्यादा किफायती?
B2K एनालिटिक्स ने 5 साल की अवधि और प्रति वर्ष 15,000 किलोमीटर चलने के आधार पर तीनों तकनीकों के कुल स्वामित्व खर्च (टोटल ओनरशिप कॉस्ट - TCO) का एक तुलनात्मक विश्लेषण किया है:
-
पेट्रोल कार (Petrol Car) - सबसे कम शुरुआती और कुल खर्च:
-
खरीद मूल्य: 5.96 लाख रुपये (शुरुआती कीमत कम होने के कारण यह अभी भी आम जनता के लिए सबसे व्यावहारिक विकल्प है)।
-
रनिंग कॉस्ट: 4.49 रुपये प्रति किलोमीटर।
-
5 साल का कुल ईंधन खर्च: लगभग 3.37 लाख रुपये।
-
कुल स्वामित्व खर्च (TCO): लगभग 10.08 लाख रुपये (कम खरीद मूल्य के कारण यह सबसे किफायती विकल्प बनकर उभरता है)।
-
-
इलेक्ट्रिक कार (EV) - सबसे कम ऑपरेटिंग कॉस्ट (चलाने का खर्च):
-
खरीद मूल्य: 9.49 लाख रुपये (तीनों में सबसे ज्यादा शुरुआती कीमत)।
-
रनिंग कॉस्ट: मात्र 1.12 रुपये प्रति किलोमीटर (सबसे कम)।
-
5 साल का ऊर्जा खर्च: केवल 95,000 रुपये (पेट्रोल कार की तुलना में लगभग 72% कम)।
-
कुल स्वामित्व खर्च (TCO): लगभग 11.21 रुपये लाख। (उच्च खरीद मूल्य के कारण इसका TCO पेट्रोल कार से थोड़ा अधिक है, लेकिन यह फ्लेक्स-फ्यूल कार से सस्ता पड़ता है)।
-
-
E85 फ्लेक्स-फ्यूल कार (FFV) - सबसे महंगा विकल्प:
-
रनिंग कॉस्ट: 4.86 रुपये प्रति किलोमीटर।
-
5 साल का ईंधन खर्च: लगभग 3.65 लाख रुपये।
-
कुल स्वामित्व खर्च (TCO): लगभग 11.82 लाख रुपये (तीनों में सबसे महंगा)।
कारण: भले ही E85 (85% इथेनॉल) ईंधन पेट्रोल से सस्ता है, लेकिन इथेनॉल की कम माइलेज/ईंधन दक्षता के कारण गाड़ी में बार-बार ईंधन भराना पड़ता है। अधिक खरीद मूल्य और रख-रखाव खर्च मिलकर इसे पेट्रोल और ईवी दोनों की तुलना में महंगा बना देते हैं।
-
इथेनॉल को लेकर सरकार की क्या नीति है और क्या हैं इसकी चुनौतियां?
भारतीय सरकार ने ईंधन नीतियों को लेकर कई बड़े कदम उठाए हैं, लेकिन उनके सामने व्यावहारिक चुनौतियां भी खड़ी हैं:
-
अप्रैल 2026 से E20 मानक:
सरकार ने अप्रैल 2026 से 20 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E20) को देश भर में मानक ईंधन बना दिया है। -
100% इथेनॉल नीति का लक्ष्य:
सरकार निकट भविष्य में 100 प्रतिशत इथेनॉल ईंधन नीति लागू करना चाहती है। इसी कड़ी में 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल के मिश्रण वाला E85 पेट्रोल लॉन्च किया गया है। और कुछ कंपनियों ने इसके अनुकूल गाड़ियां भी उतारी हैं। -
सरकार का तर्क:
सरकार का दावा है कि इस रणनीति से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी और भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। -
स्केलेबिलिटी की चुनौती:
भारत में गाड़ी खरीदारों के लिए माइलेज सबसे बड़ा निर्णायक कारक होता है। E85 फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का कम माइलेज इनके प्रसार में सबसे बड़ी बाधा है। -
10-15 साल का लंबा समय:
अध्ययन का अनुमान है कि भारत में E85 इकोसिस्टम अभी शुरुआती चरण में है और बाजार में इसके अनुकूल मॉडल सीमित हैं। इसे व्यापक रूप से अपनाने में 10 से 15 साल का समय लग सकता है।
लंबे समय में ईवी क्यों साबित होगी बाजीगर?
अध्ययन का निष्कर्ष बताता है कि भले ही वर्तमान में स्थापित पेट्रोल पंप नेटवर्क और कम शुरुआती कीमत के कारण पेट्रोल कारें बहुसंख्यक आबादी के लिए किफायती हैं। लेकिन भविष्य केवल इलेक्ट्रिक वाहनों का है:
-
जीरो टेलपाइप एमिशन:
ईवी से बिल्कुल भी जहरीला धुआं नहीं निकलता, जो इसे पर्यावरण के अनुकूल और दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाता है। -
घटती लागत और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर:
जैसे-जैसे भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है और बैटरी की लागत घट रही है, ईवी आने वाले समय में और अधिक किफायती हो जाएंगी। -
पारिस्थितिक और तकनीकी बढ़त:
अध्ययन के अनुसार, जहां E85 देश की ऊर्जा सुरक्षा सुधारने का एक भविष्यवादी समाधान हो सकता है। वहीं ईवी में भारत के व्हीकल मार्केट के लिए अधिक व्यावहारिक, स्केलेबल और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प बनने की सबसे मजबूत क्षमता है।