भारत में E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) लागू करने का फैसला किसी युद्ध या वैश्विक संकट की वजह से नहीं, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लंबे लक्ष्य को ध्यान में रखकर लिया गया है। यह बात अनाज इथेनॉल निर्माता संघ (GEMA) के अध्यक्ष सीके जैन ने कही।
E20 Petrol: GEMA अध्यक्ष ने कहा- भारत का ई20 मिशन ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर केंद्रित, युद्ध नहीं वजह
भारत का पेट्रोल (E20) में 20% इथेनॉल मिलाने का कदम, मिडिल ईस्ट में चल रहे विवाद जैसी जियोपॉलिटिकल दिक्कतों के बजाय, लंबे समय के एनर्जी आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों से प्रेरित है।
क्या E20 अंतिम लक्ष्य है?
विशेषज्ञों का मानना है कि E20 कोई अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि एक “चेकपॉइंट” है।
इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि देश में एथेनॉल उत्पादन के लिए पर्याप्त कच्चा माल और निवेश दोनों उपलब्ध हैं।
आने वाले समय में एथेनॉल मिश्रण को 25-27 प्रतिशत तक बढ़ाने की संभावना भी जताई गई है।
क्या भारत के पास पर्याप्त उत्पादन क्षमता है?
भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता करीब 2,000 करोड़ लीटर तक पहुंच चुकी है और आगे इसमें 10 प्रतिशत तक और वृद्धि होने की उम्मीद है।
वर्तमान में 20 प्रतिशत ब्लेंडिंग के लिए लगभग 1,300-1,400 करोड़ लीटर की जरूरत होती है। जिससे स्पष्ट है कि देश के पास अतिरिक्त क्षमता मौजूद है।
क्या उत्पादन क्षमता का पूरा उपयोग हो रहा है?
हालांकि क्षमता पर्याप्त है, लेकिन एथेनॉल प्लांट्स अभी केवल 40-50 प्रतिशत क्षमता पर ही चल रहे हैं।
इससे उद्योग में वित्तीय दबाव बढ़ रहा है और करीब 50,000 करोड़ रुपये तक के NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) का जोखिम भी बताया गया है।
क्या इससे अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ है?
एथेनॉल ब्लेंडिंग से देश को बड़ा आर्थिक लाभ हुआ है।
2024-25 में भारत ने कच्चे तेल के आयात पर करीब 40,000 करोड़ रुपये की बचत की।
इसका बड़ा हिस्सा किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था तक पहुंचा है, जिससे कृषि क्षेत्र को मजबूती मिली है।
क्या कच्चे माल की कमी है?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में एथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल की कोई कमी नहीं है।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास 200 लाख टन से अधिक चावल का अतिरिक्त भंडार है। जिससे बड़ी मात्रा में एथेनॉल बनाया जा सकता है।
इसके अलावा मक्का और अन्य अनाज भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
क्या एथेनॉल का वाहनों पर असर पड़ता है?
E20 पेट्रोल के उपयोग से माइलेज में हल्की कमी आ सकती है, लेकिन इसका प्रभाव बहुत सीमित है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वाहनों के प्रदर्शन पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं देखा गया है।
क्या भविष्य में एथेनॉल का उपयोग और बढ़ेगा?
एथेनॉल का उपयोग केवल वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि इसे कुकिंग फ्यूल के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है, खासकर LPG के विकल्प के रूप में।
जैसे-जैसे एथेनॉल सस्ता होगा और LPG महंगा, यह विकल्प और व्यवहारिक हो सकता है।