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Vehicles Scrapping: कर्नाटक ने वाहन निर्माताओं से कहा- कबाड़ हो चुके वाहनों को वापस लें और रीसायकल करें
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 23 Sep 2025 09:07 PM IST
सार
कर्नाटक पर्यावरण विभाग ने ऑटोमोबाइल कंपनियों और डीलरों को साफ निर्देश दिया है कि वे अब पुरानी और बेकार हो चुकी गाड़ियां (कार, बाइक और ऑटो रिक्शा) वापस लेकर उन्हें स्क्रैप और रीसाइकिल करें।
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Vehicle Scrapping
- फोटो : Adobe Stock
कर्नाटक पर्यावरण विभाग ने ऑटोमोबाइल कंपनियों और डीलरों को साफ निर्देश दिया है कि वे अब पुरानी और बेकार हो चुकी गाड़ियां (कार, बाइक और ऑटो रिक्शा) वापस लेकर उन्हें स्क्रैप और रीसाइकिल करें।
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नई पॉलिसी की तैयारी
विभाग फिलहाल एक वाहन बाय-बैक और रीसाइक्लिंग पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार कर रहा है। जिसे जल्द ही सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "बहुत जल्दी पॉलिसी लेवल पर फैसला होगा। इस पर सरकार से चर्चा चल रही है।"
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विभाग फिलहाल एक वाहन बाय-बैक और रीसाइक्लिंग पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार कर रहा है। जिसे जल्द ही सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "बहुत जल्दी पॉलिसी लेवल पर फैसला होगा। इस पर सरकार से चर्चा चल रही है।"
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Vehicle Scrap Policy
- फोटो : अमर उजाला
क्यों जरूरी है यह कदम
अधिकारियों ने साफ कहा कि पुरानी गाड़ियों से सिर्फ धुआं और उत्सर्जन ही प्रदूषण का कारण नहीं हैं। बल्कि स्क्रैप के ढेर, जंग लगी धातु और रिसते हुए केमिकल्स भी उतने ही हानिकारक हैं। खासकर अब जब इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ रही है, तो बैटरी और सीसे (लीड) के निपटान का मुद्दा और भी गंभीर हो गया है।
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अधिकारियों ने साफ कहा कि पुरानी गाड़ियों से सिर्फ धुआं और उत्सर्जन ही प्रदूषण का कारण नहीं हैं। बल्कि स्क्रैप के ढेर, जंग लगी धातु और रिसते हुए केमिकल्स भी उतने ही हानिकारक हैं। खासकर अब जब इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ रही है, तो बैटरी और सीसे (लीड) के निपटान का मुद्दा और भी गंभीर हो गया है।
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Vehicle Scrapping
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कंपनियों को मिल सकते हैं फायदे
सरकार इस पर भी विचार कर रही है कि जो कंपनियां पुरानी गाड़ियां वापस लेकर उन्हें रीसाइकिल करेंगी, उन्हें इंसेंटिव दिया जाए। जैसे कि नए प्रोजेक्ट्स के अप्रूवल या प्लांट के विस्तार में आसानी। इसके अलावा कंपनियों को कार्बन क्रेडिट भी मिल सकते हैं, जिससे उनके फाइनेंशियल ऑडिट और कारोबार दोनों में फायदा होगा। साथ ही, कंपनियों से यह भी उम्मीद की जा रही है कि वे गाड़ियों को वापस खरीदने और स्क्रैप करने पर ग्राहकों को डिस्काउंट दें।
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सरकार इस पर भी विचार कर रही है कि जो कंपनियां पुरानी गाड़ियां वापस लेकर उन्हें रीसाइकिल करेंगी, उन्हें इंसेंटिव दिया जाए। जैसे कि नए प्रोजेक्ट्स के अप्रूवल या प्लांट के विस्तार में आसानी। इसके अलावा कंपनियों को कार्बन क्रेडिट भी मिल सकते हैं, जिससे उनके फाइनेंशियल ऑडिट और कारोबार दोनों में फायदा होगा। साथ ही, कंपनियों से यह भी उम्मीद की जा रही है कि वे गाड़ियों को वापस खरीदने और स्क्रैप करने पर ग्राहकों को डिस्काउंट दें।
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CSR से जुड़ा बड़ा कदम
पर्यावरण और पारिस्थितिकी विभाग के प्रधान सचिव श्रीनिवासलु ने कहा कि इस पहल का असर पेड़ लगाने या मैराथन कराने जैसी गतिविधियों से कहीं ज्यादा होगा। उन्होंने कहा, "कंपनियों की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) (सीएसआर) और कॉर्पोरेट एनवायरनमेंटल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CER) (सीईआर) सिर्फ पौधे लगाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। गाड़ियों को वापस लेकर उन्हें सही तरीके से स्क्रैप करना पर्यावरण के लिए ठोस योगदान होगा।"
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पर्यावरण और पारिस्थितिकी विभाग के प्रधान सचिव श्रीनिवासलु ने कहा कि इस पहल का असर पेड़ लगाने या मैराथन कराने जैसी गतिविधियों से कहीं ज्यादा होगा। उन्होंने कहा, "कंपनियों की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) (सीएसआर) और कॉर्पोरेट एनवायरनमेंटल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CER) (सीईआर) सिर्फ पौधे लगाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। गाड़ियों को वापस लेकर उन्हें सही तरीके से स्क्रैप करना पर्यावरण के लिए ठोस योगदान होगा।"
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