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Electrified Road: दुनिया की पहली परमानेंट इलेक्ट्रिक सड़क बना रहा यह देश, चलती हुई गाड़ियां होंगी चार्ज
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 08 May 2023 12:57 PM IST
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Electric Highway
- फोटो : For Reference Only
स्वीडन 2025 में दुनिया की पहली स्थायी रूप से इलेक्ट्रिफाइड (विद्युतीकृत) सड़क खोलेगा। इस रोड की खासियत यह होगी कि इसमें चलते-फिरते इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज किया जा सकेगा। यूरोपीय देश का लक्ष्य 3,000 किलोमीटर से ज्यादा हाईवे का इलेक्ट्रिफिकेशन (विद्युतीकरण) करना है। देश का लक्ष्य इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम बनाना है। यूरो न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस ऐतिहासिक इलेक्ट्रिफाइड हाईवे को इलेक्ट्रिक रोड सिस्टम (ईआरएस) (ERS) के रूप में जाना जाएगा। इसका फायदा इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को मिलेगा क्योंकि वे इस रोड पर स्थित चार्जिंग स्टेशनों की मदद से ज्यादा दूरी तय कर पाएंगे।
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EV Charging
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यह है योजना
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इस परियोजना के लिए चुना गया राजमार्ग E20 है, जो स्टॉकहोम, गोथेनबर्ग और माल्मो जैसे स्वीडन के प्रमुख शहरों के मध्य स्थित है। दावा किया गया है कि यह उस बड़ी योजना का पहला हिस्सा है जिसमें 3,000 किलोमीटर से ज्यादा स्वीडिश सड़कों को इलेक्ट्रिक बनाने की परिकल्पना की गई है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया है कि अधिकारियों ने अभी तक तय नहीं किया है कि किस तरह की इलेक्ट्रिक सड़क पर पहले मोटरवे की सुविधा होगी।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इस परियोजना के लिए चुना गया राजमार्ग E20 है, जो स्टॉकहोम, गोथेनबर्ग और माल्मो जैसे स्वीडन के प्रमुख शहरों के मध्य स्थित है। दावा किया गया है कि यह उस बड़ी योजना का पहला हिस्सा है जिसमें 3,000 किलोमीटर से ज्यादा स्वीडिश सड़कों को इलेक्ट्रिक बनाने की परिकल्पना की गई है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया है कि अधिकारियों ने अभी तक तय नहीं किया है कि किस तरह की इलेक्ट्रिक सड़क पर पहले मोटरवे की सुविधा होगी।
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EV Charging
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पहले भी हुए प्रयोग
यह यूरोपीय देश इलेक्ट्रिक सड़क नेटवर्क में अग्रणी रहा है। यह ऐसी इलेक्ट्रिक सड़कों की टेस्टिंग कर रहा है और पहले से ही तीन प्रमुख समाधानों की टेस्टिंग कर चुका है। 2016 में, देश ने भारी वाहनों को पैंटोग्राफ के जरिए रिचार्ज करने की सुविधा के लिए ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइनों के साथ दो किलोमीटर की दूरी खोली, जो ट्रेनों या ट्रामों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली टेक्नोलॉजी के जैसी है। बाद में, सड़क में डामर के नीचे स्थित चार्ज कॉइल्स का इस्तेमाल करके 1.6 किलोमीटर हिस्से को इलेक्ट्रिफाइड बनाया गया। 2018 में, देश ने दो किलोमीटर तक के हिस्से पर चलने वाले दुनिया की पहली चार्जिंग रेल की शुरुआत की, जिसने इलेक्ट्रिक ट्रकों को एक चलती हुई भुजा को नीचे करने की अनुमति दी जो ऊर्जा खींचती थी।
यह यूरोपीय देश इलेक्ट्रिक सड़क नेटवर्क में अग्रणी रहा है। यह ऐसी इलेक्ट्रिक सड़कों की टेस्टिंग कर रहा है और पहले से ही तीन प्रमुख समाधानों की टेस्टिंग कर चुका है। 2016 में, देश ने भारी वाहनों को पैंटोग्राफ के जरिए रिचार्ज करने की सुविधा के लिए ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइनों के साथ दो किलोमीटर की दूरी खोली, जो ट्रेनों या ट्रामों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली टेक्नोलॉजी के जैसी है। बाद में, सड़क में डामर के नीचे स्थित चार्ज कॉइल्स का इस्तेमाल करके 1.6 किलोमीटर हिस्से को इलेक्ट्रिफाइड बनाया गया। 2018 में, देश ने दो किलोमीटर तक के हिस्से पर चलने वाले दुनिया की पहली चार्जिंग रेल की शुरुआत की, जिसने इलेक्ट्रिक ट्रकों को एक चलती हुई भुजा को नीचे करने की अनुमति दी जो ऊर्जा खींचती थी।
EV Charging
- फोटो : iStock
क्या है ERS टेक्नोलॉजी
आनेवाली ERS टेक्नोलॉजी की बात करें तो इसमें इंडक्टिव अंडर-रोड चार्जिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। यह टेक्नोलॉजी मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाली Qi (क्यूआई) वायरलेस चार्जिंग से काफी मिलती-जुलती है। सड़क के नीचे एक पैड या प्लेट लगा दी जाएगी, और एक रिसीविंग कॉइल से लैस इलेक्ट्रिक वाहन इसके ऊपर से गुजरते ही रिचार्ज हो जाएंगे। दिलचस्प बात यह है कि जर्मनी और अमेरिका में भी इस तरह की पेशकश की टेस्टिंग की जा चुकी है।
आनेवाली ERS टेक्नोलॉजी की बात करें तो इसमें इंडक्टिव अंडर-रोड चार्जिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। यह टेक्नोलॉजी मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाली Qi (क्यूआई) वायरलेस चार्जिंग से काफी मिलती-जुलती है। सड़क के नीचे एक पैड या प्लेट लगा दी जाएगी, और एक रिसीविंग कॉइल से लैस इलेक्ट्रिक वाहन इसके ऊपर से गुजरते ही रिचार्ज हो जाएंगे। दिलचस्प बात यह है कि जर्मनी और अमेरिका में भी इस तरह की पेशकश की टेस्टिंग की जा चुकी है।