गर्मियों की रात में अगर पंखा ना चले, बेचैनी होने लगती है। भारत में ज्यादातर लोग पंखे के बिना चैन की नींद की कल्पना भी नहीं कर सकते। लेकिन दक्षिण कोरिया में पंखे को लेकर एक अजीबोगरीब मान्यता थी, जिसने लोगों के मन में दहशत पैदा कर दी थी। दक्षिण कोरिया में यह फैन डेथ (Fan Death) के नाम से मशहूर है। इस पुरानी धारणा के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति बंद कमरे में पूरी रात पंखा चलाकर सोता है, तो उसकी मौत हो सकती है। माना जाता था कि लगातार पंख चलने से शरीर के लिए खतरनाक स्थिति पैदा हो सकती है।
क्यों रात में पंखा चलाकर सोने से हो सकती है मौत? इस देश की परंपरा कर देगी हैरान
दक्षिण कोरिया में मान्यता थी कि रात में पंखा चलाकर सोने से मौत होती है। यह धारणा फैन डेथ नाम से मशहूर थी। आइए जानते हैं इससे जुड़ी कहानी।
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क्या पंखे से मौत हो सकती है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर लोगों को क्यों लगता था कि पंखा चलाने से जान लगी जाएगी। इस मान्यता को लेकर अलग-अलग तरह की बातें होती रही हैं। एक मान्यता यह भी थी कि अगर कोई बंद कमरे में पंखा चलाकर सोता है, तो पंखा से कमरे का तापमान इतना कम हो सकता है कि शरीर हाइपोथर्मिया की स्थिति में पहुंच जाए। कुछ लोग यह भी मानते थे कि बंद कमरे में लगातार पंखा चलाने से सांस लेने में दिक्कत हो सकती है और व्यक्ति का दम घुट सकता है। हालांकि, यह बातें वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं हुई हैं कि पंखा चलाकर सोने से किसी स्वस्थ व्यक्ति की मौत हो सकती है। इस मान्यता को मानने के लिए कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
पंखों में टाइमर लगा होता था
दक्षिण कोरिया में यह मान्यता इतनी मजबूत थी कि दुकानों पर बिकने वाले बहुत से पंखों में टाइमर की सुविधा होती है। जब लोग रात में सोने जाते थे, तो पंखे में टाइमर लगा देते थे, जिससे कुछ समय बाद पंखा अपने आप बंद हो जाए। दक्षिण कोरिया में इस मान्यता की वजह से पंखा डर का कारण बन गया था। वर्तमान समय में दक्षिण कोरिया की गिनती सबसे आधुनिक और तकनीकी रूप से विकसित देशों में होती है। अब सवाल है कि वहां के लोगों में ऐसी मान्यता लंबे समय तक कैसी बनी रही। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण कोरिया में 1970 के दशक में Fan Death की रिपोर्ट्स सामने आई थीं। उस समय यह देश ऊर्जा संकट और बढ़ती बिजली की कीमतों जैसी समस्याओं का सामना कर रहा था।
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क्या सरकार की तरफ से फैलाई गई दहशत?
सीधे तौर पर इस दावे को साबित नहीं किया जा सका कि सरकार ने Fan Death की कहानी बनाई। रिपोर्ट में यह बात जरूर कही गई है कि 1970 के दशक में
ऊर्जा संकट के समय सरकारी प्रचार और मीडिया रिपोर्टिंग की इस डर को बढ़ाने में भूमिका हो सकती है। उस समय बिजली की बचत करना बड़ी जरूरत थी। ऐसे में पूरी रात पंखा चलाने की आदत को कम करने के लिए इससे संबंधित डर और खबरें लोगों की सोच को प्रभावित करने में बड़ी भूमिका निभा सकती थीं। वैज्ञानिक जानकारी और इंटरनेट की दुनिया में युवा इस मान्यता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। लोगों को समझने लगे हैं कि पंखे से किसी मौत नहीं हो सकती है। जिसे पहले कई लोग गंभीरता से लेते थे, अब उसी पर युवा सवाल खड़े कर रहे हैं।