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El Nino: क्या भारत समेत दुनिया के लिए खतरनाक साबित होगा अल नीनो? डब्ल्यूएमओ ने दी बड़ी चेतावनी

फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: Dharmendra Kumar Singh Updated Sat, 06 Jun 2026 01:27 PM IST
सार

El Nino: विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने अल नीनो को लेकर चेतावनी दी है। संगठन का कहना है कि शांत महासागर में अल-नीनो की स्थितियां तेजी से बन रही हैं। पूरी दुनिया पर इसका प्रभाव देखने को मिलेगा। 

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Super El Nino In Pacific Ocean Can Effect On World India May See Weakest Monsoon WMO warn
क्या भारत समेत दुनिया के लिए खतरनाक साबित होगा अल नीनो? - फोटो : AI

El Nino: विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है। इसने दुनिया भर के पर्यावरणविदों और सरकार के लिए चेतावनी है। डब्ल्यूएमओ की तरफ से आधिकारिक पुष्टि की गई है कि प्रशांत महासागर में अल-नीनो की स्थितियां तेजी से बन रही हैं। यह मौसमी बदलाव वैश्विक तापमान और मानसून के पैटर्न को आने वाले महीनों में बदल देगा। वैज्ञानिकों के पूर्वानुमान मॉडल के मुताबिक, 2026 में आने वाला यह अल-नीनो सामान्य नहीं होगा, बल्कि इसके मध्यम से लेकर अधिक शक्तिशाली होने की संभावना है। 



वैज्ञानिकों का यह संकट भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने से बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हाल ही में एक वीडियो जारी किया था, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि पहले से ही गर्म हो रही दुनिया की आग में अल-नीनो घी डालने का काम करेगा। इसके असर बहुत गंभीर होंगे, जो बेहद तेजी से अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार कर वैश्विक अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और कृषि व्यवस्था को तहस-नहस कर सकते हैं। 
 

Super El Nino In Pacific Ocean Can Effect On World India May See Weakest Monsoon WMO warn
क्या भारत समेत दुनिया के लिए खतरनाक साबित होगा अल नीनो? - फोटो : ANI

क्या है अल नीनो? 

अल-नीनो एक प्राकृतिक तौर पर होने वाली जलवायु घटना है। यह मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र के सतह का तापमान असामान्य रूप से गर्म होने की वजह से पैदा होता है। अल-नीनो साउदर्न ऑसीलेशन का भाग है। इसके दूसरे हिस्से या ठंडे चरण को ला नीना कहते हैं। आमतौर पर अल-नीनो हर दो से सात साल में एक बार आता है और करीब 9 से 12 महीनों तक सक्रिय रहता है। 

 

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क्या भारत समेत दुनिया के लिए खतरनाक साबित होगा अल नीनो? - फोटो : Adobe Stock

अल नीनो के विकास की शुरुआत मार्च और जून के बीच होती है। यह नवंबर से फरवरी के बीच अपनी चरम तीव्रता पर पहुंचता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो का सबसे खतरनाक असर इसके विकसित होने के दूसरे वर्ष में नजर आता है। इस बार समुद्र के भीतर ऐसी स्थिति है कि सतह से नीचे का तापमान औसत से 6 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किए गए हैं। यह भविष्य में भीषण गर्मी, सूखे और विनाश बाढ़ की वजह बनेगा। 

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क्या भारत समेत दुनिया के लिए खतरनाक साबित होगा अल नीनो? - फोटो : Adobe Stock

दुनिया में दिखेगा मौसम में अजीब बदलाव

डब्ल्यूएमओ ने अपने नए अपेडट में बताया है कि संभावना है कि जून से अगस्त 2026 के दौरान अल-नीनो 80 प्रतिशत होगा, तो वहीं उम्मीद जताई है कि इसके नंवबर तक जारी रहने की 90 प्रतिशत संभावना है। इस दौरान दुनिया के मौसम में अजीब बदलाव दिखाई देगा। 

ग्लोबल सीजनल क्लाइमेट अपडेट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जून, जुलाई और अगस्त के महीनों में दुनिया के करीब हर इलाके में तापमान सामान्य से काफी ऊपर रहेगा। तापमान में होने वाली इस अप्रत्याशित वृद्धि से सीधे तौर पर गर्मी की वजह से होने वाला शारीरिक तनाव बढ़ेगा और कई इलाकों में सूखे की स्थिति उत्पन्न होगी। डब्ल्यूएमओ की महानिदेशक सेलेस्टे साउलो ने कहा कि दुनिया को एक ताकतवर अलनीनो के लिए तैयार रहना चाहिए। 

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क्या भारत समेत दुनिया के लिए खतरनाक साबित होगा अल नीनो? - फोटो : Adobe Stock

क्या होगा भारत पर असर?

यह रिपोर्ट भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण एशिया के लिए एक बड़े झटके की तरह है। डब्ल्यूएमओ ने  साउथ एशियन क्लाइमेट आउटलुक फोरम के पूर्वानुमानों का हवाला दिया और कहा कि अल-नीनो के असर से भारत समेत दक्षिण एशिया में इस साल मानसून की बारिश सामान्य से कम हो सकती है। इसके उलट दुनिया में दक्षिणी अमेरिका, अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों, हॉर्न ऑफ अफ्रीका और मध्य एशिया जैसे इलाकों में सामान्य से बहुत ज्यादा बारिश होने और विनाशकारी बाढ़ की आशंका जताई है। ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मध्य अमेरिका और कैरिबियाई देशों में शुष्क और गर्म मौसम रहेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे निपटने के लिए दुनिया को तैयारी करनी चाहिए। 

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