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कितने अजीब धार्मिक स्थल, जहां अनोखे ढंग से मांगते हैं मन्नत तो धरती पर मिल जाए जन्नत
बीबीसी हिंदी
Updated Fri, 06 Jul 2018 07:34 PM IST
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भारत में धर्मस्थलों पर मन्नत मांगने का पुराना चलन है। शायद यही वजह है कि अलग-अलग मन्नतों के लिए विशेष धर्मस्थल भी बन गए हैं। पंजाब में एक गुरुद्वारा है, जहां विदेश जाने की चाहत रखने वाले मत्था टेकने आते हैं और खिलौने चढ़़ाते हैं।
Shaheed Baba Nihal Singh Gurudwara
पंजाब के दोआबा इलाके के तल्हान गांव का यह गुरुद्वारा संत बाबा निहाल सिंह शहीदां को समर्पित है। और इस गुरुद्वारे को लेकर मिथक है कि जो व्यक्ति यहां खिलौना जहाज चढ़ाता है, विदेश जाने की उसकी इच्छा पूरी होने की संभावना बढ़ जाती है। इसीलिए गुरुद्वारे के बाहर खिलौने वाली कई दुकानें लगी हुई हैं।
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वीजा मंदिर
हैदराबाद के मेहदीपट्नम से 17 किलोमीटर दूर चिलकुर बालाजी मंदिर को वीजा टेंपल के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर सिर्फ शुक्रवार, शनिवार और इतवार के दिन खुलता है और यहां 70 हजार से एक लाख तक की भीड़ होती है। यहां लोग विदेश जाने के लिए वीजा की मन्नत मांगने आत हैं। अगर किसी की मन्नत पूरी हो गई तो वो मंदिर की 108 परिक्रमा करता है।
हैदराबाद के मेहदीपट्नम से 17 किलोमीटर दूर चिलकुर बालाजी मंदिर को वीजा टेंपल के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर सिर्फ शुक्रवार, शनिवार और इतवार के दिन खुलता है और यहां 70 हजार से एक लाख तक की भीड़ होती है। यहां लोग विदेश जाने के लिए वीजा की मन्नत मांगने आत हैं। अगर किसी की मन्नत पूरी हो गई तो वो मंदिर की 108 परिक्रमा करता है।
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यह हैदराबाद के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है और सरकार जब मंदिरों को अपने नियंत्रण ले रही थी तो चिलकुर खानदान इसके खिलाफ कोर्ट पहुंच गया और मंदिर निजी ही बना रहा। मंदिर में कोई हुंडी या दानपात्र नहीं रखा जाता है। यहां केवल पार्किंग फीस ली जाती है और उसी से मंदिर का पूरा खर्च उठाया जाता है।
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भ्रष्टाचार के खिलाफ
सालों से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे कानपुर के रॉबी शर्मा ने भ्रष्ट तंत्र विनाशक शनि मंदिर नाम से एक शनि मंदिर की स्थापना की है। उनका मानना है की भारत में भ्रष्टचार इतना बढ़ चुका है कि उसे कोई दैवीय शक्ति ही समाप्त कर सकती है।
सालों से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे कानपुर के रॉबी शर्मा ने भ्रष्ट तंत्र विनाशक शनि मंदिर नाम से एक शनि मंदिर की स्थापना की है। उनका मानना है की भारत में भ्रष्टचार इतना बढ़ चुका है कि उसे कोई दैवीय शक्ति ही समाप्त कर सकती है।