आर्थिक सुधारों के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रगति के पथ पर अग्रसर करने वाले मनमोहन सिंह हमें छोड़कर चले गए हैं। पूर्व वित्त मंत्री और दो बार प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह का गुरुवार को 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। जब मनमोहन सिंह ने 1991 में पीवी नरसिम्ह राव की सरकार में वित्त मंत्रालय की बागडोर संभाली थी, तब भारत का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 8.5 प्रतिशत के करीब था, भुगतान संतुलन घाटा बहुत बड़ा था और चालू खाता घाटा भी जीडीपी के 3.5 प्रतिशत के आसपास था। इसके अलावा देश के पास जरूरी आयात के भुगतान के लिए भी केवल दो सप्ताह लायक विदेशी मुद्रा ही मौजूद थी। इससे साफ पता चलता है कि अर्थव्यवस्था बहुत गहरे संकट में थी।
Manmohan Singh: उदारीकरण, RTE से लेकर मनरेगा और आधार तक; आर्थिक सुधारों के जनक ने भारत को 'विकास रथ' पर बिठाया
बिजनेस डायरी, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Fri, 27 Dec 2024 09:25 AM IST
सार
भारत में आर्थिक सुधारों के जनक मनमोहन सिंह का 92 साल की उम्र में गुरुवार रात को निधन हो गया। पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश भर में सात दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। इस दौरान पूरे भारत में राष्ट्र ध्वज आधा झुका रहेगा। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजे गए पत्र में गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा और राष्ट्रीय शोक के दौरान कोई आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रम नहीं होगा।
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