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शिव-पार्वती के पुत्र गणेश को बेहद पसंद हैं ये 5 चीजें, पूजा में रोजाना चढ़ाएं...बरसेगा पैसा ही पैसा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 11 Sep 2018 02:06 PM IST
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13 सितंबर को गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है, पर क्या आप जानते हैं भगवान शिव और माता-पार्वती के इस पुत्र को 5 चीजें बेहद पसंद हैं, जो उन्हें मिल जाएं तो समझो वे खुश हो गए।
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भाद्र पद शुक्ल चतुर्थी तिथि को गणेशोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश जी का जन्म हुआ था। पंचदेवताओं में गणेश जी का प्रथम स्थान है। भगवान गणेश की पूजा दोपहर में की जाती है। चतुर्थी तिथि को स्वाती नक्षत के साथ रवि योग है। इसके कारण मारूत नामक योग भी बन रहा है। मारूत योग 12 सितंबर रात दो बजकर 4 मिनट से प्रारंभ होकर 13 सितंबर को रात एक बजकर सात मिनट तक चलेगा। इसलिए इस वर्ष भगवान गणेश जी जन्मोत्सव मारूत योग में होने के कारण विद्या बुद्धि, सुख शांति और समृद्धि बनी रहेगी।
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सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र कहते हैं कि चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 12 सितंबर को दिन बुधवार को शाम चार बजकर सात मिनट पर हो रहा है। यह 13 सितंबर दिन वीरवार को दोपहर बाद 2 बजकर 52 मिनट पर समाप्त हो रहा है। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:27 से दोपहर बाद 12:27 बजे तक सबसे बेहतर है। उसके बाद भी पूजा की जा सकती है। इसके बाद डेढ़ बजे तक का समय मध्यम है। दो बजकर 52 मिनट पर चतुर्थी की समाप्ति के कारण पूजा नहीं हो सकती।
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बीरेंद्र नारायण मिश्र कहते हैं कि भगवान गणेश को लंबोदर भी कहा जाता है। उन्हें मोदक बेहद पसंद हैं, इन्हें खाए बिना वे रहते नहीं थे। इसलिए हो सके तो उनकी पूजा में मोदक जरूर शामिल करें, इन्हें देखते ही वे खुश हो जाते हैं। गणेश को दूब घास भी काफी पसंद है। इसलिए पूजा करते वक्त ताजा दूब तोड़कर ले जाएं और अर्पित करें। गणेश को गेंदे के फूल काफी अच्छे लगते हैं। इसलिए भक्तजन जब भी मूर्ति स्थापना करें तो उस पर गेंदे के फूल की माला जरूर चढ़ाएं।
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गणेश
पुजारी जी ने बताया कि भगवान गणेश को केला बहुत भाता है, इसलिए उन्हें केला जरूर अर्पित करें, लेकिन ध्यान रहें कि केला जोड़े में चढ़ाया जाए। अकेला केला काफी पूर्ण नहीं होता। गणेश जी के एक हाथ में शंख हमेशा रहता है। इसलिए गणेश पूजा करते समय शंख जरूर बजाना चाहिए। राहु काल में पूजा नहीं करनी चाहिए। रात को चन्द्र-दर्शन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि अनजाने में यदि कोई व्यक्ति चतुर्थी की रात में चंद्रमा को देख ले तो उसे झूठा-कलंक झेलना पड़ता है। इसीलिए इस दिन चन्द्रदेव को अर्घ्य देना चाहिए लेकिन उनकी ओर देखना नहीं चाहिए।