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Chhattisgarh: गौ-मूत्र खरीदने वाला पहला राज्य बना छत्तीसगढ़, सीएम भूपेश ने बेचा 20 रुपये में पांच लीटर गौ-मूत्र

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Fri, 29 Jul 2022 04:49 PM IST
सीएम भूपेश ने बेचा 20 रुपये में पांच लीटर गौ-मूत्र
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छत्तीसगढ़ में आज से गौ-मूत्र की खरीदी की ऐतिहासिक की शुरुआत कर दी गई। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सीएम हाउस कार्यालय में धूम-धाम से आयोजित हरेली पर्व के अवसर पर इसे शुरू किया है। सीएम बघेल ने अपनी ही गौशाला से लाया हुआ 5 लीटर गोमूत्र चंदखुरी की निधि स्वयं सहायता समूह को बेचा। वे 5 लीटर गौ-मूत्र 20 रुपये में बेचकर राज्य के पहले विक्रेता बने। निधि स्व-सहायता समूह ने गौ-मूत्र विक्रय की यह राशि भूपेश बघेल के आग्रह पर मुख्यमंत्री सहायता कोष के खाते में जमा की। 

बता दें कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जो पशुपालक ग्रामीणों से दो रुपये किलो में गोबर खरीदी के बाद अब 4 रुपये लीटर में गौ-मूत्र की खरीदी कर रहा है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर राज्य के जैविक खाद उत्पादक 7442 महिला स्व-सहायता समूहों को 17 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन (बोनस) राशि का भी वितरण किया। सीएम ने कहा कि गोधन न्याय योजना के बहुआयामी परिणामों को देखते हुए देश के अनेक राज्य इसको अपनाने लगे हैं। इस योजना के तहत अमीर हो या गरीब सभी दो रुपये किलो में गौठानों में गोबर बेच रहे हैं। बीते दो सालो में गोधन न्याय योजना के माध्यम से गोबर विक्रेताओं, गौठान समितियों और महिला समूहों के खाते में 300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित हुई है। जैविक खाद और जैविक कीटनाशक का खेती में उपयोग करने से खेती की लागत में कमी आएगी। खाद्यान्न की गुणवत्ता बेहतर होगी, जिससे जन-जीवन का स्वास्थ्य बेहतर होगा। 
 
मुख्यमंत्री ने समूह के रजिस्टर में अपना नाम पता भी दर्ज कराया
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सीएम बघेल ने वीडियो ट्विट कर लिखा, ''आज हरेली पर्व के शुभ अवसर पर हमने राज्य में गौ-मूत्र खरीदी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर चंदखुरी की निधि स्व-सहायता समूह को 5 लीटर गौ-मूत्र बेचकर मैं पहला विक्रेता बना और मुझे 20 रुपये की आय प्राप्त हुई। गौ-मूत्र की खरीदी करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है।''




उल्लेखनीय है कि गोधन न्याय योजना की शुरुआत छत्तीसगढ़ में आज से 2 साल पहले 20 जुलाई 2020 को हरेली पर्व के दिन से हुई थी। इसके तहत गौठनों में पशुपालक ग्रामीणों से 2 रुपये किलो की दर से गोबर की खरीदी की जा रही है। देश- दुनिया में गोबर की खरीदी की गोधन न्याय योजना की बेजोड़ सफलता ही गौ-मूत्र की खरीदी का आधार बनी है। गोबर खरीदी के जरिए बड़े पैमाने पर जैविक खाद का निर्माण और उसके उपयोग के उत्साहजनक परिणामों को देखते हुए अब गोमूत्र की खरीदी कर इससे कीट नियंत्रक उत्पाद, जीवामृत, ग्रोथ प्रमोटर बनाए जाएंगे। इसके पीछे मकसद यह भी है कि खाद्यान्न उत्पादन की विषाक्तता को कम करने के साथ ही खेती की लागत को भी कम किया जा सके। 
 
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गौ मूत्र बेचने के बाद भुगतान लेते सीएम भूपेश बघेल।
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कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि गोमूत्र कीटनाशक, रासायनिक कीटनाशक का बेहतर और सस्ता विकल्प है। इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता, रासायनिक कीटनाशक से कई गुना अधिक होती है। खेतों में इसके छिड़काव से सभी प्रकार के कीटों के नियंत्रण में मदद मिलती है। पत्ती खाने वाले ,फल छेदन एवं तना छेदक कीटों के प्रति गोमूत्र कीटनाशक का उपयोग ज्यादा प्रभाव कारी है। इसका उपयोग कृषि- पर्यावरण एवं स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर है।

मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित हरेली पर्व के कार्यक्रम में गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेंड़िया, संसदीय सचिव चिंतामणि महाराज, चन्द्रदेव राय, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत राजेश्री राम सुंदर दास, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक, राज्य खाद्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल,छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री गिरीश देवांगन, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा,  विधायक सतनारायण शर्मा, पूर्व सांसद छाया वर्मा, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह सहित बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।

 
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