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आठवीं बार एशिया कप जीतकर भी भारत की चिंता क्यों बढ़ी?: मध्यक्रम की खामोशी ने छोड़े सवाल; फील्डिंग भी कठघरे में
Tue, 15 Sep 2026 12:34 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Tue, 15 Sep 2026 12:34 PM IST
सार
भारत ने श्रीलंका को 72 रन से हराकर आठवीं बार महिला एशिया कप का खिताब जीता और पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहा। शेफाली वर्मा ने बल्ले और गेंद दोनों से शानदार प्रदर्शन किया, जबकि नंदनी शर्मा और प्रेमा रावत ने प्रभावित किया। हालांकि मध्यक्रम की कमजोरी और 14 कैच छोड़ना भारत के लिए चिंता का विषय रहा।
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भारतीय महिला क्रिकेट टीम का एनालिसिस
- फोटो : IANS
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भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने श्रीलंका को हराकर आठवीं बार एशिया कप जीत लिया। टीम पूरे टूर्नामेंट में अजेय रही। गेंदबाजी और शीर्ष क्रम की बल्लेबाजी ने भारत की नैया पार लगाई, लेकिन टूर्नामेंट में कुछ विभाग ऐसे भी रहे, जिनका प्रदर्शन सवालों के कठघरे में है। भारतीय टीम को आगे एशियाई खेलों में हिस्सा लेना है, जहां ज्यादातर टीमें वही होंगी, जो एशिया कप में खेलीं, लेकिन क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है और एक गलती भी भारी पड़ सकती है।
शेफाली वर्मा
- फोटो : BCCI Women
शेफाली का बदला हुआ अंदाज
शेफाली के खेल में इस बार सिर्फ आक्रामकता नहीं थी, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों से निकलने की क्षमता भी नजर आई। पहले वह कई बार पारी की शुरुआत में मुश्किल दौर के बाद अपना विकेट गंवा देती थीं, लेकिन इस टूर्नामेंट में उन्होंने धैर्य के साथ अपनी पारी को आगे बढ़ाया। उन्होंने तीन अर्धशतक लगाए, जिसमें सेमीफाइनल और फाइनल के अर्धशतक भी शामिल रहे। वह अपना पहला टी20 अंतरराष्ट्रीय शतक नहीं लगा सकीं, लेकिन लगातार आक्रामक बल्लेबाजी करने वाली शेफाली का यह रूप भारत के लिए बड़ी राहत है।
कप्तान हरमनप्रीत कौर ने भी फाइनल के बाद उनकी तारीफ करते हुए कहा कि शेफाली को जिम्मेदारी लेते हुए देखना अच्छा था। इतना ही नहीं, शेफाली ने गेंद से भी नियमित योगदान दिया। इससे भारत के पास शीर्ष क्रम में कम से कम एक ऐसी बल्लेबाज मौजूद है, जो जरूरत पड़ने पर गेंदबाजी भी कर सकती है।
शेफाली के खेल में इस बार सिर्फ आक्रामकता नहीं थी, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों से निकलने की क्षमता भी नजर आई। पहले वह कई बार पारी की शुरुआत में मुश्किल दौर के बाद अपना विकेट गंवा देती थीं, लेकिन इस टूर्नामेंट में उन्होंने धैर्य के साथ अपनी पारी को आगे बढ़ाया। उन्होंने तीन अर्धशतक लगाए, जिसमें सेमीफाइनल और फाइनल के अर्धशतक भी शामिल रहे। वह अपना पहला टी20 अंतरराष्ट्रीय शतक नहीं लगा सकीं, लेकिन लगातार आक्रामक बल्लेबाजी करने वाली शेफाली का यह रूप भारत के लिए बड़ी राहत है।
कप्तान हरमनप्रीत कौर ने भी फाइनल के बाद उनकी तारीफ करते हुए कहा कि शेफाली को जिम्मेदारी लेते हुए देखना अच्छा था। इतना ही नहीं, शेफाली ने गेंद से भी नियमित योगदान दिया। इससे भारत के पास शीर्ष क्रम में कम से कम एक ऐसी बल्लेबाज मौजूद है, जो जरूरत पड़ने पर गेंदबाजी भी कर सकती है।
नंदिनी
- फोटो : IANS
नंदनी और प्रेमा रावत ने बढ़ाया भरोसा
नंदनी शर्मा और प्रेमा रावत ने अपने पहले पूरे टूर्नामेंट में जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसने भारतीय टीम को भविष्य के लिए दो अहम विकल्प दिए हैं। नंदनी ने पावरप्ले में क्रांति गौड़ के साथ मिलकर विपक्षी बल्लेबाजों पर दबाव बनाया। उन्होंने सात विकेट लिए, जो टूर्नामेंट में किसी तेज गेंदबाज के लिए तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। पाकिस्तान की फातिमा सना ने नौ और बांग्लादेश की मरुफा अख्तर ने आठ विकेट लिए।
नंदनी की खासियत उनकी किफायती गेंदबाजी रही। उनका इकॉनमी रेट 4.64 रहा, जो फातिमा सना के 6.14 और मरुफा अख्तर के 5.06 से बेहतर था। फील्डिंग में भी उन्होंने प्रभावित किया और फाइनल में दो शानदार डाइविंग कैच पकड़े। वहीं प्रेमा रावत ने अपनी लेग स्पिन से बल्लेबाजों को परेशान किया। गेंद को अंदर लाने और बाहर निकालने की उनकी क्षमता ने दबाव बनाया। सात विकेट लेने वाली रावत ने पाकिस्तान के खिलाफ तीन विकेट लेकर उनकी पारी की कमर तोड़ दी। हालांकि भारत के गेंदबाजी आक्रमण की असली परीक्षा अभी बाकी है। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में एक ही गेंदबाजी आक्रमण के साथ खेला, जिसके कारण रेणुका सिंह, अरुंधति रेड्डी और राधा यादव को मौका नहीं मिला।
नंदनी शर्मा और प्रेमा रावत ने अपने पहले पूरे टूर्नामेंट में जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसने भारतीय टीम को भविष्य के लिए दो अहम विकल्प दिए हैं। नंदनी ने पावरप्ले में क्रांति गौड़ के साथ मिलकर विपक्षी बल्लेबाजों पर दबाव बनाया। उन्होंने सात विकेट लिए, जो टूर्नामेंट में किसी तेज गेंदबाज के लिए तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। पाकिस्तान की फातिमा सना ने नौ और बांग्लादेश की मरुफा अख्तर ने आठ विकेट लिए।
नंदनी की खासियत उनकी किफायती गेंदबाजी रही। उनका इकॉनमी रेट 4.64 रहा, जो फातिमा सना के 6.14 और मरुफा अख्तर के 5.06 से बेहतर था। फील्डिंग में भी उन्होंने प्रभावित किया और फाइनल में दो शानदार डाइविंग कैच पकड़े। वहीं प्रेमा रावत ने अपनी लेग स्पिन से बल्लेबाजों को परेशान किया। गेंद को अंदर लाने और बाहर निकालने की उनकी क्षमता ने दबाव बनाया। सात विकेट लेने वाली रावत ने पाकिस्तान के खिलाफ तीन विकेट लेकर उनकी पारी की कमर तोड़ दी। हालांकि भारत के गेंदबाजी आक्रमण की असली परीक्षा अभी बाकी है। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में एक ही गेंदबाजी आक्रमण के साथ खेला, जिसके कारण रेणुका सिंह, अरुंधति रेड्डी और राधा यादव को मौका नहीं मिला।
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प्रतिका रावल
- फोटो : BCCI Women
मध्यक्रम ने बार-बार किया निराश
भारत की सबसे बड़ी कमजोरी पूरे टूर्नामेंट में मध्यक्रम रहा। थाईलैंड के खिलाफ टीम 91/1 से 137/9 तक पहुंच गई। यानी 46 रन के अंदर आठ विकेट गिर गए। हॉन्गकॉन्ग के खिलाफ स्मृति मंधाना ने 193.75 के स्ट्राइक रेट से 124 रन बनाए, लेकिन नंबर तीन से सात तक के बल्लेबाजों ने मिलकर 39 गेंदों में सिर्फ 34 रन बनाए। फाइनल में भी यही कहानी दोहराई गई। भारत 13वें ओवर में बिना विकेट 129 रन पर था, लेकिन 19वें ओवर तक स्कोर पांच विकेट पर 167 रन हो गया। यानी सिर्फ 38 रन के अंदर पांच विकेट गंवाए।
पूरे टूर्नामेंट में भारत के नंबर तीन से सात तक के बल्लेबाजों का औसत सिर्फ 15.25 रहा। जेमिमा रोड्रिग्स की हैमस्ट्रिंग चोट के कारण अनुपस्थिति ने भी इस कमजोरी को बढ़ाया। उनकी जगह आईं प्रतिका रावल ने चार मैचों में 56 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 98.24 रहा। फाइनल में जी कमलिनी को उनकी जगह मौका मिला, जिन्होंने सातवें नंबर पर पांच गेंदों में 15 रन बनाए।
भारत की सबसे बड़ी कमजोरी पूरे टूर्नामेंट में मध्यक्रम रहा। थाईलैंड के खिलाफ टीम 91/1 से 137/9 तक पहुंच गई। यानी 46 रन के अंदर आठ विकेट गिर गए। हॉन्गकॉन्ग के खिलाफ स्मृति मंधाना ने 193.75 के स्ट्राइक रेट से 124 रन बनाए, लेकिन नंबर तीन से सात तक के बल्लेबाजों ने मिलकर 39 गेंदों में सिर्फ 34 रन बनाए। फाइनल में भी यही कहानी दोहराई गई। भारत 13वें ओवर में बिना विकेट 129 रन पर था, लेकिन 19वें ओवर तक स्कोर पांच विकेट पर 167 रन हो गया। यानी सिर्फ 38 रन के अंदर पांच विकेट गंवाए।
पूरे टूर्नामेंट में भारत के नंबर तीन से सात तक के बल्लेबाजों का औसत सिर्फ 15.25 रहा। जेमिमा रोड्रिग्स की हैमस्ट्रिंग चोट के कारण अनुपस्थिति ने भी इस कमजोरी को बढ़ाया। उनकी जगह आईं प्रतिका रावल ने चार मैचों में 56 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 98.24 रहा। फाइनल में जी कमलिनी को उनकी जगह मौका मिला, जिन्होंने सातवें नंबर पर पांच गेंदों में 15 रन बनाए।
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हरमनप्रीत कौर
- फोटो : BCCI Women
बीच के ओवरों में भी भारत की रफ्तार गिरी
स्पिन के लिए मददगार पिचों पर भारत का मध्यक्रम तेजी से रन बनाने में संघर्ष करता दिखा। सातवें से 11वें ओवर के बीच भारत का स्ट्राइक रेट 129.41 था, लेकिन 12वें से 16वें ओवर के बीच यह घटकर 120 हो गया। इसके मुकाबले श्रीलंका, बांग्लादेश और यहां तक कि थाईलैंड ने इन ओवरों में अपनी रन गति बढ़ाई। अनुभवी हरमनप्रीत कौर भी टूर्नामेंट में 91.02 के स्ट्राइक रेट से ही रन बना सकीं। सेमीफाइनल में उन्होंने 28 गेंदों पर नाबाद 24 रन बनाए।
इससे भारती फुलमली की भूमिका पर भी सवाल उठे। उन्हें डब्ल्यूपीएल में सफल प्रदर्शन के बाद फिनिशर के तौर पर टीम में लाया गया था, लेकिन एशिया कप में उन्हें सिर्फ दो बार बल्लेबाजी का मौका मिला। सेमीफाइनल के 19वें और फाइनल के 17वें ओवर में विकेट गिरने के बावजूद उनके ऊपर दीप्ति शर्मा को बल्लेबाजी के लिए भेजा गया।
महिला एशिया कप: हर टीम के मध्यक्रम का हाल
स्पिन के लिए मददगार पिचों पर भारत का मध्यक्रम तेजी से रन बनाने में संघर्ष करता दिखा। सातवें से 11वें ओवर के बीच भारत का स्ट्राइक रेट 129.41 था, लेकिन 12वें से 16वें ओवर के बीच यह घटकर 120 हो गया। इसके मुकाबले श्रीलंका, बांग्लादेश और यहां तक कि थाईलैंड ने इन ओवरों में अपनी रन गति बढ़ाई। अनुभवी हरमनप्रीत कौर भी टूर्नामेंट में 91.02 के स्ट्राइक रेट से ही रन बना सकीं। सेमीफाइनल में उन्होंने 28 गेंदों पर नाबाद 24 रन बनाए।
इससे भारती फुलमली की भूमिका पर भी सवाल उठे। उन्हें डब्ल्यूपीएल में सफल प्रदर्शन के बाद फिनिशर के तौर पर टीम में लाया गया था, लेकिन एशिया कप में उन्हें सिर्फ दो बार बल्लेबाजी का मौका मिला। सेमीफाइनल के 19वें और फाइनल के 17वें ओवर में विकेट गिरने के बावजूद उनके ऊपर दीप्ति शर्मा को बल्लेबाजी के लिए भेजा गया।
महिला एशिया कप: हर टीम के मध्यक्रम का हाल
| टीम | ओवर 7-11
स्ट्राइक रेट |
ओवर 12-16
स्ट्राइक रेट |
बदलाव |
|---|---|---|---|
| भारत | 129.41 | 120.00 | -9.41 |
| श्रीलंका | 99.23 | 103.33 | +4.10 |
| पाकिस्तान | 84.16 | 72.72 | -11.44 |
| बांग्लादेश | 84.16 | 96.66 | +12.50 |
| यूएई | 75.55 | 82.19 | +6.64 |
| हॉन्गकॉन्ग | 62.22 | 80.00 | +17.78 |
| थाईलैंड | 40.00 | 82.22 | +42.22 |
| इंडोनेशिया | 37.77 | 41.11 | +3.34 |