शनिवार, 1 फरवरी 2020 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश का बजट पेश किया। इसमें वित्त मंत्री ने देश के पांच ऐतिहासिक पुरातत्विक स्थलों का जिक्र किया। घोषणा की कि इन पांच जगहों को सरकार 'आइकॉनिक साइट' के रूप में विकसित करेगी।
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Budget 2020: जानें भारत की उन पांच ऐतिहासिक जगहों को, जिन्हें 'आइकॉनिक' बनाएगी सरकार
Sun, 02 Feb 2020 02:42 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया
Updated Sun, 02 Feb 2020 02:42 PM IST
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File Photo
- फोटो : archaeology.wiki
राखीगढ़ी
- फोटो : Social Media
राखीगढ़ी (Rakhigarhi)
- हरियाणा के हिसार जिले में स्थित राखीगढ़ी हड़प्पा संस्कृति के सबसे बड़े व प्रमुख स्थलों में से एक है।
- साल 2013 से 2016 के बीच भारतीय और दक्षिण कोरियाई शोधकर्ताओं ने मिलकर राखीगढ़ी के एक कब्रिस्तान में कई जगहों पर खुदाई की। इसमें 62 कब्र मिले थे। इनमें से एक कब्र में एक जोड़े के कंकाल मिले जो विपरीत लिंग (स्त्री व पुरुष) के थे।
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हस्तिनापुर
- फोटो : Wiki
हस्तिनापुर (Hastinapur)
- उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित है हस्तिनापुर। इस जगह का जिक्र महाभारत व पुराणों में किया गया है।
- यहां आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के सुपरिटेंडेंट डॉ. बीबी लाल की अगुवाई में खुदाई कराई गई थी। यहां खोजी गईं चीजों में सबसे अहम है नया मृतिका उद्योग (new ceramic industry), जिसे पेंटेड ग्रे वेयर नाम दिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, ये शुरुआती दौर के भारतीय-आर्यों के अवशेषों को दर्शाते हैं।
- डॉ. लाल ने इस विषय पर अपने प्रकाशित शोधपत्र में लिखा है कि 'हस्तिनापुर, मथुरा, कुरुक्षेत्र, आदि की कई ऐसी जगहें हैं जिन्हें महाभारत में भी उसी नाम से जाना जाता था।'
सिवसागर
- फोटो : Wiki
सिवसागर (Sivasagar)
- सिवसागर में करेंघर में 2000 और 2003 के बीच हुईं खुदाइयों में उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व के ढांचे दफन मिलते हैं। मिट्टी के बर्तन, कटोरे, टेराकोटा की बनी स्मोकिंग पाइप भी पाए गए हैं।
- सिवसागर में ही गढ़गांव राजा के महल में भी 2007-08 के बीच खुदाई की गई थी। उसमें उत्तर-दक्षिण दिशा में जली हुई ईंटों की दीवार और लकड़ी के दो बड़े गोलाकार पोस्ट मिले।
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धोलावीरा
- फोटो : Social Media
धोलावीरा (Dholavira)
- गुजरात में कच्छ प्रदेश के उतरीय विभाग खडीर में धोलावीरा गांव के पास पांच हजार साल पहले विश्व का यह प्राचीन महानगर था। राखीगढ़ी की ही तरह।
- धोलावीरा अलग व खास है क्योंकि यहां पानी और इसके संरक्षण की पूरी प्रणाली के अवशेष पाए गए। विशेषज्ञ बताते हैं कि यहां जो लोग हड़प्पा सभ्यता के समय करीब 1200 साल तक रहे, वे बारिश के पानी के संरक्षण की विधियों के लिए जाने जाते थे।
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