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Problem Solving: गणित को नए अंदाज में सीखिए, जीवन की घटनाओं से जोड़िए; हर समस्या को बनाइए सरल

जो बोआलर प्रोफेसर, स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन Published by: Shahin Praveen Updated Fri, 10 Apr 2026 10:25 AM IST
सार

Easy Math: गणित को नए अंदाज में सीखिए, रोजमर्रा की समस्याओं को घटनाओं से जोड़कर सुलझाते हैं। ठीक उसी तरह गणित के सवालों को भी जीवन से जोड़कर समझा जाए तो वे आसान हो जाते हैं और उन्हें हल करना भी सरल लगने लगता है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

Problem Solving: गणित को केवल सूत्रों और जटिल हल याद करने तक सीमित रखने से कई छात्रों में डर पैदा हो जाता है और वे इसके - वास्तविक उपयोग को समझ नहीं पाते। इसलिए 'मैथ-ईश थिंकिंग' (Math-ish Thinking) पद्धति को अपनाना जरूरी है, जिसमें सवालों को व्यावहारिक तरीके से समझने पर जोर दिया जाता है, न कि सही उत्तर पाने पर। इससे गणित आसान, रोचक और रोजमर्रा की जिंदगी में उपयोगी लगने लगता है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

मैथ-ईश की अवधारणा

पारंपरिक पढ़ाई में गणित के प्रश्नों के बिल्कुल सटीक उत्तर पर जोर दिया जाता है, जबकि 'मैथ-ईश' सोच अनुमान पर आधारित होती है। इसमें हर बार परफेक्ट उत्तर देना जरूरी नहीं होता, बल्कि स्थिति के अनुसार अंदाजा लगाना होता है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

क्या हैं मायने

यह तरीका आपको यह समझने में मदद करता है कि जिन नियमों और सूत्रों का आप उपयोग कर रहे हैं, वे वास्तव में आपको समझ में आ रहे हैं या नहीं। यह पद्धति केवल सही उत्तर पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आपकी सोच और समझ को व्यापक बनाने पर जोर देती है। उदाहरण के तौर पर, किसी जगह तक पहुंचने का समय हम अक्सर सटीक नहीं, बल्कि अनुमान के आधार पर तय करते हैं-जैसे लगभग पांच घंटे तीस मिनट। इस तरह की सोच गणित को सिर्फ परीक्षा तक नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी उपयोगी बनाती है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

प्रयास के बजाय अनुमान

हर बार बिल्कुल सटीक उत्तर निकालने पर ध्यान देने के बजाय, पहले अनुमान लगाकर सोचने की आदत ज्यादा उपयोगी होती है। इससे आप यह समझ पाते हैं कि सही उत्तर किस दायरे में होगा और उसी आधार पर जल्दी व सही निर्णय ले सकते हैं। खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं या समय-सीमित परिस्थितियों में यह तरीका बेहद मददगार साबित होता है, क्योंकि आप कई गलत विकल्पों को तुरंत हटा सकते हैं। उदाहरण के लिए, जब आपसे दो भिन्नों को जोड़ने के लिए कहा जाता है, तो सीधे लंबी गणना करने के बजाय आप पहले ही उनका अनुमान लगा सकते हैं कि उत्तर लगभग कितना होगा।

  • गणित में केवल नियम याद करना नहीं, बल्कि उनके पीछे का कारण समझना जरूरी है।
  • मैथ-ईश थिंकिंग गणित को रटने के बजाय समझने पर जोर देती है।
  • इससे भिन्नों और अन्य अवधारणाओं को वास्तविक जीवन से जोड़ना आसान हो जाता है।
  • यह सोच गणित को सरल, उपयोगी और रोजमर्रा की जिंदगी में लागू करने योग्य बनाती है।
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'क्यों' की तलाश

गणित में केवल नियम याद करना ही काफी नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि हम उन्हें क्यों अपनाते हैं। 'मैथ-इंश थिंकिंग' इसी समझ पर जोर देती है, जिससे आप भिन्नों और अन्य अवधारणाओं को वास्तविक जीवन से जोड़कर आसानी से समझ पाते हैं। इससे गणित रटने वाला विषय नहीं रहता, बल्कि समझने और इस्तेमाल करने का कौशल बन जाता है। साथ ही, आप इस पद्धति को रोजमर्रा की जिंदगी में सहजता से लागू कर पाते हैं, जिससे यह विषय अधिक सरल और रोचक लगता है।

- द कन्वर्सेशन

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