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स्वेज नहर : हर घंटे 2900 करोड़ रुपये का नुकसान, भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रास्ता?

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: वर्तिका तोलानी Updated Wed, 31 Mar 2021 01:46 PM IST
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Suez Canal : Know the history and commercial use of this canal
स्वेज नहर - फोटो : अमर उजाला

मिस्र की स्वेज नहर में करीब एक हफ्ते से फंसे ताइवान के विशाल जहाज, ‘एवरगिवन’ को बड़ी मशक्कत के बाद रविवार को निकाला गया। साथ ही जांच पूरी होने तक जहाज के 25 क्रू सदस्यों को घर में ही नजरबंद कर दिया गया है। अब यह देखना है कि स्वेज नहर प्राधिकरण इनके खिलाफ क्या कार्रवाई करेगा। स्वेज नहर पर सैकड़ों जहाज इस कृत्रिम समुद्र-स्तरीय जलमार्ग से गुजरने का इंतजार कर रहे हैं।  

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो वैश्विक शिपिंग पर पड़े असर के कारण हर घंटे 2900 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है और इसके असर को खत्म होने में हफ्तों या महीनों का वक्त लग सकता है। लेकिन क्या आपको पता है कि यह विश्व की सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली शिपिंग लेन में से एक है। दुनिया के कुल व्यापार का 12% से अधिक हिस्से का आवागमन इस मार्ग से होता है। जानिए इसका वाणिज्यिक उपयोग…

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एवरगिवन जहाज - फोटो : पीटीआई

स्वेज नहर से सालाना 200 अरब डॉलर का व्यापार करता है भारत

11,600 किमी लंबी स्वेज नहर, उत्तर से दक्षिण की ओर बहते हुए भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ती है। स्वेज नहर प्राधिकरण के आंकड़ो के मुताबिक, वर्ष 2020 में इस नहर के माध्यम से तकरीबन 19000 जहाजों यानी प्रतिदिन लगभग 51.5 जहाजों पर औसतन 1.17 बिलियन टन माल ले जाया गया था। भारत को यूरोप, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका के साथ जोड़ने वाला यह सबसे छोटा समुद्री मार्ग है। जिसके माध्यम से भारत, सालाना 200 अरब डॉलर का व्यापार करता है। वहीं अफ्रीकी देशों ने वर्ष 2020 में इस नहर के माध्यम से 5.61 बिलियन अमेरिकी डॉलर (37,855 करोड़ रुपये) का राजस्व प्राप्त किया था।  इतना ही नहीं यह नहर मिस्र की अर्थव्यवस्था के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है इसलिए 2015 में मिस्र ने इसके विस्तार की योजना बनाई थी। इस योजना का मकसद वर्ष 2023 तक नहर का उपयोग करने वाले जहाजों की संख्या को दोगुना करना है। 

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एवरगिवन जहाज - फोटो : पीटीआई

1967 में 8 साल के लिए बंद हो गया था स्वेज नहर का रास्ता

5 जून 1967 काे इस्राइल ने मिस्र पर बमबारी कर दी थी। उस वक्त बुल्गारिया, चेकोस्लोवाकिया, फ्रांस, ब्रिटेन, पोलैंड, स्वीडन, पश्चिमी जर्मनी और अमेरिका के 15 जहाज स्वेज नहर से गुजर रहे थे। इस्राइल की बमबारी में एक जहाज डूब गया और अन्य जहाजों ने ग्रेट बिटर झील में पनाह ले ली। इस्राइल स्वेज का उपयोग न कर सके, इसलिए मिस्र ने नहर के आखिरी सिरे पर जहाजों को डुबो दिया। दस जून को ये जंग खत्म हो गई। लेकिन मिस्र ने उसके बाद भी 8 सालों तक स्वेज नहर का रास्ता बंद रखा। इसके अलावा साल 2004, 2006 और 2017 में जहाजों के फंसने के कारण भी यह मार्ग कुछ दिनों के लिए बंद हुआ था।

यह भी पढ़ें - एमवी एवर गिवेन: स्वेज नहर में कैसे अटका विशालकाय जहाज, जानें इसके फंसने से लेकर निकलने तक की कहानी

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