{"_id":"5a2a382f4f1c1b3c3d8bc476","slug":"dharmendra-had-gone-in-depression-after-unsuccessful-in-film-industry-of-bobby-deol","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"छोटे बेटे की असफलता से डिप्रेशन में चले गए थे धर्मेंद्र, सलमान ने दी गुड न्यूज","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
छोटे बेटे की असफलता से डिप्रेशन में चले गए थे धर्मेंद्र, सलमान ने दी गुड न्यूज
टीम डिजिटल, अमर उजाला
Updated Fri, 08 Dec 2017 12:28 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अभिनेता धर्मेंद्र के परिवार के अधिकांश सदस्य फिल्म इंडस्ट्री में उतरे और कामयाब हुए, लेकिन एक समय ऐसा भी आया, जब छोटे बेटे की लगातार असफल होती फिल्मों के चलते धर्मेंद्र डिप्रेशन में चले गए थे। खुद भी लगातार फिल्में बनाकर बेटों को स्टैंड करने की कोशिश की, लेकिन ज्यादा कुछ न हुआ। आखिरकार सलमान ने गुड न्यूज दी।
बात हो रही है धर्मेंद्र के छोटे बेटे बॉबी देयोल की। बॉबी देओल मुंह में चांदी की चम्मच लेकर पैदा हुए। धर्मेंद के सितारे उस समय बुलंदियों की तरफ बढ़ रहे थे, जब नन्हें बॉबी उनके घर हुए। वो बचपन में धर्मेंद्र के बेहद चहेते थे। इसका एक नमूना तब देखना को मिला, जब 1977 में आई फिल्म 'धर्मवीर' में 10 साल के बॉबी को धर्मेंद्र के बेटे का रोल मिला। धर्मेंद्र ने बड़े बेटे सनी की जगह बॉबी को लिया। इस तरह उनका करियर शुरु हुआ।
इसके बाद बॉबी ने 'बरसात' से बतौर हीरो फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री मारी। किसी भी बड़े सितारे का बेटा जब फिल्मों में आता है, तो सबकी निगाहें होती हैं। बॉबी की तरफ भी सबकी निगाहें थी। 1995 में आई 'बरसात' के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट डेब्यू अवार्ज मिला। बॉबी का करियर चल निकला। 1997 में 'गुप्त' और 1998 में 'सोल्जर' के हिट होने के बाद बॉबी ऐसे स्टार हो गए जिसके साथ हर निर्माता काम करना चाहता था। ये वो समय था जब उनके बड़े भाई सनी देओल बड़े स्टार हुआ करते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
सनी के एक्शन हीरो के तौर पर 90 के दशक में बड़े चर्चे थे। लेकिन शायद सनी भी नहीं जानते थे, कि उनका ही भाई उनको टक्कर देने आ रहा है। पापा धर्मेंद्र और भाई सनी अपने एक्शन के लिए पहचान जाते रहे तो फिर भला बॉबी ही कहां पीछे रहने वाले थे। 'बादल'(1999) और 'बिच्छू'(2000) ने बॉबी ने एक्शन का डंका बजवा दिया। सनी देओल का करियर अब ढलान की तरफ था, ऐसे में बॉबी ने दिखा दिया कि देओल परिवार का एक्शन पर अधिकार बना रहेगा।
विज्ञापन
बुरा वक्त भला किसको बताकर आता है? बॉबी देओल को सनी के वारिस की तरह फिल्मी पंडित देख रहे थे, लेकिन बॉबी का करियर सनी से पहले ढलने लगा। बॉबी को फिल्में तो मिलती रहीं, लेकिन कामयाबी उनसे बचकर निकलती रही। उनको फिल्में देने से निर्माता बचने लगे। जिस घर के सामने निर्देशकों और निर्माताओं की लाइन लगी रहती थी, लेकिन वक्त बदला तो दोनों भाइयों के पास फिल्मों के नाम पर कुछ नहीं रहा।