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जन्मदिन: बिजनेस में घाटा होने के बाद आत्महत्या करना चाहते थे कैलाश खेर, आज करोड़ों के मालिक

Wed, 07 Jul 2021 07:12 AM IST
स्वाति सिंह एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: स्वाति सिंह Updated Wed, 07 Jul 2021 07:12 AM IST
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Kailash Kher on his suicide attempt here Unknown Facts About Kailash Kher
कैलाश खेर - फोटो : सोशल मीडिया

'तेरी दीवानी' और 'सैंया' जैसे रूहानी गाने गा कर यूथ के दिलों पर राज करने वाले कैलाश खेर 7 जुलाई को अपना जन्मदिन मनाते हैं। आज कैलाश खेर जिस मुकाम पर हैं वहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की है। छोटी सी उम्र में कैलाश खेर ने अपना घर छोड़ दिया था। उस वक्त उनकी उम्र 13 साल थी। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के रहने वाले कैलाश का मन बचपन से ही संगीत में रमा हुआ था। छोटी उम्र में ही उन्होंने संगीत में महारथ हासिल कर ली थी। इसके बाद उन्होंने काफी संघर्ष किया, इतना ही नहीं उन्होंने बच्चों को संगीत भी सिखाया, म्यूजिक ट्यूशन देना भी शुरू किया। उनके पिता कश्मीरी पंडित थे और लोक गीतों में भी रुचि रखते थे। कैलाश को भी संगीत जा जूनून बचपन से ही चढ़ गया था।



कैलाश ने 4 साल की उम्र से गाना शुरु कर दिया। उनका ये टैलेंट देख कर न ही सिर्फ उनके परिवार वाले बल्कि दोस्त-रिश्तेदार सभी मंत्रमुग्ध थे। बचपन में अपनी आवाज से सबका मन मोह लेने वाले कैलाश के लिए आगे की राह आसान नहीं थी।

Kailash Kher on his suicide attempt here Unknown Facts About Kailash Kher
कैलाश खेर - फोटो : सोशल मीडिया

जब उन्होंने गायकी को अपनी जिंदगी बनाने की ठानी तो उनके परिवार ने इसका विरोध किया लेकिन कैलाश भी कहां हार मानने वाले थे। उन्होंने 14 साल की कच्ची उम्र में संगीत के लिए अपना घर छोड़ दिया। इस दौरान कैलाश काफी घूमे-फिरे। वो जगह-जगह जाकर लोक संगीत के बारे में पढ़ने-जानने लगे। कैलाश के लिए इतनी कम उम्र में इस रास्ते पर निकलना आसान नहीं था। रोजी-रोटी के लिए कैलाश बच्चों को संगीत के ट्यूशन देने लगे।

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कैलाश खेर - फोटो : सोशल मीडिया

 हर बच्चे से वो 150 रुपये लेते थे और इस पैसे से अपने खाने, पढ़ाई और संगीत का खर्चा निकालते थे। साल 1999 कैलाश के लिए सबसे कठिन वर्षों में से एक रहा। ये वो दौर था जब कैलाश का जीवन अंधेरे में डूब गया था और उम्मीद की कोई किरण नजर नहीं आ रही थी। कैलाश ने इस साल अपने दोस्त के साथ हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट बिजनेस शुरू किया। कैलाश और उनके दोस्त को इसमें भारी नुकसान हुआ। कैलाश ने इस गम में आत्महत्या करने की कोशिश भी की थी। डिप्रेशन के चलते उन्होंने ऋषिकेश का रुख किया था।

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कैलाश खेर - फोटो : सोशल मीडिया

दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद कैलाश ने साल 2001 में मुंबई का रुख किया। वहां कैलाश गुजारा करने के लिए गायकी के जो ऑफर मिलते, तुरंत अपना लेते। उनके पास स्टूडियो जाने के पैसे नहीं होते थे। घिसी हुई चप्पलें पहने कर कैलाश मुंबई की गलियां छानते थे। कैलाश के लिए ये शहर नया जरूर था लेकिन संगीत के जूनून ने उन्हें इस मुश्किल दौर में हिम्मत दी। कैलाश की जिंदगी में उम्मीद की किरण तब नजर आई जब वो म्यूजिक डायरेक्टर राम संपत से मिले और उन्होंने कैलाश को एड में जिंगस्ल गाने का मौका दिया।

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कैलाश खेर - फोटो : सोशल मीडिया

इस मेहनत का फल उन्हें 'अंदाज' फिल्म में मिला। इस फिल्म में कैलाश मे 'रब्बा इश्क न होवे' गाना गाया था। ये गाना आते ही लोगों की जुबान पर चढ़ गया। इसके बाद 'वैसा भी होता है' पार्ट 2 में कैलाश ने गाना 'अल्लाह के बंदे' गाया। इस गाने की लोकप्रियता ऐसी है कि कैलाश आज भी इसी गाने से जाने जाते हैं। इसके बाद कैलाश ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। बॉलीवुड में उन्होंने 'रब्बा', 'ओ सिकंदर' और 'चांद सिफारिश' जैसे गाने गाए हैं। इनमें से दो गानों के लिए कैलाश को फिल्मफेयर का बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड भी मिल चुका है। 

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