परिवार के साथ बिताए छोटे-छोटे पल ही जिंदगी की सबसे प्यारी यादें बन जाते हैं। कभी सुबह नाश्ते की मेज पर होने वाली बातचीत पूरे दिन चेहरे पर मुस्कान बनाए रखती है, तो कभी बच्चों की कोई मासूम बात सुनकर थकान भी दूर हो जाती है। घर में पिता और बेटे का रिश्ता भी कुछ ऐसा ही होता है। पिता जहां बेटे को हर कदम पर सही रास्ता दिखाने की कोशिश करते हैं, वहीं बेटा अपने सवालों और शरारतों से उन्हें खूब हंसाता है। कभी पढ़ाई को लेकर दोनों के बीच मजेदार बातचीत होती है तो कभी मोबाइल, जेब खर्च और दोस्तों की बात पर सवाल-जवाब शुरू हो जाते हैं। कई बार बेटा ऐसा जवाब दे देता है कि पिता के पास भी मुस्कुराने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। पिता की समझदारी और बेटे की हाजिरजवाबी का यही मेल घर के माहौल को खुशनुमा बना देता है। आइए पढ़ते हैं पिता और बेटे के बीच होने वाली ऐसी ही कुछ मजेदार बातचीत।
देसी जोक्स: पिता- पढ़ाई कैसी चल रही है? बेटे ने दिया ऐसा जवाब कि पेट पकड़ कर हंसेंगे आप
Desi Jokes: पिता और बेटे के रिश्ते में प्यार, सीख और हंसी-मजाक का खास मेल होता है। कभी पिता बेटे को समझाने की कोशिश करते हैं तो कभी बेटे के मजेदार जवाब उनकी सारी गंभीरता दूर कर देते हैं। पढ़ाई, मोबाइल और जेब खर्च से जुड़ी ये छोटी-छोटी बातें हर परिवार को अपनी-सी लगेंगी।
पिता - बेटा, तुम्हें मोबाइल इतना पसंद क्यों है?
बेटा - पापा, इसमें दुनिया भर की जानकारी मिल जाती है।
पिता - तो बताओ, मेहनत का फल क्या होता है?
बेटा - छुट्टी वाले दिन भी मम्मी के हाथ का काम करना!
बेटा - पापा, आप बचपन में पढ़ाई में कैसे थे?
पिता - मैं हमेशा क्लास में सबसे आगे रहता था।
बेटा - सच में? फिर पीछे बैठने वाले बच्चों को बोर्ड कैसे दिखता था?
पिता - बेटा, मैं पढ़ाई में आगे था, बैठने में नहीं!
पिता - बेटा, तुम्हारा जेब खर्च इतनी जल्दी खत्म कैसे हो जाता है?
बेटा - पापा, महंगाई बहुत बढ़ गई है।
पिता - लेकिन तुम तो सिर्फ दोस्तों के साथ नाश्ता करते हो।
बेटा - वही तो पापा, दोस्त भी महंगे पड़ते हैं!
बेटा - पापा, आप हमेशा कहते हैं कि समय बहुत कीमती है।
पिता - बिल्कुल, समय से ज्यादा कीमती कुछ नहीं।
बेटा - तो फिर रविवार को मुझे सुबह जल्दी क्यों उठाते हैं?
पिता - ताकि तुम भी कीमती समय की कीमत समझ सको!
(डिस्क्लेमर- इस कैटिगरी में लगाए गए जोक्स और चुटकुले वॉट्सऐप व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वायरल कंटेंट से लिए गए हैं। इनका मकसद सिर्फ लोगों को हंसाना है। हमारा उद्देश्य किसी जाति, धर्म, मत, नस्ल, रंग या लिंग के आधार पर किसी का उपहास उड़ाना या उसे नीचा दिखाना या किसी पर टीका-टिप्पणी करना बिल्कुल नहीं है)