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Bihar: Nitish Kumar made RCP Singh a leader from IAS, now why does he want to eliminate him?
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Bihar: नीतीश ने आरसीपी को IAS से नेता बनाया, अब उन्हें ही क्यों खत्म करना चाह रहे? जानें इसके पीछे की राजनीति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Sat, 06 Aug 2022 10:56 PM IST
सार
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह में पिछले कुछ समय से काफी खटास बढ़ गई थी। यही कारण है कि मंत्री पद जाते ही खुद की पार्टी से इतने बड़े आरोप लगने पर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं। कहा जाने लगा है कि जेडीयू में कुछ लोग हैं, जो आरसीपी सिंह की राजनीति खत्म करना चाहते हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री रामचंद्र प्रसाद सिंह यानी आरसीपी सिंह मुश्किल में फंस गए हैं। उन्हें अपनी ही पार्टी जेडीयू ने नोटिस थमा दिया है। आरोप है कि राज्यसभा सांसद और फिर केंद्रीय मंत्री रहते हुए आरसीपी सिंह ने अकूत अचल संपत्ति बनाई है। वह भी गलत तरीके से। राज्यसभा की सदस्यता खत्म होने पर पिछले महीने ही आरसीपी सिंह ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह में पिछले कुछ समय से काफी खटास बढ़ गई थी। यही कारण है कि मंत्री पद जाते ही खुद की पार्टी से इतने बड़े आरोप लगने पर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं। कहा जाने लगा है कि जेडीयू में कुछ लोग हैं, जो आरसीपी सिंह की राजनीति खत्म करना चाहते हैं। आइए समझते हैं पूरी सियासत...
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नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह
- फोटो : अमर उजाला
नीतिश कुमार ही लेकर आए थे राजनीति में
आरसीपी सिंह बिहार के नालंदा जिले से आते हैं। यहीं छह जुलाई 1958 में उनका जन्म हुआ था। सिंह यूपी कैडर के आईएएस अफसर रहे हैं। वह पहली बार 1996 में नीतीश कुमार के संपर्क में तब आए जब वो तत्कालीन केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के निजी सचिव थे। नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह के बीच दोस्ती इसलिए भी गहरी हुई क्योंकि दोनों ही बिहार के नालंदा से हैं और एक ही जाति से आते हैं।
नीतीश कुमार जब केंद्र सरकार में मंत्री बने तो आरसीपी सिंह को अपने साथ ले आए। नीतीश कुमार रेलमंत्री बने थे तो आरसीपी सिंह को विशेष सचिव बनाया। नवंबर 2005 में नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने तो आरसीपी सिंह को साथ लेकर बिहार भी आए और प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद आरसीपी की जेडीयू में पकड़ मजबूत होने लगी। 2010 में आरसीपी सिंह ने वीआरएस लिया, फिर जेडीयू ने उन्हें राज्यसभा के लिए नामित कर दिया। 2016 में पार्टी ने उन्हें फिर से राज्यसभा भेजा। 2020 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनाया गया।
2021 में जब केंद्र में मोदी कैबिनेट का विस्तार हुआ तो आरसीपी सिंह जेडीयू कोटे से केंद्र सरकार में मंत्री बना दिए गए। उन्हें इस्पात विभाग का मंत्री बनाया गया था।
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तस्वीर 2021 की है, जब आरसीपी सिंह केंद्रीय मंत्री बने थे।
- फोटो : अमर उजाला
फिर नीतीश कुमार से बढ़ने लगीं दूरियां
2021 में जब आरसीपी सिंह केंद्रीय मंत्री बने तो कुछ दिन तक सबकुछ ठीक चला। बताया जाता है कि इसके बाद आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार में अनबन की बातें आने लगीं। हालांकि, खुले मंच से दोनों ने कभी एक-दूसरे पर निशाना नहीं साधा।
कहा जाता है कि केंद्र सरकार में मंत्री बनने के बाद आरसीपी सिंह भाजपा के काफी करीब आ गए थे। इसके चलते उनकी दूरियां नीतीश कुमार से बढ़ने लगीं थीं। यही कारण है कि आरसीपी सिंह को पार्टी ने दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा। जिसके चलते उन्हें केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
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नीतीश कुमार
- फोटो : Social media
अब जानिए जेडीयू ने नोटिस में क्या कहा?
जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने आरसीपी सिंह को नोटिस भेजा है। इसमें लिखा है, 'नालंदा जिला जदयू के दो साथियों ने साक्ष्य के साथ शिकायत की है। इसमें कहा गया है कि अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार आपके एवं आपके परिवार के नाम से वर्ष 2013 से 2022 तक अकूत अचल संपत्ति पंजीकृत कराई गई है। इसमें कई प्रकार की अनियमितताएं नजर आती हैं। आप लंबे समय से नीतीश कुमार के साथ अधिकारी व राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में काम करते रहे हैं। आपको नीतीश कुमार ने दो बार राज्यसभा का सदस्य, पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव, राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा केंद्र में मंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर पूर्ण विश्वास व भरोसे के साथ दिया।’
‘आप इस तथ्य से भी अवगत हैं कि नीतीश कुमार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हैं। इतने लंबे सार्वजनिक जीवन के बावजूद उन पर कभी कोई दाग नहीं लगा और न उन्होंने कोई संपत्ति बनाई। निर्देशानुसार पार्टी आपसे अपेक्षा करती है कि शिकायत का बिंदुवार जवाब दें। कुशवाहा ने नोटिस का तत्काल जवाब देने का भी अनुरोध किया है।'
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जदयू नेता आरसीपी सिंह
- फोटो : एएनआई
तो क्या आरसीपी सिंह की राजनीति खत्म करना चाहती है जेडीयू?
हमने ये समझने के लिए बिहार के वरिष्ठ पत्रकार दयाशंकर झा से बात की। उन्होंने कहा, 'जेडीयू ने जिस तरह से आरसीपी सिंह को नोटिस दिया है, उससे साफ पता लगता है कि नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह के बीच कड़वाहट काफी बढ़ चुकी है। किसी भी सार्वजनिक नेता पर भ्रष्टाचार का आरोप काफी गंभीर होता है। वह भी तब जब अपनी ही पार्टी की तरफ से इस तरह के आरोप लगाए गए हों। मतलब साफ है कि जेडीयू में कुछ लोग हैं, जो आरसीपी सिंह की राजनीति अब पूरी तरह से खत्म करना चाहते हैं।' आगे झा इसे तीन बिंदुओं में समझाते हैं।
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