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बजट सत्र 13 दिन के लिए स्थगित: महिला आरक्षण को लेकर 16 अप्रैल से फिर बैठेगी संसद, जानिए मोदी सरकार का प्लान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 02 Apr 2026 06:54 PM IST
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सार
महिला आरक्षण कानून को जल्द से जल्द लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। 2 अप्रैल को खत्म होने वाले संसद के बजट सत्र को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय, 16 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। 16 अप्रैल से संसद फिर बैठेगी।
महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार ले सकती है बड़ा फैसला
- फोटो : एडॉब स्टॉक / अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
संसद से इस वक्त बड़ी खबर सामने आ रही है। गुरुवार 2 अप्रैल को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने वाला बजट सत्र खत्म नहीं हुआ है। सरकार ने इसे आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब राज्यसभा और लोकसभा में सभी सांसद एक छोटे से ब्रेक के बाद 16 अप्रैल को सुबह 11 बजे फिर से बैठेंगे।
आखिर क्यों अचानक बुलाया गया सत्र?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार का पूरा फोकस अब 'महिला आरक्षण कानून' को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने पर है। इसके लिए लोकसभा की मौजूदा सीटों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 816 करने की तैयारी है। इसी से जुड़े बिल और अन्य जरूरी संविधान संशोधनों को पास कराने के लिए संसद को दोबारा बुलाया जा रहा है। यह सत्र 16 अप्रैल से लेकर 18 अप्रैल तक चलेगा।
गुरुवार को जब सदन की कार्यवाही चल रही थी, तब राज्यसभा के उप-सभापति हरिवंश ने सदन को 16 अप्रैल तक के लिए स्थगित करने की घोषणा की। पहले के तय कार्यक्रम के मुताबिक, 28 जनवरी से शुरू हुआ बजट सत्र आज यानी 2 अप्रैल को ही समाप्त होने वाला था। लेकिन सरकार के एजेंडे में कुछ बड़ा और जरूरी काम बाकी है, जिसके चलते इस शेड्यूल को बदला गया है।
यह भी पढ़ें: क्या नाटो को छोड़ सकता है अमेरिका?: ईरान संघर्ष में साथ न मिला तो भड़के ट्रंप, जानें यह कितना मुमकिन, कैसा असर
क्यों पड़ी संशोधन की जरूरत?
गौरतलब है कि वर्ष 2023 में संसद ने भारी बहुमत से महिला आरक्षण बिल को पास किया था। लेकिन उस कानून में एक पेंच फंसा था। नियम के मुताबिक, देश में अगली जनगणना और परिसीमन के बाद ही महिला आरक्षण लागू हो सकता था। इस प्रक्रिया में लंबा वक्त लग सकता है और मुमकिन था कि 2029 के लोकसभा चुनाव तक भी यह लागू न हो पाए।
अब सरकार इसी अड़चन को दूर करना चाहती है। सूत्रों की मानें तो सरकार एक संशोधन बिल ला रही है, जिससे नई जनगणना का इंतजार किए बिना, 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। मोदी सरकार चाहती है कि महिलाओं को जल्द उनका हक मिले।
लोकसभा में बढ़ सकती हैं सीटें!
इस बजट विशेष सत्र में अगर यह बिल आता है, तो भारतीय संसद में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। चर्चा है कि इस संशोधन के जरिए लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 816 किया जा सकता है। यानी सीटों की संख्या में सीधे 50 फीसदी की बढ़ोतरी। अगर ऐसा होता है, तो बढ़ी हुई सीटों में से एक-तिहाई यानी लगभग 273 सीटें सीधे महिलाओं के लिए रिजर्व हो जाएंगी।
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आखिर क्यों अचानक बुलाया गया सत्र?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार का पूरा फोकस अब 'महिला आरक्षण कानून' को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने पर है। इसके लिए लोकसभा की मौजूदा सीटों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 816 करने की तैयारी है। इसी से जुड़े बिल और अन्य जरूरी संविधान संशोधनों को पास कराने के लिए संसद को दोबारा बुलाया जा रहा है। यह सत्र 16 अप्रैल से लेकर 18 अप्रैल तक चलेगा।
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गुरुवार को जब सदन की कार्यवाही चल रही थी, तब राज्यसभा के उप-सभापति हरिवंश ने सदन को 16 अप्रैल तक के लिए स्थगित करने की घोषणा की। पहले के तय कार्यक्रम के मुताबिक, 28 जनवरी से शुरू हुआ बजट सत्र आज यानी 2 अप्रैल को ही समाप्त होने वाला था। लेकिन सरकार के एजेंडे में कुछ बड़ा और जरूरी काम बाकी है, जिसके चलते इस शेड्यूल को बदला गया है।
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क्यों पड़ी संशोधन की जरूरत?
गौरतलब है कि वर्ष 2023 में संसद ने भारी बहुमत से महिला आरक्षण बिल को पास किया था। लेकिन उस कानून में एक पेंच फंसा था। नियम के मुताबिक, देश में अगली जनगणना और परिसीमन के बाद ही महिला आरक्षण लागू हो सकता था। इस प्रक्रिया में लंबा वक्त लग सकता है और मुमकिन था कि 2029 के लोकसभा चुनाव तक भी यह लागू न हो पाए।
अब सरकार इसी अड़चन को दूर करना चाहती है। सूत्रों की मानें तो सरकार एक संशोधन बिल ला रही है, जिससे नई जनगणना का इंतजार किए बिना, 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। मोदी सरकार चाहती है कि महिलाओं को जल्द उनका हक मिले।
लोकसभा में बढ़ सकती हैं सीटें!
इस बजट विशेष सत्र में अगर यह बिल आता है, तो भारतीय संसद में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। चर्चा है कि इस संशोधन के जरिए लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 816 किया जा सकता है। यानी सीटों की संख्या में सीधे 50 फीसदी की बढ़ोतरी। अगर ऐसा होता है, तो बढ़ी हुई सीटों में से एक-तिहाई यानी लगभग 273 सीटें सीधे महिलाओं के लिए रिजर्व हो जाएंगी।
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